Thursday, March 5, 2026
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CBI: जालसाजी के आरोपी मुनव्वर खान को कुवैत से भारत लाया गया, सीबीआई को बड़ी सफलता

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को जालसाजी और धोखाधड़ी के एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ी कामयाबी मिली है। बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ करोड़ों की धोखाधड़ी कर कुवैत फरार हुआ आरोपी मुनव्वर खान अब भारत वापस लाया जा चुका है।

सीबीआई की टीम ने इंटरपोल चैनलों और विदेश मंत्रालय के सहयोग से आरोपी का कुवैत से सफल प्रत्यर्पण कराया। मुनव्वर को बुधवार को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारा गया, जहां उसे सीबीआई की एसटीबी, चेन्नई टीम ने हिरासत में ले लिया।

क्या है पूरा मामला?

सीबीआई के अनुसार, मुनव्वर खान पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप हैं। चेन्नई की एसटीबी शाखा में FIR संख्या RC 3(S)/2011 के तहत मामला दर्ज है। खान ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बैंक ऑफ बड़ौदा को कई करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया था। धोखाधड़ी के तुरंत बाद वह कुवैत भाग गया, जिससे वह लंबे समय तक भगोड़ा घोषित रहा।

इंटरपोल रेड नोटिस से हुआ ट्रैक

सीबीआई ने इस केस में 7 फरवरी 2022 को इंटरपोल के माध्यम से रेड नोटिस जारी करवाया था। इस नोटिस के बाद मुनव्वर की गतिविधियों पर वैश्विक निगरानी शुरू हुई। एनसीबी-कुवैत और स्थानीय पुलिस के सहयोग से उसे कुवैत में गिरफ्तार किया गया और भारत प्रत्यर्पित किया गया।

130 से अधिक भगोड़े अपराधी लाए गए भारत

सीबीआई ने बताया कि वह भारत में इंटरपोल के राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो (NCB-India) के रूप में कार्य करती है और दुनिया भर की एजेंसियों से समन्वय करती है। पिछले कुछ वर्षों में, इसी प्रक्रिया के तहत 130 से अधिक वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

प्रत्यर्पण में कौन-कौन था शामिल?

सीबीआई की अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग इकाई (IPCU)

विदेश मंत्रालय (MEA)

एनसीबी-कुवैत

कुवैत पुलिस

सीबीआई की एसटीबी चेन्नई टीम

इन सभी एजेंसियों के साझा प्रयासों से मुनव्वर खान का प्रत्यर्पण संभव हो सका।

सीबीआई का बयान?

सीबीआई की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया “यह प्रत्यर्पण भारत की कानून व्यवस्था की पहुंच और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम भविष्य में भी ऐसे भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेंगे।”

यह कार्रवाई देश में आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ाई को नई गति देती है और यह भी संदेश देती है कि देश छोड़ने से अपराधी कानून के दायरे से बाहर नहीं हो सकते।

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