- सम्राट हेवेंस होटल पर एक सप्ताह पूर्व लगाया था पांच लाख का जुर्माना
- नगर निगम के नोटिस की समय अवधि बीतने पर भी जमा नहीं की जुर्माने की रकम
- नगर निगम ने 18 कंपनी/फर्मों पर विज्ञापन प्रचार पर 20 लाख से अधिक का लगाया जुर्माना
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम द्वारा नियम विरुद्ध कार्य करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। कुछ मामलों में तो नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जुर्माने की वसूली कर ली जाती है, लेकिन कई ऐसे बडेÞ मामले होते हैं। जिसमें जुर्माने का नोटिस तो जारी किया जाता है, लेकिन उसकी वसूली आखिर क्यों नहीं की जाती, यह गड़बड़झाला समझ से परे है। फिलहाल सम्राट हेवेंस पर वायु प्रदूषण फैलाने के मामले में पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। उसको जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन दो सप्ताह से अधिक का समय बीतने पर भी अभी तक जुर्माने की रकम की न तो वसूली की और न ही मामले में आगे कोई कार्रवाई बढ़ाई जा सकी।
नगर निगम क्षेत्र में अवैध रूप से यूनिपोल पर होर्डिंग-बैनर आदि प्रचार सामग्री लगाने वाले 18 लोगों पर 20 लाख रुपये से अधिक रुपये के जुर्माने का नोटिस जारी करने का मामला हो या फिर दो सप्ताह पूर्व सम्राट हेवेंस पर वायु प्रदूषण फैलाने के मामले में पांच लाख रुपये के जुर्माने का नोटिस जारी करने का मामला हो। इसी तरह न जाने कितने मामले ऐसे हैं, जिसमें नगर निगम के अधिकारियों द्वारा जुर्माना लगाते हुए नोटिस तो जारी किये, लेकिन जुर्माने की रकम को वसूल करना भूल गए या फिर किस गड़बड़Þझाले के चलते वह नोटिस की रकम जमा नहीं कराई जा सकी।
नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटवाने के दौरान कुछ छोटे दुकानदार आदि से जुर्माना वसूली जरूर कर ली जाती है। अधिकतर को बिना जुर्माना वसूली के ही मात्र चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है। शहर में नगर निगम अधिकारियों द्वारा निगम के नियम विरुद्ध कार्य करने के विभिन्न मामलों में नोटिस जारी कर चेतावनी मात्र दी जाती है। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यदि एक दो मामलों में कार्रवाई के लिए नोटिस जारी भी कर दिया जाये तो उसके बाद वसूली न करना समझ से परे है। फिलहाल नगर निगम जुर्माना लगाते हुए नोटिस जारी करने में हीरो व वसूली में जीरो दिखाई दे रही है।

