Thursday, March 26, 2026
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एनसीआरटीसी: तकनीक के बल पर किला फतह

  • पुराने शहर का स्ट्रक्चर था कम्पनी के लिए बड़ा चैलेंज
  • कई बार आर्इं दरारें, सड़कें भी धंसी, लेकिन काम नहीं रोका गया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जिस दिन शहर में रैपिड व मेट्रो ट्रेन के लिए सुरंगों की खुदाई शुरू हुई थी उस दिन न सिर्फ रैपिड के इंजीनियर्स के लिए बल्कि खुद एनसीआरटीसी अधिकारियों के लिए यह किसी चेलेंज से कम न था। मेरठ जैसे पुराने शहर में ट्रेन संचालन के लिए भूमिगत सुरंगे बनाना एक टेढ़ी खीर था।

सुरंगों का काम शुरू तो हो गया, लेकिन इस दौरान शहर में कई इमारतों में जिस प्रकार क्रैक आया और जमीन धंसने जैसी घटनाएं हुर्इं उससे शहर के लोगों में एक अजीब किस्म की दहशत फैली। हालांकि एनसीआरटीसी ने हर चैलेंज को स्वीकार किया। दहशत में आए लोगों को हर संभव समझाने का प्रयास किया। जिन बिल्डिंग्स में क्रैक आया वहां के लोगों को होटल में शिफ्ट किया।

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मतलब कि सभी चैलेंज को स्वीकार करते हुए अपने काम को एक मिनट के लिए भी नहीं रोका। सबसे बड़ी बात यह कि आज शहर में सभी छह सुरंगे बनकर पूरी तरह तैयार हैं। इस दौरान कहीं कोई घटना नहीं हुई। शहर का पुराना स्ट्रक्चर कहीं भी एनसीआरटीसी के आड़े नहीं आया। कम्पनी ने अ पनी हाईटेक तकनीक के सहारे एक प्रकार से इस किले को फतह कर लिया। रैपिड के लिए जो सुरंगे बनाई गई हैं।

उनमें खास बात यह है कि इनका व्यास 6.5 मीटर है जो दुनिया भर में निर्मित दूसरी सुरंगों के वैश्विक बेंचमार्क की तुलना में काफी अनुकूलित हैं। इसके अलावा रेल आधारित परिवहन के लिए देश में कहीं भी इतने बड़े व्यास की सुरंगे नहीं हैं। इस सेक्शन में निर्मित सुरंगें शहर के बहुत घनी आबादी वाले इलाकों को पार करते हुए तथा बेगमपुल नाले के नीचे से गुजरते हुए बेगमपुल स्टेशन तक पहंची है। सुरंगों की इस जंग को जीतने के लिए एनसीआरटीसी के इंजीनियर्स की इंजीनियरिंग के साथ साथ टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) सुदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है।

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बेहद नवीन तकनीकों पर आधारित सुदर्शन मशीनों ने मेरठ जैसे पुराने शहर के नीचे सुरंगे बनाकर साबित कर दिया है कि आज बेहतर तकनीक और इंजीनियर्स के दम पर कोई भी जंग जीती जा सकती है। बेगमपुल स्टेशन तक जिस प्रकार सुरंग बनाने में इंजीनियर्स को दिक्कतें आई और फिर उनका जिस प्रकार सॉल्यूशन किया गया।

वो अपने आपमें काबिल ए तारीफ है। इस सेक्शन में 600 मीटर रेडियस का एक बेहद पेचीदा मोड़ था, जहां टीबीएम द्वारा टनलिंग करना एक बहुत बड़ा चैलेंज था। इसके बावजूद इंजीनियर्स ने हिम्मत नहीं हारी और वो कर दिखाया जो अपने आपमें एक बहुत बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। कुल मिलाकर मेरठ में साढ़े पांच किमी के दायरे में जिस प्रकार छह सुरंगे बनाई गई हैं, वो अपने आपमें किसी किले को फतेह करने से कम नहीं है।

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