- शराब से मरने वालों के परिवारों को 20-20 लाख का मुआवजा दिया जाए
जनवाणी संवाददाता |
बागपत: रालोद जिलाध्यक्ष सुखवीर सिंह गठीना ने कहा है कि कृषि अध्यादेशों का रालोद विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग सहकारिता का ही दूसरा रूप है और यह किसान के हित में नहीं है। चौ. चारण सिंह ने सहकारी खेती का हमेशा विरोध किया था और इसे लागू नहीं होने दिया था। रालोद नेता ने चमरावल व नौरोजपुर में शराब से मरने वालों के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग की। उनका आरोप था कि प्रशासन की लापरवाही के चलते ही उन लोगों की मौत हुई है।
रालोद जिलाध्यक्ष शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने मंडी को खत्म करने के निर्णय की सरकार की आलोचना की और कहा कि यह किसान के हित में नही है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधान मत्री पं. जवाहरलाल नेहरू सहकारिता खेती के पक्ष में थे लेकिन चौ. चरणसिंह ने इसका विरोध किया था और इसे लागू नहीं होने दिया था।
आज फिर सरकार सहकारिता खेती की तरफ अपने कदम बढ़ा रही है। कांट्रेक्ट फार्मिंग सहकारिता का ही स्वरूप है और यह किसानों के हित में नहीं है। रालोद नेता ने कहा कि एक तरफ तो सरकार किसानों की आय दाुगुना करने का वायदा कर रही है, दूसरी तरफ बिजली की दरों में लगातार वृद्धि की जा रही है जबकि पिछले तीन वर्ष गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई है। उन्होंनों किसानों का बकाया गन्ना भुगतान मय ब्याज के कराने तथा बिजली के बिलो पर लगी पेनल्टी खत्म करने की मांग की।
रालोद नेता चमरावल व नौरोजपुर शराब कांड़ में मृतक के आश्रितों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग की। साथ ही सिसाना में वाटर हार्वेस्टिंग लगाये जाने का विरोध किया और कहा कि इससे वहां का पानी दूषित हो जाएगा और पीने के लायक नहीं रहेगा। उन्होंने इसका विरोध कर रहीं महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग की। इस अवसर पर डा. जगपाल सिंह, रामपाल प्रधान, कृष्णपाल, कलीम अहमद व अमर सिंह आदि मौजूद थे।

