जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को उसका नया अध्यक्ष मिल गया है और यह नाम भारतीय क्रिकेट में एक मजबूत घरेलू बल्लेबाज़ और आईपीएल स्टार के तौर पर पहचान रखने वाले मिथुन मनहास का है। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले से आने वाले मनहास BCCI के पहले ऐसे अध्यक्ष बने हैं, जो इस सीमावर्ती राज्य से ताल्लुक रखते हैं।
मिथुन मनहास: घरेलू दिग्गज से बीसीसीआई अध्यक्ष तक का सफर
45 वर्षीय मिथुन मनहास ने अपने करियर में दिल्ली की तरफ से 157 फर्स्ट क्लास मैच, 130 लिस्ट A और 91 T20 मुकाबले खेले हैं।
9714 फर्स्ट क्लास रन, और एक दशक से अधिक का अनुभव उन्हें भारतीय घरेलू क्रिकेट का स्तंभ बनाता है।
आईपीएल में उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स, पुणे वॉरियर्स और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेला है।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन में प्रशासक और दलीप ट्रॉफी के नॉर्थ जोन संयोजक भी रह चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी बधाई
डोडा से ही ताल्लुक रखने वाले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ट्वीट कर इसे “इतिहास का एक गौरवपूर्ण क्षण” बताया। “जम्मू-कश्मीर के दूरदराज़ इलाके डोडा से बीसीसीआई अध्यक्ष तक का सफर प्रेरणादायक है। यह पूरे देश के लिए गर्व की बात है।”
रोजर बिन्नी की जगह लेंगे मनहास
रोजर बिन्नी, 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य, उम्र सीमा (70 वर्ष) के कारण पद छोड़ चुके थे।
अध्यक्ष पद के लिए हरभजन सिंह और रघुराम भट्ट भी दौड़ में थे, पर AGM में मनहास पर सहमति बनी।
महिला क्रिकेट में भी बदलाव: अमिता शर्मा बनीं चयन समिति अध्यक्ष
पूर्व तेज गेंदबाज अमिता शर्मा को महिलाओं की चयन समिति की नई अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
उनके साथ श्यामा डे, जया शर्मा और श्रावंती नायडू भी समिति का हिस्सा होंगी।
इनका कार्यकाल 30 सितंबर से शुरू होने वाले महिला विश्व कप के बाद प्रभावी होगा।


आगे क्या होगा मनहास का रोल?
खिलाड़ी-केंद्रित नीतियों को प्राथमिकता
युवा क्रिकेटरों के विकास पर फोकस
घरेलू क्रिकेट की गुणवत्ता में सुधार
रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ BCCI संचालन
विशेषज्ञों का मानना है कि एक पूर्व खिलाड़ी के नेतृत्व में BCCI का दृष्टिकोण और भी समावेशी और खिलाड़ियों के हित में होगा।
नया नेतृत्व, नई उम्मीदें
मिथुन मनहास की नियुक्ति से BCCI में नई ऊर्जा और ताजगी की उम्मीद है।
देश के छोटे राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों को इससे बड़ा संदेश गया है कि अब क्षमता और प्रतिबद्धता ही नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा मानक है।

