Friday, March 13, 2026
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करवाचौथ को लेकर दुल्हन की तरह सजे बाजार

  • शृंगार करना है मुझे, सजना के लिए, ब्यूटी पार्लर में भी बुकिंग फुल

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: करवाचौथ के व्रत में शिव पार्वती कार्तिकेय गणेश और चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। प्राचीन मान्यता के अनुसार करवाचौथ के दिन शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इसके साथ ही सुहाग की सामग्री भेंट करना भी उत्तम होता है। भारतीय संस्कृति में त्योहार न केवल हमें हमारी परंपराओं से परिचित कराते हैं, बल्कि हमारे अंदर आस्था और विश्वास जगाने का भी काम करते हैं।

यही वजह है कि विकास के दौर में ईश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा कम नहीं हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप हम चांद में सुहाग की तस्वीर देखने के लिए करवा चौथ का व्रत रखते हैं। सुहागिनों का पर्व करवा चौथ पर चांद के दीदार की बेकरारी त्योहार के उल्लास में चार चांद लगा देती है। 13 अक्टूबर को होने वाले इस पर्व को लेकर बाजार भी तैयार हैं। बाजार त्योहार के रंग में रंग चुका है।

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पौराणिक ग्रंथों के साथ ही सामाजिक मान्यताएं हमे अपने धर्म के प्रति धर्मनिष्ठ बनाती हैं। इसी मंशा के चलते हम हर त्योहार को अपने ढंग से मनाने में आगे रहते हैं। चांद के दीदार का पर्व भले ही 13 अक्टूबर को है, लेकिन बाजार तैयार है। करवा चौथ पर पूजन सामग्री के साथ ही डिजाइनर करवे भी बाजार में मौजूद हैं। चांदी के करवे के साथ ही सोने के पन्नी चढ़ी करवा भी बाजार में मौजूद है।

करवा विक्रेता पुनीत ने बताया कि हर रेंज के आकर्षक करवे बनवाए गए हैं। महिलाओं के लिए शृंगार का सामान भी बनाया गया है। कम रेंज में आकर्षक आभूषण महिलाओं को रास आएंगे। चूरा, लावा के साथ ही खिलौने भी बाजार में मौजूद हैं। मेहंदी लगवाने के साथ ही ब्यूटी पार्लर की दुकानों पर भी बुकिंग शुरू हो गई है।

8 बजकर 7 मिनट पर निकलेगा चांद

ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल ने बताया कि 13 अक्टूबर को चतुर्थी शाम 5:45 से 6:59 बजे तक रहेगी। इस दौरान पूजन का शुभ मुहूर्त है। इस बार करवाचौथ में चांद का पूजन विशेष फलदायी होगा। चंद्रमा का पूजन स्त्रियों के लिए पति और बच्चों के लिए अच्छा रहेगा। पूजन चंद्रोदय के पहले करना उत्तम होगा। चंद्रोदय रात 8 बजकर 7 मिनट पर होगा। इससे पहले प्रदोष बेला में 7 बजकर 30 मिनट तक पूजन कर सकते हैं।

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