Saturday, March 21, 2026
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कत्ल-दर-कत्ल, फीके पड़े खून के रिश्ते

  • पैसा, प्रॉपर्टी और मान सम्मान की भूख के लिए किए जा रहे मर्डर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हाल ही में शहर हो या देहात हर तरफ खून के रिश्तों में इतनी क ड़वाहट पैदा हुई कि उन्हें अपने सगे संबंधियों और खून के रिश्तों का ही कत्ल में करने में कतई गुरेज नहीं हुई। बल्कि निर्दयी पिता हो या दामाद हो या भाई और मां जैसे सगे रिश्ते हों। सभी कहीं न कहीं अपने पारिवारिक रिश्तों, मूल्यों को दरकिनार कर अपनों के खून के ही प्यासे हो चले हैं।

इसके जीते जागते उदाहरण मेरठ शहर के शास्त्रीनगर जी ब्लॉक में दामाद ईशू ने अपने साथियों संग अपनी सास और मासूम बेटी का कत्ल सिर्फ इसलिए कर दिया कि उसकी निगाह करोड़ों रुपये पर थी। वहीं लिसाड़ी गेट क्षेत्र में एक पिता ने अपनी बेटी की गर्दन इसलिए काट दी कि वो अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद करने लगी थी। हस्तिनापुर में बैंक मैनेजर संदीप की पत्नी शिखा व पुत्र रुशांक की हत्या उसके बहनोई हरीश कुमार ने अपने साथी रवि के साथ इसलिए की कि वो मन ही मन उससे ईर्ष्या करने लग गया था।

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उससे अपना बदला लेना चाहता था। ऐसे ही गंगानगर में बबलू और उसकी पत्नी रुबी ने अपनी 11 साल की बेटी चंचल की हत्या कर नहर में फेंक दिया। क्योंकि वह एक लड़के से बात करती थी। यही वजह है कि वर्तमान समय में हम अपनी परम्पराएं, धर्म अपने भारतीय मूल्य एवं सस्कारों से विमुख होते जा रहे हैं। क्योंकि सामाजिकरण, भारतीय संस्कृति पर आधारित न होकर पश्चिमीकरण, वैश्वीकरण व आधुनिकरण पर आधारित है।

यही वजह है कि सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया अपनी मुख्य भूमिका निभा रहा है। हमारा सामाजिकरण आईक्यू एवं ईक्यू पर आधारित न होकर केवल आईक्यू आधारित हो गया है तथा भौतिक सांस्कृ ति, अभौतिक संस्कृ ति आध्यात्मिक संस्क ृति पर प्रभावी स्थिति में है। यही वजह है कि जिनका लोगों के जीवन और जीवन स्तर पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है परन्तु कहीं न कहीं मानवता का भाव, एक-दूसरे से जुड़े रहने की भावनाएं, हमदर्दी, सहानुभूति और संवेदनाएं जैसी मानव सोच में गुणात्मक रू प से कमी आई है।

यही वजह है कि आजकल लोग मोबाइल से प्राप्त आभासी संबंधो को जितना महत्व देते हैं उतना पारिवारिक संबंधों को महत्व नहीं देते और इसी वजह से कहीं न कहीं ज्यादातर परिवारों के लोगों में उनके अपने ही संबंधों के प्रति कुंठा, अविश्वास, दर्द के प्रति असंवेदनशीलता, गुस्सा और हिंसा देखने को मिलती है। यही वजह है कि खून के रिश्तों में कड़वाहट पैदा होने लगी है।

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लोग छोटी-छोटी बातों पर अपनों को ही सिर्फ मानसिक हानि ही नहीं पहुुंचाते बल्कि उनके खून के प्यासे हो जाते हैं। वे अपनों के साथ आघात या हिंसा करने से नहीं चूकते। समाज में पिता के द्वारा पुत्र की हत्या, पति द्वारा पत्नी की हत्या, मां और पिता द्वारा बेटी की हत्या करना आम बात हो गई है।

ऐसे लोग रक्त संबंध की परवाह न करके सिर्फ अपना बदला लेने का जो जुनून है उसका कारण यही है कि इसमें कहीं न कहीं बहुत ज्यादा प्रभाव मीडिया और मल्टीमीडिया से परोसे जाने वाली जानकारियों का भी है। जिनका लोग उपयोग करने की बजाय गलत रु प में करते हैं। ऐसे ही लोग बड़ी से बड़ी अपराधिक वारदातों को अंजाम देने से नहीं चूकते। समाज में बढ़ते अपराध जैसा कि पारिवारिक रिश्तों मे अपनों की हत्या हो या दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध। इन सबके लिए हमारे देश में सरकार के द्वारा इंंटरनेट पर परोसी जाने वाली जानकारियोंं के संबंध में उचित नीति बनाई जानी चाहिये।

आजकल की बदलती परिस्थितियों मे माता-पिता के द्वारा जो चुनौतियां बच्चों की परवरिश से संबंधित महसूस की जाती हैं। उनके प्रशिक्षण के लिए प्रयास किये जाने चाहिये। लोगों, माता-पिता और शिक्षकों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के प्रति भी शिक्षित किया जाना आवश्यक है। ताकि समय रहते बच्चों और युवाओं में सामान्य अथवा असामान्य व्यवहारों की पहचान कर उनका निवारण किया जा सके।

Dr sunjay

इन प्रयासों के द्वारा यदि बदलती परिस्थितियों में हम आने वाली जनरेशन को यदि सहनशीलता मानवता और उद्देश्य पूर्ण व्यवहारों का प्रशिक्षण दे पाने में सक्षम हुए तो बहुत सारे परिवारों के टूटते संबंधों को भी बचा पाएंगे। और देश में बढ़ते सामाजिक अलगाव जैसी परिस्थितियों को भी नियंत्रित कर सकेंगे। -प्रो. संजय कुमार, अध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ एवं आनरेरी प्रेसीडेंट, मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया

समाज में इस तरह की घटना के लिए सीधे तौर पर हमारा सामाजिकरण भारतीय संस्कृति पर आधारित न होकर पश्चिमीकरण, वैश्वीकरण व आधुनिकीकरण पर है।

Dr Alok

इसके अलावा प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर परोसी जाने वाली ऐसी सामग्रियां जो उन्हें गलत की ओर अग्रसर करती हैं। -डा. आलोक कुमार, प्रोफेसर समाज शास्त्र, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ

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