Friday, March 20, 2026
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एनआईए और एटीएस का खिवाई में छापा, आतंकी कनेक्शन पर एक गिरफ्तार

  • खिवाई के ही तीन युवकों से पांच घंटे की पूछताछ के बाद दो को छोड़ा

जनवाणी संवाददाता |

सरूरपुर: कस्बा खिवाई में शनिवार को तड़के तीन बजे एनआईए और दिल्ली की एटीएस ने कई मकानों की घेराबंदी करते हुए महकार समेत तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। इससे हड़कंप मच गया। तीनों युवकों से टीम ने कई घंटे तक पूछताछ की। घर की भी गहनता से जांच पड़ताल की कुछ दस्तावेज के साथ-साथ मोबाइल भी जब्त कर लिया। पुलिस महकार को साथ ले गई लेकिन दो युवकों को छोड़ दिया।

रात करीब तीन बजे एनआईए और दिल्ली पुलिस ने एटीएस के साथ मिलकर सबसे पहले महकार पुत्र जमशैद के घर पर पहुंची। जहां दरवाजा नहीं खोलने पर पुलिस गेट को तोड़कर मकान के अंदर घुस गई। वहां मौजूद महकार के बड़े भाई इमरान व बाबू को हिरासत में लेकर महकार के बारे में जानकारी की। जिसके बताया गया कि महकार कस्बे की बड़ी मस्जिद में मौहज्जिन (देखरेख करने वाला) है और फिलहाल वहीं सोया हुआ है।

पुलिस और जांच टीम मौके पर पहुंची और महकार को मस्जिद से हिरासत में लेकर उसके घर पर लेकर पहुंच गई। जांच टीम ने परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल को कब्जे में लेकर घर की तलाशी ली। जरूरी दस्तावेज कब्जे में लिये। इस दौरान एनआईए और दिल्ली पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी किये रखी। कस्बे के ही फैजान पुत्र तैमूर घर के भी जांच पड़ताल की और फैजान को हिरासत में ले लिया।

उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया। टीम ने मुस्तफा पुत्र इसरार के घर भी दबिश देकर पूछताछ की। तीनों युवकों पर दिल्ली में दर्ज मुकदमों के संबंध में भी जानकारी जुटायी। युवकों द्वारा सोशल साइट्स पर पाकिस्तान में बात करने और किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है। तीनों युवकों से पूछताछ के बाद महकार पुत्र जमशैद को टीम गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। बाकी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया।

15 दिन पहले मिलने आया था संदिग्ध

कस्बे वासियों ने बताया कि करीब 15 दिन पहले एक संदिग्ध व्यक्ति महकार से मिलने मस्जिद पहुंचा था। उसके कुछ सामान भी सौंपा था। इस बार की पूरे गांव में चर्चा है।

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं

खिवाई में एनएआई और एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में हिरासत में लिए गए संदिग्ध आतंकी कनेक्शन पर महकार के परिवार की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। जानकारी के मुताबिक महकर सात भाई हैं। जिनमें से महकार तीसरे नंबर का है। दो भाई नेत्रहीन हैं। परिवार के लोग मजदूरी करके घर चलाते हैं। महकार की मां ने कहा कि उनके बेटे का कोई कसूर नहीं। उसे लालच देकर फंसाया गया है।

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