Sunday, May 26, 2024
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नहीं हो सकी न्यू ट्रांसपोर्टनगर की स्थापना

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  • भाजपा सरकार ने किया था वायदा
  • लोगों में छायी मासूसी, बन सकता है चुनावी मुद्दा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: शहर की यातायात समस्या के समाधान के लिए न्यू ट्रांसपोर्ट नगर स्थापना की दिशा में काम नहीं हो पाया। लोग इसको लेकर मायूस हैं। यह भी एक चुनावी मुद्दा है। भाजपा सरकार में वादा किया गया था कि यातायात समस्या समाधान करने के लिए न्यू ट्रांसपोर्ट नगर स्थापित करने के लिए कहा गया था, लेकिन इस दिशा में आगे काम नहीं हुआ। एमडीए की तरफ से बागपत रोड पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई थी। धारा 5 और 6 की कार्रवाई की गई थी,लेकिन इसके बाद भी न्यू ट्रांसपोर्ट नगर की दिशा में काम ही आगे नहीं बढ़ पाया।

कागजों में प्लानिंग हुई, फिर आगे क्यों नहीं बढ़ा। यातायात की समस्या ज्यो की त्यो बनी हुई है। बागपत रोड पर ट्रांसपोर्ट नगर हैं, लेकिन जानकार बताते हैं, एक दशक से भी ज्यादा समय हो गया है, शहर में एकीकृत ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना नहीं हो सकी है। वर्तमान में जो स्थल है, वह शहर के बीच में आ चुका हैं। ऐसे में यहां जाम की समस्या बनी रहती हैं। शहरी क्षेत्र भी ट्रांसपोर्ट संचालित होता हैं। इसको लेकर तमाम बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन जिला प्रशासन और एमडीए के बीच सहमति बनने में दिक्कतें आ रही हैं।

विद्या नॉलेज पार्क के पास जमीन भी पहले चिन्हित की गई थी। जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया भी की गई, लेकिन बीच में ही लटका दिया। अधिग्रहण जिस जमीन का किया जाना था, वहां पर अवैध कॉलोनी विकसित कर दी गई है। इस पर भी एमडीए कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।

इनर रिंग भी अधर में

शहर में एमडीए ने इनर रिंग रोड की प्लानिंग की थी। इसको लेकर डीपीआर भी बनी, लेकिन इससे आगे बात नहीं बढ़ी। इस तरह से इनर रिंग रोड नहीं तो एमडीए बनाने को तैयार हैं और नहीं पीडब्ल्यूडी। दोनों के पास ही शहर की जनता को सुविधा देने का समय नहीं हैं। अधिकारी तमाम मामलों में उलझे रहते हैं, लेकिन विकास की फाइलों को दबाये रहते हैं।
इस तरह से एमडीए में भी विकास की फाइलों पर काम नहीं हो रहा है।

अब चुनाव अधिसूचना जारी होने से एक सप्ताह पहले भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मेरठ आये थे। यहां एक सभा में उन्होंने कहा भी था कि विधायक डा. सोमेन्द्र ने उनसे एक मांग रखी है कि इनर रिंग रोड का निर्माण कराया जाए। वह इनर रिंग रोड बना देंगे, लेकिन प्रशासन व एमडीए जमीन का अधिग्रहण करके दे। अब बड़ा सवाल यह है कि जमीन अधिग्रण को लेकर प्रशासन रुचि नहीं लेता।

इसके लिए विशेष बजट सरकार की तरफ से नहीं मिला और प्रशासन के बाद इतना बजट नहीं है कि जमीन का अधिग्रहण किया जा सके। इस तरह से एमडीए भी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया से अपने हाथ खींच रहा हैं। तभी तो इनर रिंग रोड एक दशक पहले प्लानिंग बनने के बाद भी योजना सिर्फ कागजों में दौड़ रही हैं, धरातल पर नहीं।

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