- मेयर के चुनाव को राजनीतिक दलों के नेता जुटे थे तैयारियों में
- सामान्य श्रेणी में आने वाले नेताओं को लगा जोरों का झटका धीरे से
- कई के सपने टूटकर बिखरे, पिछड़ी जाति पर लगेगा अब दांव
- अब भाजपा, सपा और बसपा किस चेहरे पर जताएगी विश्वास
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम मेयर पिछड़ा वर्ग में आरक्षित होने के बाद कई दिग्गजों के सपने टूट गए, तो कई नेताओं के चेहरे खिल गए। कुछ समय से मेयर के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के नेता तैयारी में जुटे हुए थे, लेकिन सामान्य श्रेणी में आने वाले नेताओं को आरक्षण ने बड़ा झटका दे दिया। इसी वजह से उनके सपने टूट कर बिखर गए। अब पिछड़ी जाति पर प्रत्येक दल दांव लगाएगा। अब देखना यह है कि किस चेहरे पर भाजपा, सपा और बसपा अपना विश्वास जताती है।
दरअसल, भाजपा से कई चेहरे प्रत्याशी की दावेदारी में सामने आ रहे हैं। इनमें टॉप पर कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन मनिंदर पाल, कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष रही बीना वाधवा और डा. मीनाक्षी भराला है। वैसे तो भाजपा के पास नेताओं की लंबी फौज है, लेकिन भाजपा इस बार मेयर की सीट को खोना नहीं चाहती, इसके संकेत हाल ही में मेरठ प्रबुद्ध सम्मेलन को संबोधित करने आये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दे चुके हैं, जिसके चलते भाजपा किसी सटीक चेहरे पर ही अपना दांव लगाएगी। भाजपा से टिकट मांगने वालों में और मेयर रह चुके हरिकांत अहलूवालिया भी शामिल है।
सपा से सरधना के विधायक अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान भी मेयर की दावेदारी कर रही है, जबकि बसपा से पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के भाई राशिद अखलाक पहले ही दावेदारी जता चुके हैं। यह भी कहा जा रहा है कि रालोद से अहलावत को भी चुनाव लड़ा जा सकता हैं। पिछड़ा वर्ग से जितने भी नेता दावेदारी कर रहे हैं, उनके चेहरे खिले हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन उन नेताओं के चेहरे लटक गए हैं, जो मेरठ मेयर की सीट को सामान्य में आने का आकलन करते हुए चुनाव की तैयारी में लगे हुए थे।
आरक्षण हुआ गलत, करेंगे आपत्ति: योगेश वर्मा
पूर्व विधायक एवं सपा नेता योगेश वर्मा ने कहा है कि मेयर का आरक्षण गलत किया गया है। उन्होंने कहा कि दो टर्न जनरल और दो टर्न ओबीसी के हो चुके हैं। एससी का एक टर्न महिला वर्ग का हुआ है, जबकि पुरुष वर्ग इस बार होना चाहिए था। क्योंकि दो-दो टर्न सभी के हो चुके हैं, फिर दलित का क्यों नहीं?
यह इस आरक्षण को लेकर पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहना है कि आरक्षण को लेकर कानूनी राय ली जा रही है। यह आरक्षण गलत किया। मंगलवार को आपत्ति दर्ज करेंगे। दलितों का हक इसमें मारा गया है। इसको लेकर पूर्व विधायक योगेश वर्मा आरक्षण पर आपत्ति करेंगे।
मेरठ का मेयर होगा पिछड़ी जाति का
प्रदेश सरकार ने सोमवार को नगर निगम के महापौर पद पर आरक्षण घोषित कर दिया। मेरठ नगर निगम की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित की गई है। नगर निगम की मेयर की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित करने से कई राजनीतिक दिग्गजों को बड़ा झटका लगा है।
क्योंकि कुछ नेता चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अब सिर्फ मेरठ में पिछड़ा वर्ग से ही चुनाव लड़ सकते हैं। आरक्षण घोषित होने के बाद दिग्गजों की रणनीति पर पानी फेर दिया हैं। मेयर सुनीता वर्मा भी अगले चुनाव की तैयारी कर रही थी, लेकिन इस आरक्षण से उन्हें भी बड़ा झटका लगा हैं। उधर, मवाना नगर पालिका परिषद को अनारक्षित तथा सरधना को महिला के लिए आरक्षित किया गया हैं।
नगर पंचायत बहसूमा अनुसूचित जाति, हस्तिनापुर अनुसूचित जाति महिला, खरखौदा पिछड़ा वर्ग, दौराला पिछड़ा वर्ग, करनावल महिला, परीक्षितगढ़ महिला, शाहजहांपुर अनारक्षित, फलावदा अनारक्षित, लावड़ अनारक्षित, सिवालखास अनारक्षित, किठौर अनारक्षित, खिवाई अनारक्षित और हर्रा को अनारक्षित रखा गया हैं।
ये लड़ सकते हैं चुनाव
मेरठ मेयर की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित घोषित होने के बाद कई नाम ऐसे है, जो चुनाव लड़ने की दौड़ में आ सकते हैं। कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन मनिंदर पाल सिंह पिछड़ा वर्ग से हैं। उनका नाम भी चुनाव लड़ाई में चर्चा में चल रहा हैं। पिछले विधानसभा चुनाव उन्होंने सिवालखास विधानसभा से लड़ा था। किसान आंदोलन से यह विधानसभा प्रभावित क्षेत्र रहा हैं, जिसके चलते यहां भाजपा की पराजय हुई।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. मीनाक्षी भराला भी टिकट मांग रही हैं। लंबे समय से भाजपा के साथ ही मीनाक्षी जुड़ी हुई हैं। कैंट बोर्ड की पूर्व उपाध्यक्ष बीना वाधवा भी मेयर के चुनाव की दावेदारी कर रही हैं। बताया गया कि वह भी पिछड़ा वर्ग से आती हैं। पूर्व मेयर हरिकांत अहलूवालिया भी फिर से टिकट की दौड़ में आ गए हैं। अब देखना यह है कि पिछड़े वर्ग वर्ग से भाजपा किसको चुनाव मैदान में उतारती है?
सपा के लिए भी कुछ लोग तैयारी में जुटे थे, लेकिन उन्हें भी झटका लगा है। सपा से खुद मेयर सुनीता वर्मा तैयारी कर रही थी और टिकट भी मांग रही थी। उन्हें भी बड़ा झटका लगा है। बसपा से पूर्व सांसद शाहिद अखलाक का परिवार टिकट मांग रहा हैं। शाहिद के भाई राशिद अखलाक खुद चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं। बसपा राशिद अखलाक को चुनाव मैदान में उतार सकती है। क्योंकि वह भी पिछड़ा वर्ग में आते हैं।
ये रहा मेरठ का निकाय चुनाव आरक्षण
- नगर निगम
मेरठ पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित
- नगर पालिका परिषद
सरधना महिला
मवाना अनारक्षित
- नगर पंचायत
बहसूमा अनुसूचित जाति
हस्तिनापुर अनुसूचित जाति महिला
खरखौदा पिछड़ा वर्ग
दौराला पिछड़ा वर्ग
करनावल महिला
परीक्षितगढ़ महिला
शाहजहांपुर अनारक्षित
फलावदा अनारक्षित
लावड़ अनारक्षित
सिवालखास अनारक्षित
किठौर अनारक्षित
खिवाई अनारक्षित
हर्रा अनारक्षित

