Saturday, March 14, 2026
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निकाय चुनाव: दिग्गज जुटे टिकट पाने को, लगी लंबी लाइन

  • नाम तो कई चल रहे हैं, लेकिन बाकी नामों की लंबी फेहरिस्त

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: क्रांतिधरा पर मेयर का चुनाव हैं, लेकिन कम महत्वपूर्ण नगर पालिका परिषद के चुनाव भी नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक दंगल के लिए नगर निगम मेयर का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। भाजपा में दिग्गज टिकट पाने की दौड़ लगा रहे हैं। किसे टिकट मिलेगा, अभी ये कहना मुश्किल हैं, लेकिन टॉप पर जिनका नाम चल रहा हैं, उसमें पूर्व मेयर हरिकांत अहलूवालिया और सुनील वाधवा की पत्नी बीना वाधवा का हैं। वैसे नाम तो कई चल रहे हैं, लेकिन बाकी लंबी फेहरिस्त हैं, जिसमें दो दर्जन उम्मीदवार दावेदारी कर चुके हैं।

पार्टी जिलाध्यक्ष व क्षेत्रीय कार्यालय पर अपने-अपने आवेदन जमा करा दिए हैं। हालांकि भाजपा के बाद सर्वाधिक उम्मीदवार सपा के पास हैं। सपा जिलाध्यक्ष के पास भी उम्मीदवारों की लंबी लिस्ट पहुंच गई हैं। हालांकि कांग्रेस, बसपा, रालोद और आम आदमी पार्टी भी अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, लेकिन अभी तक चर्चाओं में मुख्य रूप से भाजपा व सपा की टक्कर को लेकर जीत-हार के गणित लगाए जाए रहे हैं।

नगर निगम के मेयर का पद भावी लोकसभा सीट की जीत-हार में भी योगदान करने वाला है। क्योंकि लोकसभा चुनाव का निकाय चुनाव ट्रायल माना जा रहा हैं। हालांकि नगर निकाय के चुनावों में मतदाताआें का रुझान काफी अलग-अलग रहता है। मतदान का प्रतिशत भी ज्यादा निकाय चुनाव में रहता हैं। नगर पालिका के चुनाव में कुछ स्थानीय मुद्दे भी हावी रहते हैं। आपसी संबंध भी काम आते हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की विचारधारा का भी काफी योगदान रहता है।

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इन्हीं सब को देखते हुए मेयर पद के लिए भाजपा और सपा संभावित उम्मीदवारों के चयन पर भी बहुत कुछ निर्भर करने वाला हैं। भाजपा और सपा के नेता राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा करने में भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सभी के आका सभी को आश्वासन भी दे रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में शहर विधानसभा की सीट भाजपा हार गई थी। शहर सीट सपा के खाते में चली गई थी।

जीत में अंतर भी बड़ा रहा था, ऐसे में मेयर के चुनाव में भी वैसा ही आंकड़ा रहने वाला हैं। अब देखना यह है कि निकाय चुनाव में वोटों का धु्रवीकरण होता या फिर नहीं। इसलिए सपा से टिकट मांगने वाले नेताओं ने जोर लगा रखे हैं। वहीं भाजपा से टिकट पाने वालों की लंबी लाइन लगी हुई हैं।

रालोद-सपा के बीच निकाय चुनाव में गठबंधन रहेगा या टूटेगा?

विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद का गठबंधन रहा। अब वर्तमान में नगर निकाय की अधिसूचना जारी हो गई है। सपा और रालोद, दोनों के नेता अलग-अलग टिकट भी मांग रहे हैं। हर रोज रालोद और सपा नेताओं की कार्यालय पर अलग-अलग बैठक भी चल रही है। निकाय चुनाव की तैयारी को लेकर मंथन हो रहे हैं,

लेकिन ऐसे में लग रहा है कि यदि सपा और रालोद अलग-अलग चुनाव मैदान में आते हैं तो एक तरह से गठबंधन टूट जाएगा। क्योंकि रालोद ने भी मेयर के लिए संभावित उम्मीदवारों से बायोडाटा मांगा हैं। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि रालोद भी अलग चुनाव लड़ेगा, जिसके चलते सपा और रालोद के गठबंधन के बीच दीवार खड़ी हो सकती है। हालांकि अभी पार्टी हाईकमान स्तर से कोई गठबंधन की बात सामने नहीं आयी हैं।

रालोद गठबंधन प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताने का संकल्प

मंगलवार को राष्ट्रीय लोकदल कीबैठक एक होटल हापुड़ बाइपास पर आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर हुई। जिसमें मौजूद कई विधायक-पूर्व विधायकों ने निकाय चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल बताते हुए इसे हर हालत में फतेह करने का संकल्प लिया। पूर्व सांसद राजपाल सैनी की अध्यक्षता तथा जिला अध्यक्ष मतलूब गौड़ के संचालन में चली बैठक में के मुख्य अतिथि प्रदेश संयोजक स्थानीय निकाय राव वारिस अली (पूर्व विधायक) रहे।

बैठक में विधायक अजय कुमार, विधायक मनोज चौधरी, क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेंद्र चेयरमैन, दिलनवाज खान पूर्व विधायक, इंदरवीर भाटी, पूर्व मंत्री डॉ. मेराजुद्दीन अहमद , डॉ. राजकुमार सांगवान, गजेंद्र मुन्ना पूर्व विधायक, पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, अजय तोमर पूर्व विधायक, ओडी त्यागी, मुकेश जैन, कुलदीप उज्जवल, राजीव बलियान, नरेंद्र खजूरी, राममेहर सिंह रिठानी, अशोक चौधरी, उज्जवल अरोरा, अन्नू चौधरी, सरदार इंद्रजीत सिंह टीटू, अमित त्यागी जिला अध्यक्ष गजियाबाद, सुखबीर गठीना, जनार्दन भाटी आदि उपस्थित रहे।

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