- 22 से किसानों की संसद घेरने की तैयारी
जनवाणी संवाददाता |
सरूरपुर: किसान नेता व भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में सरकार किसानों की बात नहीं मान रही है। आठ माह से किसान आंदोलित हैं। दिल्ली के बॉर्डर पर धरनारत है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार मांगे पूरी नहीं करेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
साथ ही उन्होंने आगामी पांच सितंबर की मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत में बड़ा फैसला लेने का भी ऐलान किया। इसके अलावा 22 जुलाई से संसद कूच को लेकर भी रणनीति बनाकर संसद घेरने का ऐलान किया।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता बुधवार को करनावल कस्बे में भाकियू नेता राजकुमार के यहां विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आये थे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पिछले आठ माह से काले कृषि कानूनों को लेकर देश का अन्नदाता बॉर्डर पर डटा हुआ है, लेकिन सरकार बात मानना तो दूर बातचीत करने को भी तैयार नहीं है।
उन्होंने साफ कहा कि लोकतांत्रिक देश में इस तरह की व्यवस्था कतई नहीं चलती, लेकिन तानाशाह सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। चौधरी राकेश टिकैत ने दो टूक कहा कि हमने सरकार को दो माह का समय देते हुए कह दिया है कि जब तक मांगे पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि आगामी पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में एक निर्णायक महापंचायत होने जा रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व राजस्थान समेत पूरे देश का किसान पहुंचेगा। संयुक्त मोर्चे की इस निर्णायक महापंचायतों में इस बेजुबान सरकार के खिलाफ बड़ा ऐलान किया जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार से मांगे मनवाने के लिए उन्होंने आगामी 22 जुलाई से संसद के बाहर भी घेरा डालो डेरा डालो शुरू करने का ऐलान किया है। जहां प्रति दिन 200 किसान बसों द्वारा संसद के बाहर धरने पर जाएंगे और अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर किए गए सवाल में राकेश टिकैत ने साफ कहा कि सरकार के पास अब भी वक्त है सरकार किसानों की बातें मान ले। इसके बाद रणनीति आगामी पांच सितंबर को होने वाली संयुक्त मोर्चा की बैठक निर्णायक महापंचायत के बाद तय की जाएगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने साफ किया कि किसान राजधानी के चारों तरफ डेरा डाले हुए हैं, वहां है और आगे भी रहेंगे। सरकार तो आती जाती रहती हैं। पहले किसी ओर की सरकार थी, आगे किसकी होगी, कुछ पता नहीं। जब किसान कृषि कानून नहीं चाहता तो फिर जबरिया कानून क्या बना दिया गया हैं?
किसानों के लिए कानून नहीं बना, बल्कि बड़े व्यापारियों के लिए कानून बना हैं, इसी वजह से सरकार अडिग हैं। यूपी में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाकियू क्या अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारेगी? इस सवाल के जवाब पर चौधरी राकेश टिकैत ने मुस्कुराते हुए कहा कि भाकियू चुनाव नहीं लड़ेगी, अराजनीतिक है और अराजनीतिक ही भविष्य में रहेगी।
हां, किसान विरोधी दलों का विरोध करने के लिए देशभर के किसानों को एकजुट किया जाएगा। बातचीत के दौरान उनके साथ भाकियू जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी, तहसील अध्यक्ष अशफाक चौधरी व राजकुमार आदि मौजूद रहे।

