Friday, March 27, 2026
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सुरक्षा कर्मियों की कमी से जूझ रहा मेडिकल कॉलेज

  • 202 सुरक्षा कर्मियों की जरूरत, उपलब्ध केवल 73

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा कर्मियों की भारी कमी है, जरूरत से बेहद कम सुरक्षाकर्मी होने की वजह से मेडिकल प्रशासन केवल उन्हीं वार्डों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती करता है जहां ज्यादा लोगों का आना जाना लगा रहता है। वहीं, जरूरत के मुताबिक सुरक्षाकर्मी नहीं होने की वजह से मेडिकल का स्टॉफ व मरीज और उनके तीमारदार भी खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

मेडिकल कॉलेज में रोजाना पांच हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। जबकि कई महत्वपूर्ण वार्डों में मरीजों को भर्ती भी किया जाता है, लेकिन सुरक्षा कर्मियों की कमी की वजह से यहां आने वाली जनता खुद को असुरक्षित महसूस करती है। 1268 बेडों की व्यवस्था वाले मेडिकल में सुरक्षा को लेकर दिन में तो इतनी परेशानी नहीं है, लेकिन रात होते ही यहां का वातावरण आम आदमी के लिए काफी असुरक्षित हो जाता है।

वार्डों में कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं होने की वजह से किसी भी आने-जाने वाले की चेकिंग नहीं होती। जबकि बच्चा वार्ड से कई बार मासूमों के गायब होने की खबरें भी सामने आती रहती है। मुख्य गेट से लेकर गायनिक वार्ड, पिड्रियाटिक वार्ड, जनरल वार्ड, आर्थोपेडिक वार्ड आदि कई ऐसे महत्वपूर्ण वार्ड है। जहां सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होना जरूरी है, लेकिन मेडिकल प्रशासन के पास जरूरत से काफी कम सुरक्षा कर्मियों संख्या होने की वजह से यह मुमकिन नहीं है।

वहीं, रात के समय ड्यूटी करने वाले डाक्टरों व मरीजों के तीमारदारों को ऐसे अनजान लोगों का भी सामना करना पड़ता है। जिनका मेडिकल से कोई लेना-देना नहीं होता। मेडिकल प्रशासन का भी मानना है सुरक्षाकर्मियों की कमी की वजह से आम जनता व जूनियर डाक्टर्स और नर्सिंग स्टॉफ भी खुद असुरक्षित महसूस करता है।

सोमदत्त ने मेडिकल के छात्रों को दान किया शरीर

मेरठ: देहदान को महादान कहा जाता है, मृत देह मेडिकल के छात्रों के लिए साइलेंस टीचर की तरह होती है। वह इसी के जरिए इंसानी शरीर की संरचना के बारे में जानकारी हासिल करते है। इस दौरान वह शारीरिक अंगों पर को प्रैक्टिकल के जरिए पहचानते हैं और दूसरों को जीवन देना सीखते हैं। किसी भी इंसान की जिंदगी बचाने में चिकित्सकों की अहम भूमिका मानी जाती है।

वहीं, एमबीबीएस की शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों को पढ़ाई के लिए मृत इंसानी शरीर की जरूरत होती है जो बाजार में उपलब्ध नहीं होता। कुछ समय पहले तक देहदान के प्रति जागरूकता का आभाव होने की वजह से एमबीबीएस के छात्रों को कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता था, लेकिन अब लोग देहदान के प्रति जागरूक हो रहे हैं। जिससे मेडिकल के छात्रों को भी काफी मदद मिल रही है। लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने बताया कि 15 अगस्त के दिन सोमदत्त वत्स ने मेडिकल कॉलेज को अपनी देहदान करने का रजिस्ट्रेशन कराया है।

आम जनता को भी इसी तरह अपनी देहदान करने के लिए प्रेरित करने की एक यह एक अनूठी पहल है। देहदान प्रक्रिया के दौरान सोमदत्त वत्स ने कहा कि 15 अगस्त के पावन दिवस पर मैं अपना संपूर्ण शरीर मेडिकल कॉलेज में अध्यनरत छात्रों के लिए दान कर रहा हूं। इसके साथ ही सोमदत्त ने एमबीबीएस के छात्रों को उनके उज्जवल भविष्य को लेकर शुभकामनाएं भी दी।

जन्म-मृत्यु पंजीयन अनुभाग में नहीं सुधरी व्यवस्था

मेरठ: नगर निगम में जन्म-मृत्यु पंजीयन अनुभाग में व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। अनुभाग में न तो लाइट की उचित व्यवस्था है और न ही कम्प्यूटर बदले गए। स्टाफ भी कम होने और वेबसाइड स्लो चलने इस अनुभाग में समस्याएं बरकार हैं। दलालों की एंटी अभी तक बंद नहीं हुई। गत दिनों सेना के एक जवान के साथ मारपीट के बाद नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीयन अनुभाग चर्चा में रहा। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई द्वारा उक्त अनुभाग में पहुंचकर नाराजगी जताने और अधिकारियों की क्लास लेने के बाद महापौर ने इस अनुभाग का निरीक्षण कर अव्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी

और सेना के जवानों के साथ मारपीट करने के आरोपियों को हटाने व उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस अनुभाग की व्यवस्था को कोई सुधार नहीं हुआ। इस अनुभाग में लाइट की उचित व्यवस्था नहीं है, यहां अंधेरा छाया रहता है। पुराने आउट डेटेड कम्प्यूटर हैं। इन्हें अभी तक बदला नहीं गया। सेना से मारपीट करने के आरोपी एक आउट सोर्सिंग कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई। दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। इसके अलावा दो कर्मचारियों को जोनल कार्यालय तबादला कर दिया गया।

अब इस अनुभाग में कर्मचारियों की कमी हो गई। हालांकि शास्त्रीनगर और कंकरखेड़ा स्थित नगर निगम के जोनल कार्यालय में जन्म-मृत्यु पंजीयन का समस्त कार्य शुरू कर दिया गया, लेकिन अभी भी अधिकांश लोग नगर निगम मेन बिल्डिंग के अनुभाग में ही आ रहे हैं। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दफ्तर में दलालों की एंट्री बंद नहीं हुई। दलाल खुलेआम फार्मांे के गड्डे ला रहे हैं। इनका कार्य प्राथमिकता पर हो रहा है और आम लोग दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।

सीमित संसाधनों में किया जा रहा कार्य: डा. गजेन्द्र

नगर निगम के मुख्य कार्यालय परिसर में स्थित जन्म-मृत्यु पंजीयन अनुभाग के प्रभारी डा. गजेन्द्र सिंह का कहना है कि उनके पास सीमित संसाधन हैं। दफ्तर की समस्याओं के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। शीघ्र समस्याओं का शीघ्र समाधान होने की उम्मीद है।

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