Friday, March 20, 2026
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एक छत के नीचे तो आई प्रमुख चिकित्सा पद्धतियां

  • लेकिन दीवार के साथ! आयुर्वेद, यूनानी ओर होम्योपैथिक चिकित्सालयों को भवन की दरकार
  • एलोपैथी के लिए अस्पतालों की शरण में पहुंचाया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकार की सभी प्रमुख चिकित्सा पद्धतियों को एक छत के नीचे उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाया जाना हालांकि अभी बाकी है, लेकिन भवन की जरूरत ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सालयों को जरूर एलौपैथी के लिए बने अस्पतालों की शरण में पहुंचा दिया है। हालांकि अभी तक इन प्रमुख पैथियों के चिकित्सक अभी तक एक दूसरे के प्रति उस विश्वास का भाव पैदा नहीं कर पा रहे हैं, जिसको लेकर सरकारी स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर आयुष मंत्रालय के माध्यम से आयुर्वेद, योगा, यूनानी, सिद्ध एवं होम्योपैथी को खूब बढ़ावा दिया गया है। आयुष मंत्रालय इन सभी स्वास्थ्य प्रणालियों के संवर्द्धन एवं विकास, इन प्रणालियों के माध्यम से आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने तथा इनसे संबंधित चिकित्सा शिक्षा के संचालन का कार्य देखता है। मेरठ जनपद की बात की जाए, तो यहां आयुर्वेद के 18, यूनानी के चार और होम्योपैथी के 12 चिकित्सालय संचालित हैं।

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किसी समय किराये के भवन में चलने वाले इन चिकित्सालयों में से अधिकांश 2018 तक पीएचसी, सीएचसी के भवनों में शिफ्ट किए जा चुके हैं। सरकार की मंशा भी यही रही है कि सभी प्रमुख चिकित्सा पद्धतियों के लिए मरीजों को एक ही छत के नीचे उपचार मिल सके। और चिकित्सक परस्पर सामंजस्य बनाकर रोगी की स्थिति के अनुरूप उसे संबंधित पैथी के चिकित्सक के पास रेफर कर सकें।

एलोपैथी के लिए बने पीएचसी और सीएचसी भवनों में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के चिकित्सालयों में से अधिकतर को शिफ्ट तो करा दिया है। यानी चारों प्रमुख चिकित्सा पद्धति से उपचार करने वाले चिकित्सक एक छत के नीचे तो बैठने लगे हैं, लेकिन एक-दूसरी पद्धति के प्रति विश्वास के अभाव में अभी तक चिकित्सकों के बीच एक दीवार अभी तक कायम है।

स्थिति यह है कि सभी चिकित्सक आज भी अपनी-अपनी चिकित्सा पद्धति को सर्वोपरि मानकर चलते हैं। अगर कोई रोगी अपने मरज को लेकर दूसरी चिकित्सा पद्धति के बारे में चिकित्सक से बात कर ले, तो उनका जवाब नकारात्मक ही होता है। इस संबंध में आयुष विभाग से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि सरकार की ओर से यह प्रयास गंभीरता से किया जा रहा है कि एलोपैथी के साथ आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के चिकित्सकों का सामंजस्य बनाया जाए।

जिसके आधार पर सभी चिकित्सक किसी भी रोग को लेकर उसके बेहतर उपचार को तजवीज करते हुए संबंधित पैथी के चिकित्सक के पास सहज होकर और पूर्ण विश्वास के साथ मरीजों को भेज सकें। इसके पीछे सरकार की मंशा यही है कि हर पैथी में किसी न किसी रोग का बेहतर उपचार मौजूद है। जिसको लेकर चिकित्सकों में मतभेद और भ्रांतियां समाप्त की जाएं। उम्मीद की जा रही है कि ऐसा निकट भविष्य में संभव हो सकेगा।

ये हैं आयुष की चिकित्सा पद्धतियों के आधार

आयुर्वेद: पूर्णरूप से प्राकृतिक सिद्धांतों पर आधारित आयुर्वेद विश्व का प्राचीनतम चिकित्सा विज्ञान है। आयुर्वेद के प्राचीनतम ग्रंथों में चरक संहिता, सुश्रुत संहिता एवं अष्टांग हृदयम प्रमुख हैं। आयुर्वेद प्रमुख रूप से त्रिदोष- वात, पित्त और कफ पर आधारित है।

यूनानी: इस चिकित्सा पद्धति का उद्भव व विकास यूनान में हुआ। भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति अरबों के जरिये पहुंची और यहां के प्राकृतिक वातावरण और अनुकूल परिस्थितियों की वजह से इस पद्धति का बहुत विकास हुआ। इस पद्धति के मूल सिद्धांतों के अनुसार, रोग शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। शरीर में रोग उत्पन्न होने पर रोग के लक्षण शरीर की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं।

होम्योपैथी: होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का प्रादुर्भाव एक जर्मन डॉ. सैम्युल फ्रेडरिक हैनीमन ने किया। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से विभिन्न रोगों का बहुत ही कम खर्च पर उपचार किया जा सकता है।

योग: योग मुख्यत: एक जीवन पद्धति है, इसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि आठ अंग है।

सिद्ध: यह भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। सिद्ध प्रणाली काफी हद तक प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखती है।

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