Wednesday, January 28, 2026
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Nimisha Priya की फांसी पर यमन में लगी रोक, भारत और मुस्लिम नेताओं की पहल लाई राहत

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी की सजा पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी गई है। यमन की एक जेल में बंद निमिषा को 16 जुलाई को अपने यमनी बिजनेस पार्टनर तालाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में फांसी दी जानी थी, लेकिन भारत सरकार के प्रयासों और केरल के सुन्नी मुस्लिम नेता कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार की मध्यस्थता के बाद यमन के अधिकारियों ने सजा स्थगित कर दी है।

कौन हैं निमिषा प्रिया?

केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया पर आरोप है कि उन्होंने 2017 में अपने बिजनेस पार्टनर तालाल की हत्या कर दी थी। 2020 में यमन की अदालत ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी और 2023 में अंतिम अपील भी खारिज हो गई थी। यमन की राजधानी सना की जेल में बंद निमिषा को 16 जुलाई 2025 को फांसी दी जानी थी।

भारत सरकार और धार्मिक नेताओं की पहल

भारत सरकार ने समय पर हस्तक्षेप करते हुए यमन के अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा। विदेश मंत्रालय और उच्चायोग के अधिकारियों ने यमन के अभियोजकों और जेल प्रशासन से संवाद किया ताकि आपसी समझौते के लिए समय मिल सके।

वहीं, कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार, जो केरल के प्रभावशाली सुन्नी मुस्लिम नेता हैं, ने शेख हबीब उमर बिन हफीज के प्रतिनिधियों को बातचीत में शामिल किया और मृतक के परिवार से संपर्क साधा। उनका मानना था कि जब तक बातचीत चल रही है, तब तक फांसी को टाल दिया जाए।

शरिया कानून में ब्लड मनी का विकल्प

यमन में लागू शरिया कानून के तहत हत्या के मामलों में “ब्लड मनी” यानी वित्तीय मुआवजा देकर सजा को टाला जा सकता है, अगर मृतक का परिवार उसे स्वीकार कर ले।

पहले मृतक तालाल के परिवार से संपर्क असंभव माना जा रहा था, लेकिन अब होदेइदाह राज्य न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और यमनी शूरा काउंसिल के सदस्य, जो तालाल के रिश्तेदार हैं, बातचीत में शामिल हो चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में भी हुई सुनवाई

पिछले दिनों भारत के सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई थी जिसमें फांसी रोकने की अपील की गई थी। सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल (AGI) ने कोर्ट को बताया कि भारत और यमन के बीच बातचीत जारी है और प्रिया की मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

आगे क्या?

अब भारत सरकार, धार्मिक नेता और निमिषा का परिवार मृतक के परिजनों से समझौते की कोशिश में जुटे हुए हैं। यदि परिवार ब्लड मनी स्वीकार करता है, तो निमिषा की फांसी की सजा को हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।

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