- दो मीटर चौड़ी गली में 100 दुकानों का कॉम्प्लेक्स कैसे, देना होगा जवाब
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: डेढ़ से दो मीटर चौड़ी गली में 100 से ज्यादा दुकानों का कॉम्प्लेक्स कैसे बन गया? इसी मामले को लेकर चीफ जस्टिस की कोर्ट में पेश होकर मेडा (मेरठ विकास प्राधिकरण) अफसरों को यह जवाब देना है। शहर के कई पुराने और बेहद तंग गलियों वाले इलाकों में मकानों को तोड़कर बनाए गए 100 से 150 दुकानों के कॉम्प्लेक्सों को लेकर दायर की गयी जनहित याचिका पर आज हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि इसके चलते दो दिन पहले से मेडा सचिव आनंद सिंह हाईकोर्ट प्रयागराज में डेरा डाले हैं।
शहर के बेहद भीड़ व घनी आबादी वाले देहलीगेट थाना क्षेत्र से सटे शीश महल, शहर सराफा, नील की गली, कागजी बाजार, शहर घंटाघर आदि इलाकों में तमाम लोगों ने पुराने मकानों को खरीद कर उनमें कॉम्प्लेक्स बना दिए हैं। केवल कॉम्प्लेक्स बनाए ही नहीं है, बल्कि उनकी बिक्री भी कर दी गई है। ये तमाम कॉम्प्लेक्स उन लोगों के हैं जिनकी कई पुश्तें दूसरे कारोबार करती रही है, लेकिन अब इन्होंने प्रॉपर्टी के इस धंधे में हाथ आजमाया है। नाम न छापे जाने की शर्त पर नील की गली में ऐसा ही एक कॉम्प्लेक्स बनाने वाले कारोबारी ने बताया कि इस धंधे में नुकसान की एक रत्ती भी गुंजाइश नहीं।
ये तमाम कॉम्प्लेक्स पुराने मकानों व हवेलियों को तोड़कर बनाए गए हैं। शहर सराफा बाजार की यदि बात करें तो वहां तो डेढ़ से दो मीटर की गलियों में तथा शीश महल इलाके की यदि बात करें तो वहां एक मीटर चौड़ी गली में बने मकानों को तोड़कर कॉम्प्लेक्स बनाकर दुकानें भी बेच दी गयी है। 100 साल पुराने मकानों को तोड़कर उनमें अवैध कॉम्प्लेक्स बनाने का मुद्दा जनवाणी ने गत 28 जून को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उसको आधार बनाकर मिशन कंपाउंड निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट मनोज चौधरी ने जनहित याचिका दायर की। उन्होंने बताया कि आज यानी गुरुवार चीफ जस्टिस कोर्ट में मामले की सुनवाई है।
कोई एनओसी नहीं
फायर सीएफओ संतोष राय ने बताया कि दो मीटर की गली में बनने वाले अवैध कॉम्प्लेक्सों के लिए भले ही किसी भी इलाके में हो कोई एनओसी नहीं जारी की गयी है।
कार्रवाई की दी जानकारी
मेडा सचिव आनंद सिंह ने बताया कि अवैध कॉम्प्लेक्सों के खिलाफ पूरी सख्ती बरती जा रही है। ध्वस्तीकरण भी किए गए हैं। कार्रवाई की जानकारी कोर्ट को दी गयी है।

