- सरकारी स्कूलों में शिक्षण सुविधाएं नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कागजों पर सर्व शिक्षा अभियान बहुत ही प्रभावशाली और सकारात्मक कदम के रूप में दिखता है, लेकिन जमीनी हकीकत पर इसकी धज्जियां उड़ती नजर आती हैं। सर्व शिक्षा अभियान समयबद्ध तरीके से प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण (यूईई) की उपलब्धि के लिए भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम हैं, जिसके तहत उन बस्तियों में नए स्कूल खोले जाते हैं।
जहां स्कूली शिक्षण सुविधाएं नहीं हैं और इसके अतिरिक्त कक्षा कक्ष, शौचालय, पेयजल, रखरखाव अनुदान और स्कूल सुधार अनुदान के प्रावधान के माध्यम से मौजूदा स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, परन्तु वास्तविकता में यह सभी दावे सिर्फ योजनाओं के मेनिफेस्टो तक ही सीमित है।
दो कमरों का स्कूल
‘जनवाणी’ की टीम मंगलवार को जिले के प्राथमिक विद्यालय चाणक्यपुरी पहुंची, जहां पांचवीं तक के बच्चों के लिये सिर्फ दो ही क्लासरूम मिले और तीसरी, चौथी व पांचवीं कक्षा के बच्चे एक ही कक्ष में पढ़ाई करते नजर आये। शिक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती दिखाई दी।
जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
सरकारी स्कूलों में संसाधन बढ़ाए जाने पर भी जिले के तमाम सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे बेंच की कमी की मार झेल रहे हैं। कहीं स्कूलों में बच्चे बोरा-चट्टी पर बैठ कर पढ़ते हैं तो कहीं कमरे में ही जमीन पर इन्हें पढ़ाया जा रहा है।
प्रधानाध्यापक के कक्ष पर लटका मिला ताला
कक्षा पांचवीं तक के प्राथमिक विद्यालय चाणक्यपुरी में प्रिंसिपल के आॅफिस पर ताला लटका मिला। वहीं, पांचों कक्षाओं के बच्चों के लिये सिर्फ एक ही अध्यापिका नियुक्त मिली।
लिस्ट में नाम फिर भी पानी कि सुविधा बदहाल
भले ही सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत बच्चों को सुविधाएं मुहैया कराने कि बात की जाती हो पर जमीन पर हकीकत बिल्कुल अलग है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे पेयजल तक के लिये तरसते हैं। हालांकि यहां पानी के कनेक्शन लगाने को लेकर लिस्ट में स्कूल का नाम है पर बावजूद इसके कोई इन स्कूलों की सुध लेने वाला नहीं हैं।
ब्लैकलिस्टेड पड़ा ब्लैकबोर्ड
प्राथमिक विद्यालय चाणक्यपुरी में न केवल पानी की व्यवस्था चरमराई हुई है, बल्कि कक्षा मे लगा ब्लैकबोर्ड भी नीचे रखा नजर आया।