- नगर निगम के अधिकारियों ने लूट का नया तरीका निकाला
- एक ही साल में साबुत सड़क पर दोबारा से हो रहा निर्माण
- तीन-तीन पार्षदों की शिकायतों को किया अनसुना, जनता बेहाल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बात जब मोटे कमीशन की आ जाती है तो फिर नये निर्माण के लिए धड़ल्ले से न सिर्फ प्रस्ताव बनेंगे। बल्कि सेटिंग के चलते उन प्रस्तावों का क्रियान्वयन भी शुरू कर दिया जाये। लूट का यह कारनामा अपने नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से फिर से शुरू हो गया है। इस बार एक-दो नहीं, बल्कि चार-चार सड़कों और गलियों को छह माह में ही दोबारा बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि वर्तमान बोर्ड के तीन-तीन पार्षद और एक पूर्व पार्षद इस अंधेरगर्दी के खिलाफ सुर बुलंद कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती के समान है। जाहिर है कि लूट के इस कारनामे में नीचे से लेकर ऊपर तक सभी का हिस्सा न सिर्फ बंधा हुआ है, बल्कि ईमानदारी से बंट भी रहा है।
हमारे नगर निगम के ऊपर शहर के रखरखाव और नागरिकों को बाकायदा मूलभूत सुविधाएं देने की जिम्मेदारी है। शहरी सीमा में रहने वाले लोग इसके लिए नगर निगम को टैक्स के रूप में हर महीने और वर्ष भर में मोटी धनराशि भी चुकाते हैं। होना तो यह चाहिए कि शहर में जिस जगह जो जरूरत है। उसके मुताबिक बजट पास हो, और फिर वहां निर्माण कार्य कराये जायें, लेकिन जब इसमें अपने निर्जी स्वार्थों को महत्व दिया जायेगा तो फिर खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या काम होगा।
पार्षद देते हैं नये निर्माण के प्रस्ताव
देश में निधि की सुविधा सांसदों और विधायकों को ही है। सांसद निधि से लेकर विधायक निधि से जन प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए काम करवाने की घोषणा करते हैं। इसमें लाखों रुपये तक के काम हो जाते हैं, लेकिन नगर निगम के पार्षदों के पास यह सुविधा नहीं थी, लेकिन बाद में प्रावधान करके शहर के विकास के लिए पार्षदों को अपने स्तर पर पार्षद नीधि से पैसा देने की घोषणाएं कर सकने की सुविधा दी गई।
पार्षद भी विधायक और सांसदों की तरह अपने वार्ड में क्षेत्र विकास के लिए स्पेशल निधि का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए निगम प्रशासन द्वारा गाइडलाइन तैयार की जाती है। इन गाइडलाइन के तहत पार्षदों को 25 लाख रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक की राशि पार्षद क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत स्वीकृत किए जाने का प्रावधान होता है।
अफसरों-ठेकेदारों ने बनाया मोहरा
नगर निगम में अधिकारियों और ठेकेदारों को सीधे कुछ करने की अनुमति नहीं होती है। लिहाजा वह ऐसे सीधे साधे या अपने मतलब के पार्षदों को अपने झांसे में लेते हैं। जो इस लूट के खेल को चलाने के लिए उनके लिए मुफीद हों। इसके बाद इन पार्षदों से ऐसे निर्माण कार्यों के लिए मोटी धनराशि के प्रस्ताव बनवाये जाते हैं। जहां बहुत अधिक धन खर्च करने या नये निर्माण की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन इन अफसरों और ठेकेदारों की जुगलबंदी को अपने स्वार्थ की पूर्ति करनी होती है। लिहाजा वह इन पार्षदों की ढाल बनाकर प्रस्ताव पास करा लेते हैं।
पार्षद को फाइल पास करने पर मिलता है कमीशन
वैसे हर पार्षद को अपने-अपने वार्ड में हो रहे नये निर्माण कार्य में फाइल को पास कराने पर ठेकेदारों की ओर से अलग से 2 प्रतिशत से लेकर अधिक कमीशन भी मिलता है। इसके लिए पार्षद के सिर्फ हस्ताक्षर और मोहर लगती है। और उसको कमीशन के तौर पर मोटा धन मिल जाता है। जबकि पार्षदों को फाइल पर साइन करने से पहले यह देखना होता है कि निर्माण मानक के अनुसार हुआ है। अथवा जितना प्रस्ताव है। उसके अनुसार काम हुआ है, अथवा नहीं, लेकिन यहां पार्षद को सिर्फ अपने कमीशन से ही सरोकार होता है।
कमेले के पास बनाया जा रहा नया मार्ग
हापुड़ रोड पर पुराने कमेला स्थल पर वार्ड-82 के अन्तर्गत सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। रातों रात यहां की बनी बनाई सही सलामत सड़क के साथ खेल कर दिया गया। यहां के पार्षद ताहिर अली अंसारी ने जब देखा कि उनके पार्षद क्षेत्र में बनी बनाई सड़क को फिर से उधेड़ दिया गया है और वहां पत्थर की रोडी व मिट्टी डाली जा रही है तो उन्होंने ठेकेदार से पूछा कि यह क्या हो रहा है,
लेकिन मजदूरों ने कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया। पार्षद ताहिर का कहना है कि पुराने कमेले स्थल पर यहां सड़क की जरूरत इसलिए नहीं थी। क्योंकि यह सही सलामत थी। बल्कि इसके स्थान पर उनके वार्ड अहमद नगर की दूसरी सड़कों व गलियों का निर्माण होना था, लेकिन सही सलामत और बनी बनाई सड़क को उधेड़कर फिर से सड़क बनाने का ढोंग चल रहा है।
बाले मियां मजार पर उखाड़ दी सड़क
नगर निगम की ओर से वार्ड-67 के अन्तर्गत बाले मियां मजार के अंदरूनी हिस्से में नगर निगम की ओर से पक्की सड़कों का निर्माण कराया गया था। इसके लिए खुद बाले मियां मजार के मुतवल्ली एम. अशरफ मुफ्ती के अनुरोध पर नगर निगम के बोर्ड फंड से पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार द्वारा प्रस्ताव बनवाकर उसको पास कराया गया था।
कब्रिस्तान के अंदर सड़क इसलिए बनाई गई थीं कि यहां अपने मुर्दों को दफनाने आने वालों को संबंधित स्थान तक पहुंचने में दिक्कत न हो। अब महज छह महीने में ही इस सड़क को उखाड़कर यहां पर मिट्टी का भराव कर दिया गया। साथ ही नगर निगम के निर्माण कार्य के शिलापट्ट को भी उखाड़कर फेंक दिया गया।
रातों रात उखाड़ दी इंटरलॉकिंग टाइल्स
तीसरा मामला गोला कुंआ क्षेत्र के पार्षद व कार्यकारिणी सदस्य फजल करीम के वार्ड में पेश आया है। इस वार्ड के अन्तर्गत गोला कुंआ चौराहा पर नेशनल स्वीट्स से रॉयल क्लॉथ सेंटर तक इंटर लॉकिंग की सही सलामत टाइल्स थीं। यहां मैसर्स एसएस इंटरप्राइजेज नामक ठेकेदार फर्म को नया निर्माण कराने का ठेका दिया गया था,
लेकिन ठेकेदार काम शुरू करता, इससे पहले ही यहां की टाइल्स को किसी दूसरे विभाग के ठेकेदार ने रातों रात उखाड़ लिया। सुबह जब यहां लोग उठे तो वह यह देखकर दंग रह गये कि सही सलामत इंटरलॉकिंग टाइल्स को उखाड़कर कहां ले जाया गया है। अब क्षेत्रीय पार्षद को भी नहीं पता चल पा रहा है कि यह कारनामा किसका है। और उनके प्रस्ताव के इतर यहां कौन सा विभाग कार्य करा रहा है।
नगरायुक्त व महापौर से की लिखित में शिकायत
नगर निगम सीमा में हो रहे इस लूटपाट के खेल के खिलाफ एआईएमआईएम पार्षद फजल करीम, पार्षद ताहिर अली अंसारी तथा पार्षद रिजवान अंसारी ने महापौर हरिकांत अहलूवालिया व नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा से लिखित में शिकायत की है। इन पार्षदों ने लिखित शिकायत में यह भी कहा है कि उनके वार्डों में जो कार्य हो रहे हैं,
उसके लिए न तो उनकी सहमति ली गई है और न ही इसके लिए उन्होंने कोई प्रस्ताव ही दिया था। बल्कि वह तो अपने-अपने वार्डों में अन्य स्थानों पर निर्माण कार्य कराना चाहते थे। इन तीनों पार्षदों ने इन कार्यों को बंद कराकर पहले इनकी जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।