- सिटी मजिस्टेÑट ने पूछा कोतवाल से, क्यों लगने दिये झूले?
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऐतिहासिक नौचंदी मेले का औपचारिक उद्घाटन तो कमिश्नर ने कर दिया, लेकिन मेले में झूले बिना टेंडर के ही लगा दिये गए। आखिर किसकी अनुमति से बिना टेंडर किए झूले नौचंदी ग्राउंड में लगा दिए गए? यह बड़ा सवाल है। क्योंकि कमिश्नर सुरेंद्र सिंह खुद मेले के आयोजन को लेकर गंभीर है और वही व्यवस्थित तरीके से मेला प्रारंभ हो, इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की मीटिंग भी ले रहे हैं।
दरअसल, नौचंदी ग्राउंड में झूले लगाने को लेकर भ्रष्टाचार होता रहा है। इस बार मेला नगर निगम और जिला पंचायत नहीं लगा रहा है। सिर्फ जिला पंचायत व्यवस्था देखने में कमिश्नर और प्रशासन का सहयोग कर रहा है। मेले में झूलों को लेकर कोई भ्रष्टाचार हो, इसको देखते हुए कमिश्नर सुरेंद्र कुमार ने सिटी मजिस्ट्रेट को दो टूक कह दिया है कि झूलों की टेंडर प्रक्रिया सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हो होगी।

बॉक्स भी, जिसमें टेंडर डालते हैं वह सिटी मजिस्ट्रेट के आॅफिस में रखा जाएगा। इसमें किसी तरह का जिला पंचायत का हस्तक्षेप नहीं होगा। आमतौर पर झूलों को लेकर भ्रष्टाचार होता था, लेकिन कमिश्नर की सख्ती के चलते शायद ही भ्रष्टाचार हो पाये, हालांकि नौचंदी ग्राउंड में वर्तमान में भी एक मंदिर के पास झूले लगा लिए हैं। ये झूले लगाने की अनुमति आखिर किसने दी? जब अभी टेंडर प्रक्रिया हुई नहीं तो फिर झूले कैसे लगने दिए? यह बड़ा सवाल है।
हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट ने इंस्पेक्टर नौचंदी को फोन करके ग्राउंड में लगे झूलों को हटाने की हिदायत दी है। कहा है कि झूलों की टेंडर प्रक्रिया होगी, जिसका टेंडर निकलेगा उसको ग्राउंड में झूले लगाने की अनुमति दी जाएगी। बाकी कोई भी अपना झूला नहीं लगा पाएगा।
सिटी मजिस्ट्रेट के हड़काने के बाद नौचंदी ग्राउंड में लगे झूलों को हटाने के लिए इंस्पेक्टर नौचंदी मौके पर पहुंचे। दरअसल, चर्चा यह है कि जिला पंचायत की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद ही यह झूले लगाए गए हैं। आखिर कौन है, जो इस तरह से भ्रष्टाचार कर रहा हैं। जिला पंचायत के अधिकारियों पर आखिर कमिश्नर को कार्रवाई करनी होगी, तभी इसमें भ्रष्टाचार को रोका जा सकता हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही झूले कौन लगायेगा? यह निर्णय होगा, लेकिन अभी से झूले लगा दिये गए, इसको लेकर सवाल उठना लाजिमी हैं।
क्या दुकानों के आवंटन में बिचौलिया से मिलेगी मुक्ति?
नौचंदी ग्राउंड में जो भी दुकानें लगती हैं, उन्हें आवंटन किया जाता है। इसमें भी बिचौलियों की पो-बारह हो जाती हैं। इसमें भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी कमिश्नर को कदम उठाने होंगे, जिसके बाद नौचंदी मेला भ्रष्टाचार मुक्त होगा, ऐसा पहली बार संभव हो सकता हैं। यह तभी संभव है, जब कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह पूरी व्यवस्था को खुद ही हैंडल कर रहे हैं। कमिश्नर के रुचि लेने के बाद कई विभागों के अफसरों की लाटरी नहीं लग पाएगी। क्योंकि कमिश्नर ने पूरी सख्ती कर दी हैं। झूले को लेकर टेंडर प्रक्रिय भी सिटी मजिस्ट्रेट की देखरेख में होगी। अब कहीं कोई भ्रष्टाचार की गुजाइश नहीं रहने वाली हैं।
नौचंदी मेले की तैयारियों में लगा जिला प्रशासन
नौचंदी मेले को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गर्इं हैं। बीते रविवार को मेले का उद्घाटन हो चुका है। अब मेला स्थल पर साफ सफाई व अन्य तैयारियों को कराया जा रहा है। इसे लेकर जिला पंचायत की ओर से टेंडर भी निकाल दिये गये हैं। बुधवार को मैदान की साफ सफाई व यहां फैले अतिक्रमण को भी हटाया गया।
नौचंदी मैदान में इस समय ऐतिहासिक नौचंदी मेला लगाए जाने की तैयारी चल रही है। मैदान में कुछ लोगों ने अवैध तरीके से झुग्गी बनाकर रहना शुरू कर दिया है। पुलिस और नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर झुग्गियों को हटाकर मैदान को खाली कराया। नौचंदी मैदान में लगने वाले इस मेले के लिए जो मैदान है उस पर हर साल अतिक्रमण हो जाता है।
शहर की सामाजिक संस्थाएं कई बार जिला प्रशासन से इस स्थल पर स्थायी हाट या शिल्प बाजार बनाने की मांग कर चुकी हैं, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन ने इस पर कोई काम नहीं किया। यहां कोई देखरेख नहीं होती, इसके चलते कभी डेयरी संचालक मेले में भैंसे बांधकर इसे तबेला बना देते हैं।
कभी अंजान लोग मैदान में झुग्गी बनाकर रहने लगते हैं। बुधवार को प्रशासन की ओर से यहां टीम भेजकर यहां फैले अतिक्रमण को हटाया गया। यहां से अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाया गया और मैदान की साफ-सफाई व अन्य कार्य भी कराये गये। अब यहां मैदान के चारों ओर लोहे की रैलिंग लगाने का भी कार्य शुरू होगा।

