- शोर शराबा होने पर महापौर सदन से उठकर गयीं, हाथापाई की नौबत
- बजट से पहले अन्य बिंदुओं पर चर्चा चाहते थे भाजपाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: समस्याओं पर जूझ रहे महानगर के विकास पर चर्चा के बजाए मंगलवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान एक बार तो नौबत मारपीट तक आ गयी। सदन में मौजूद सीओ कोतवाली ने बामुश्किल दोनों पार्षदों को संभाला, लेकिन इसके बाद भी सदन में शांति कायम नहीं हो सकी।
बैठक की शुरूआत भी हंगामे से हुई। बैठक खत्म हो गयी। सदन के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर की समस्याओं पर तो चर्चा दूर की बात रही, सदन में बजट तक पर चर्चा नहीं की जा सकी।

मंगलवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक मेयर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता व नगरायुक्तमनीष बंसल व अपर नगरायुक्त श्रद्धा शांडिल्य की मौजूदगी में टाउन हाल स्थित तिलक हाल में टोका टाकी और हंगामे के साथ शुरू हुई। मेयर की अनुमति ने नगरायुक्तने सदन में बजट पेश किया।
कुछ कहने के लिए मेयर ने माइक संभाला, इसी बीच भाजपा के पार्षद महेन्द्र भारती व अन्य खडे हो गए। उनका कहना था कि शहर के विकास के मुददों पर पहले चर्चा करा ली जाए। महेन्द्र भारती के इस प्रस्ताव के समर्थन में भाजपा के अनुज वशिष्ठ व अन्य पार्षद आ गए।
वहीं, दूसरी ओर मेयर खेमे के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रंजन प्रभाकर, कुंवर इकरामुद्दीन वालियान, शाह आलम आदि पार्षद का तर्क था कि पहले बजट पास होता है, उसके बाद शहर के विकास के मुद्दों पर चर्चा करा ली जाएगी। इसको लेकन वहां हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गयी।

हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कौन क्या कह रहा है, यह तक नहीं सुनाई दे रहा था। सदन में पार्षद एक-दूसरे से निपटने के अंदाज में नजरआते थे। हंगामा होते देखकर मेयर सदन से उठकर पीछे वाले कमरे में चलीं गयी।
इस पर भाजपाई पार्षदों ने सदन व शहर की जनता का अपमान करने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। नेता पार्षद दल विपिन जिंदगल भाजपा के पार्षद, महेन्द्र भारती, अनुज वशिष्ठ, सुनीता प्रजापति, पंकज गोयल, संदीप रवेड़ी समेत सभी धरने पर बैठ गए। मेयर से माफी की मांग करने लगे।
इस दौरान सदन में जबरदस्त तनाव था। एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गयी। हालात उस वक्तज्यादा खराब हो गए जब भाजपा के महेन्द्र भारती व मेयर खेमे के गफ्फार पार्षद के गरमा गरम बहस हो रही थी, तभी किसी भाजपाई ने पीछे से टिप्पणी कर दी।
इससे वो उत्तेजित हो गए और नौबत मारपीट सरीखी आ गयी। यह देखकर सदन में मौजूद सीओ कोतवाली अरविंद द्विवेदी तेजी से उनकी ओर लपके और बीच में दीवार बनकर खडे हो गए। पुलिस ने बामुकिश्कल उन्हें शांत किया।
नारों के बीच बजट पास
हंगामे के काफी देर बाद मेयर दोबारा सदन में आयीं। उनके आते ही एक बार फिर से भाजपा खेमे का हंगामा शुरू हो गया। इस बीच मेयर खेमे के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रंजन प्रभाकर, गफ्फार, कुंवर इकरामुद्दीन वालियान आदि ने बजट की काफी सदन में लहरानी शुरू कर दीं।
बजट पास-बजट पास के नार लगाने शुरू कर दिए। इससे भाजपा के पार्षद उत्तेजित हो गए। उन्होंने भी जवाब में नारेबाजी शुरू कर दी। तमाम भाजपाई उठकर अध्यक्ष के आसान तक जा पहुंचे। सभी जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, शोर इतना ज्यादा था कि कुछ सुना नहीं जा रहा था।
राष्ट्रगान के दौरान भाजपा की नारेबाजी
बजट पास का नारा लगाने वाले पार्षदों ने अचानक खडे होकर राष्ट्र गान शुरू कर दिया। जिस वक्त राष्ट्रगान हो रहा था मेयर व निगम अधिकारी व व अन्य खडे हो गए, लेकिन भाजपाइयों की नारेबाजी जारी रही। राष्ट्रगान भी विरोध व हंगामे की भेट चढ़ गया।
ये कहना है मेयर का
मेयर सुनीता वर्मा ने कहा कि बजट पास कर दिया गया है, लेकिन सदन में भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जनक आचरण किया। परंपरा के अनुसार निगम में बजट पर चर्चा कराने के बाद वह शहर की समस्याओं पर चर्चा करानी चाहती थीं, लेकिन भाजपा के पार्षद इसके लिए राजी नहीं थे। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया।
ये कहना है कार्यकारणी उपाध्यक्ष का
निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रंजन प्रभाकर ने कहा बजट पास हो गया है। उन्होंने भाजपाइयों सदन की गरिमा खंड़ित करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सदन में हुए हंगामे से साफ हो गया है कि भाजपाइयों को आम आदमी की समस्या से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें विकास नहीं विनाश की राजनीति करनी है। ऐसा होने नहीं दिया जाएगा। शहर का विकास सर्वोपरी है।
ये कहना है भाजपा नेता पार्षद दल का
सदन में नेता भाजपा पार्षद दल विपिन जिंदल का कहना है कि बजट पास नहीं किया गया है क्योंकि इस पर चर्चा नहीं की गयी। बैठक को शून्य किए जाने की मांग मंडलायुक्त से की गयी है। मंडलायुक्त को यह अधिकार है। बगैर चर्चा के बजट को पास नहीं माना जा सकता। शासन को भी अवगत कराया है।
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक 18 को
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक 18 मार्च को बुलायी गयी है। बैठक को लेकर नगरायुक्त मनीष बंसल की ओर से सूचना जारी की गयी है। कार्यकारिणी की बैठक में मूल बजट पर चर्चा की जाएगी। इसके में केवल कार्यकारिणी के सदस्य पार्षदों को ही आमंत्रित किया गया है। हालांकि माना जा रहा है कि कार्यकारिणी की बैठक पर मंगलवार को हुई निगम बोर्ड की हंगामी बैठक का साइड इफेक्ट पड़ सकता है।
निगम बैठक हो शून्य, मंडलायुक्त से मिले भाजपा पार्षद
नगर निगम बैठक में दिन के हंगामे के बाद भाजपा के तमाम पार्षद मंगलवार शाम को मंडलायुक्त से मिले और बोर्ड बैठक को शून्य किए जाने की मांग की। इस संबंध में मंडलायुक्त को एक पत्र भी दिया गया। साथ ही पूरे मामले पर एक रिपोर्ट शासन को भी भेजी गयी है।
पार्षद दल के नेता विपिन जिंदल के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल की ओर से दिए गए पत्र में निगम में बैठक के दौरान दिए गए घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बैठक को शून्य किए जाने की मांग की गयी। आयुक्त से मिलकर बाहर निकले विपिन जिंदल, महेन्द्र भारती, वीर सिंह सैनी, राकेश शर्मा, अनुज वशिष्ठ, सुमन भारती आदि ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी शासन को भी भेज दी गयी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के लिए आयी धनराशि कुछ करीबी पार्षदों के वार्ड में खर्च किए जाने का प्रयास चल रहा है। यह उचित नहीं। नगर निगम बोर्ड में कुल 100 पार्षद हैं। सभी को अपने अपने क्षेत्र में समान रूप से विकास कराए जाने का मौका दिया जाना चाहिए।
यह तभी संभव है जब विकास की राशि को सभी पार्षदों के वार्ड में बराबर खर्च किया जाए। दलगत राजनीति से उठकर विकास की बात करनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो फिर आंदोलन किया जाएगा, लेकिन मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। महानगर को विकास की दरकार है।

