जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि दुनिया में लगातार तनाव और संघर्ष की जड़ स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा है। शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद के नए दफ्तर के भूमि पूजन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि शांति तभी संभव है जब लोग अपनी सोच बदलें और सभी को एक परिवार की तरह देखें।
भागवत ने कहा कि पिछले दो हजार वर्षों में दुनिया में शांति के कई प्रयास हुए, लेकिन कोई भी पूरी तरह सफल नहीं रहा। आज भी धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। लोग खुद को दूसरों से बड़ा और दूसरों को छोटा समझते हैं, और यही कारण है कि विवाद और संघर्ष लगातार बने रहते हैं।
धर्म केवल किताबों में नहीं, व्यवहार में दिखना चाहिए
संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि शांति केवल शब्दों से नहीं आएगी। इसके लिए एकता, अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलना आवश्यक है। धर्म केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं होना चाहिए, इसे लोगों के व्यवहार और आचरण में प्रदर्शित करना होगा। उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन मेहनत और त्याग के बिना संभव नहीं है। जब तक समाज में अनुशासन नहीं होगा, तब तक बेहतर दुनिया की कल्पना करना मुश्किल है।
दुनिया को टकराव की जगह आपसी सहयोग की जरूरत
भागवत ने भारत के प्राचीन ज्ञान को उद्धृत करते हुए कहा कि हम सभी आपस में जुड़े हैं। दुनिया को अब टकराव छोड़कर तालमेल और सहयोग की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे यही मान रहा है। भारत मानवता के नियमों का पालन करता है, जबकि कई अन्य देश केवल ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ पर विश्वास करते हैं। इसलिए, दुनिया को संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी मेलजोल और समझदारी की जरूरत है।

