Sunday, April 12, 2026
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बिना इलाज के मर रहे हैं गन्ना किसान, मलकपुर चीनी मिल ने नहीं किया भुगतान

  • कई किसान असाध्य बीमारी से पीड़ित होने पर घर पर ही कराहने को मजबूर
  • पीड़ित किसानों के प्रार्थनापत्र पर डीएम कुल भुगतान का आधा या एक लाख रुपये तक के भुगतान कर रहे हैं आदेश

जनवाणी संवाददाता |

बड़ौत: अपनी ही फसल के दाम मांगने के लिए किसान को अधिकारियों के सामने भीख सी मांगनी पड़ रही है। मलकपुर चीनी मिल ने गन्ना किसानों को पिछले पेराई सत्र का मुश्किल से आधा भी भुगतान नहीं किया। गन्ना किसान अपने भुगतान पाने को तड़प रहे हैं। किसी असाध्य बीमारी से दुखी किसान अस्पताल में इलाज नहीं करा पा रहे हैं।

मिल के अधिकारी हैं कि डीएम से प्रार्थना पत्र देने की बात कर रहे हैं। डीएम हैं कि वह मिल को कुल भुगतान का पचास प्रतिशत या फिर एक लाख रुपये तक भुगतान देने के आदेश कर रही हैं। ऐसे में गन्ना किसान अपने ही भुगतान के लिए एक-एक रुपये के लिए भीख मांगने को मजबूर हैं।

यहां विदित है कि मलकपुर चीनी मिल ने इस वर्ष पिछले पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया है। मिल पर गन्ना किसानों का करीब चार सौ करोड़ रुपये के करीब भुगतान बकाया है। गन्ना किसान भुगतान की मांग कर रहे हैं।

मलकपुर चीनी मिल के अधिकारी अपनी आदत के अनुसार बकाए को एक साल बाद ही देते हैं। इस साल भी ऐसा ही है। लेकिन अंतर यह है कि यदि कोई किसान किसी बीमारी से पीड़ित है या फिर उसे अपनी बेटी की शादी करनी है तो ऐसे में मिल से उस किसान को उसका भुगतान मिल जाता था। हालांकि किसानों को इसमें भी काफी पापड़ बेलने पड़ते रहे हैं। तब जरूरतमंद गन्ना किसानों को उसका भुगतान मिलता है।

बदल दी गई बीमार किसान को भुगतान मिलने का नियम

मलकपुर चीनी मिल भुगतान देने में आनाकानी तो करता ही है। लेकिन यहां अधिकारियों और किसानों ने मिल बैठकर एक नियम बनाया था कि जरूरतमंद बीमार गन्ना किसान या बेटी की शादी के लिए उसका भुगतान मिल की ओर से मिल जाएगा। अभी तक ऐसा ही होता था। बस गन्ना किसान को रुपये लेने का कारण मय सबूत के देना होता था।

इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा है। जिला गन्ना अधिकारी ने यह नियम एक तरफा बदल दिया। अब उन्होंने मलकपुर चीनी मिल को निर्देश दे रखा है कि वह अधिकतम एक लाख रुपये का भुगतान किसी अर्जेंट मामले में दें या फिर 50 प्रतिशत ही बकाया भुगतान करें। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी में कई लाख रुपये का खर्च होता है।

यदि किसी किसान का दस लाख रुपये बकाया है तो उसे मुश्किल से एक लाख रुपया ही उसका मिल सकेगा। मृतक किसान का संपूर्ण भुगतान उसके आश्रितों को देने का नियम था। लेकिन यह नियम भी बदल दिया गया है। यह इसलिए था कि यदि किसी किसान पर कर्ज है तो वह भुगतान से मृतक किसान कर्ज को वह उतार सकें।

मिल पर पिछले पेराई सत्र का गन्ना किसानों का करीब 295 करोड़ रुपये बकाया है। कुल भुगतान में से पांच जनवरी तक का ही भुगतान दिया गया है। बीमार गन्ना किसानों की अब जान पर बन पड़ी है।कम से कम एक हजार गन्ना किसानों की है अर्जेंट में

भुगतान की मांग

इस बार मिल अधिकारी पीड़ित किसान से बीमारी से संबंध प्रमाण देने व डीसीओ व डीएम से आदेश लाने की बात कर रहे हैं। इसमें एक तो किसान बीमार है। दूसरे वह खुद चलकर अधिकारियों के पास कैंसे जाएं।

तीसरे यदि उन्हें प्रार्थनापत्र दिया जाए तो तक कई माह तक वह उन्हें उलझाए रखते हैं।  एक दर्जन कैंसर से पीड़ित किसानों के सामने  चारपाई पर तड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

मलकपुर चीनी मिल से संबंधित करीब एक दर्जन ऐसे किसान हैं, जिन्हें असाध्य बीमारी है। इस असाध्य बीमारी में कैंसर, पीलिया, फेफडों से संबंधित बीमारी के अलावा दुघर्टना से ग्रस्त किसान हैं।

इन किसानों के प्रार्थनापत्र डीसीओ कार्यालय में गए हुए हैं। वहां से डीसीओ ने अपने निर्देंशों का ही पालन किया। यानि अधिकतम एक लाख रुपये का भुगतान या फिर उसके बकाया का पचास प्रतिशत भुगतान देने की बात कही।

लुहारी गांव निवासी किसान सहेन्द्र की पत्नी निर्देश देवी कैंसर से पीड़ित है। गरीब किसान भुगतान न होने पर डीसीओ कार्यालय में अर्जी लगाई। उसकी अर्जी ही मिल से गायब हो गई।

अब वह किसान इधर से उधर चक्कर लगाने को मजबूर है। जबकि कैंसर से पीड़ित महिला के लिए एक-एक दिन जीवन का कीमती है। बासौली का किसान पवन पुत्र चंदगी भी कैंसर से पीड़ित है। उ

सके भुगतान को नहीं दिया जा रहा है। बरवाला के किसान हरेन्द्र की मौत हो चुकी है। उसके आश्रितों को भुगतान नहीं मिल पाया है। इस तरह से क्षेत्र में करीब एक हजार ऐसे किसान हैं, जिन्हें हाल में ही भुगतान चाहिए। लेकिन उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। वहीं डीसीओ से इस संबंध में बात करने की कौशिश की गई। लेकिन उन्होंने फोन रीसीव नहीं किया।

भाजपा सरकार पर लगाया गन्ना किसानों के उत्पीड़न का आरोप

रालोद नेता व मलकपुर गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन रामकुमार ने कहा कि भाजपा की सरकार में अधिकारी तानाशाह हो गए हैं। वह अब भाजपा के नेता भी चुप हैं। जो पहले मलकपुर मिल से चौदह दिन में भुगतान दिलाने की बात करते थे।

किसान बीमारी से मर रहे हैं। लेकिन किसानों का बकाया ही मिल नहीं दे रहे हैं। वहीं नरेश ठेकेदार बरवाला ने बताया कि किसानों की वैसे ही हालत बदतर है। किसान की आमदनी का जरिया ही गन्ना है। गन्ना किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। किसी भी भाजपा नेता ने उनकी बात सरकार तक नहीं पहुंचाई।

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