- इस बार डाक कांवड़ लाने का भी प्रचलन बढ़ा
- हाइवे पर चारों तरफ डाक कावंड़ियों की रही भीड़
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: एनएच-58 पर शुक्रवार को डाक कांविड़यों के नाम रहा। दिन भर डाक कांवड़ियों का हाइवे पर आवागमन रहा। शुक्रवार को मंदिर परिसर में जल चढ़ाया जाएगा। इसलिए शिवभक्त अपनी-अपनी मंजिल की आगे बढ़ रहे हैं। इस बार डाक कांवड़ का प्रचलन अत्यधिक देखने को मिला। हाइवे पर डाक कांवड़ की डाक कांवड़ नजर आई। इस बार सावन माह में हरिद्वार से जल लाने वाले शिवभक्तों की संख्या में इजाफा हुआ है।

जहां कंधे पर कांवड़ लाने वाले शिवभक्तों की तादाद बढ़ी है। वहीं, इस बार डाक कांवड़ का प्रचलन भी बढ़ा है। टोली बनाकर डाक कांवड़ लाने वाले शिवभक्तों का शुक्रवार को दिन भर हाइवे पर जमावड़ा रहा। तेजी के साथ दौड़ते शिवभक्त अपनी मंजिल की ओर पहुंच रहे हैं। डाक कांवड़ को लेकर हाइवे पर पूरी तरह से प्रशासन भी चौकन्ना नजर आया।

हाइवे पर चारों तरफ पुलिस फोर्स के अलावा पीएसी बल और आरएएफ बल को तैनात कर दिया गया है। डाक कांवड़ के दौरान किसी भी तरह की कोई अनहोनी न हो। इससे निपटने के लिए प्रशासन पहले ही सतर्क दिखाई दिया। कांवड़ यात्रा का आज आखिरी और अंतिम दिन था, लेकिन हाइवे से लाखों की तादाद में डाक कांवड़ लेकर शिवभक्त सुबह से लेकर शाम तक गुजरते हुए नजर आए।
हाइवे पर उमड़ा शिवभक्तों का जनसैलाब
एनएच-58 पर कांवड़ यात्रा के अंतिम दिन हाइवे पर जनसैलाब उमड़ गया है। केसरिया रंग में रंगा हाइवे चारों तरफ शिवभक्तों से ही नजर आया। इस हाइवे पर अब तक दो करोड़ से अधिक शिवभक्त जा चुके हैं। हालांकि यह आंकड़ा तीन करोड़ के लगभग पहुंचने की संभावना है। इस बार शिवभक्तों की तादाद में बड़ा इजाफा हुआ है। क्योंकि इस बार प्रशासन कांवड़ियों की तादाद को देखकर पहले से ही तैयारी में जुटा हुआ था।

कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह की कोई अनहोनी न हो। इसके लिए प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी के साथ काम किया। खुफिया विभाग लगातार नजर बनाए रखे हुए है। हरिद्वार से जल लाने वाले शिवभक्तों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अगर खुफिया विभाग के अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि अब तक हाइवे से दो करोड़ शिवभक्त गुजर चुके हैं। जबकि शिवभक्तों का यह आंकड़ा इस बार तीन करोड़ को पार कर सकता है।

हाइवे पर शिवभक्तों की भीड़ का अनुमान पहले ही प्रशासन को था। इसलिए प्रशासन ने उसी के मुताबिक काम भी किया है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने वनवे हाइवे पर जो किया है। उसके दोनों ओर पुलिस और पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया है। उसके बाद भी बढ़ती भीड़ के कारण हाइवे पर हालात बेकाबू रहे।
हाइवे पर जाम के हालात हुए बेकाबू
एनएच-58 पर शुक्रवार को दिन भर जाम लगा रहा। शिवभक्तों की भीड़ हाइवे पर उमड़ गई। जिसके चलते हाइवे पर जाम की स्थिति सुबह से लेकर देर रात तक बनी रही। रुड़की रोड़ पर रैपिड का काम होने के कारण मार्ग पर वाहन धीमी गति से चल रहे हैं, लेकिन अब प्रशासन द्वारा वहां वनवे कर दिया गया है। जिसके चलते वहां भी भयंकर जाम लग गया। जाम के हालात दिन भर बेकाबू दिखाई दिए।

दादरी से लेकर परतापुर तक 16 किमी का एरिया में शुक्रवार को जाम के हालात रहे। डाक कांवड़ियों के वाहन और यहां से गुजरने वाले लोगों के वाहनों के साथ-साथ शिवभक्तों के दुपहियां वाहनों की तादाद बढ़ने के कारण हाइवे पर भयंकर जाम लगा। जाम लगने के कारण हाइवे पर निकलना दुभर हो गया। हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा जाम को खुलवाने के लिए लगातार प्रयास कि ए गए,
लेकिन इस बार यह प्रयास भी विफल हो गए। उधर रुड़की रोड़ पर भी जाम लगा रहा। बड़ी-बड़ी झांकियों के आने के कारण हालात बेकाबू हो गए। जिसके चलते लोग दिन भर जाम में फंसे होने से पसीना-पसीना हो गए। जाम की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा अतिरिक्त पुलिस बल भी लगाना पड़ा, लेकिन उसके बावजूद हालात बेकाबू ही नजर आए।
शिवालयों के नजदीक पहुंचे कांवड़िये केसरिया रंग में रंगी क्रांतिधरा
श्रावण मास में शिवरात्रि पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए शिवभक्तों द्वारा गौमुख व हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लेकर खराब मौसम के बीच कांवड़ यात्रा का सफर तय किया। जिसमें अब अधिकतर झूला एवं खड़ी कांवड़ लेकर आने वाले कांवडिये अपनी मंजिल के नजदीक या फिर शिवालय पहुंच चुके हैं।

इस दौरान उनके परिजन भी उनके साथ कांवड़ सेवा शिविर में पहुंचकर यात्रा के पल साझा कर रहे हैं। उधर, लाखों की संख्या में कांवड़िये आने पर वातावरण शिवभोले की बम-बम व जयकारों से गुंजायमान हो गया और क्रांतिधरा केसरिया रंग में रंग गई। इस दौरान पुलिस प्रशासन की तरफ से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम दिखाई दिए उधर कांवड़ सेवा शिविरों में कांवड़ियों की सेवा में लोगों के द्वारा पलक पावडेÞ बिछाकर उनकी सेवा में जुटे दिखाई दिए।

कोरोना महामारी के बाद पहली बार कांवड़ियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई। जिसमें इस बार कांवड़ियों की संख्या लाखों को पास कर करोडों में जा पहुंची। श्रावण माह की शिवरात्रि पर शिवभक्त कंधे पर कांवड़ लाकर मंदिरों में शिवभोले का जलाभिषेक करते हैं। अपनी मंजिल की दूरी के हिसाब से कांवड़ियां गोमुख या फिर हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लेकर अपनी मंजिल की तरफ कदम बढ़ाते चले आते हैं।
भले ही मौसम भीषण गर्मी का या फिर झमाझम बारिश का हो, बस कांवड़ियों की जुबां पर शिवभोले बम-बम-हर हर महादेव के जयकारें सुनाई देते हैं, भले ही उनके पैरों में कितने ही छाले क्यों न पडेÞ हो। शिवभोले की भक्ति में इस तरह से लीन हो जाते हैं कि उन्हें मंजिल कितनी भी कठिन क्यों न हो, लेकिन भोले की भक्ति में वह कठिन राह आसान हो जाती है।

