Thursday, March 12, 2026
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गेहूं ही नहीं फूलों की खेती पर भी हुआ है गर्मी का असर

 

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लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान इस बार मार्च के बाद से बढ़े तापमान ने सभी फसलों पर असर डाला है, गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ा है तो दूसरी फसलें भी इससे नहीं बची हैं। फूलों की खेती करने वाले किसान भी इससे अछूते नहीं रह पाए हैं।

बढ़ती गर्मी ने गेंदा, गुलाब जैसे फूलों की खेती करने वाले किसानों को परेशान को किया है। खेती में इस्तेमाल होने वाले डीजल, खाद, उर्वरक और कीटनाशकों के रेट में पिछले एक साल में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अब बढ़ती गर्मी ने उन्हें और परेशान कर दिया है। जिस तरह से गर्मी बढ़ी है, जो सिंचाई 15 दिन में करनी होती थी, वो हफ्ते में ही करनी पड़ रही है।

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा प्रकाशित राष्ट्रीय बागवानी डेटाबेस (द्वितीय अग्रिम अनुमान) के अनुसार, 2019-20 के दौरान भारत में फूलों की खेती का रकबा 305 हजार हेक्टेयर था, जिसमें 2301 हजार टन खुले फूलों और 762 हजार टन कटे हुए फूलों का उत्पादन हुआ था।

आंध्र प्रदेश (19.1 प्रतिशत), तमिलनाडु (16.6 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (11.9 प्रतिशत) के साथ कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, गुजरात, उड़ीसा, झारखंड, हरियाणा, असम और छत्तीसगढ़ जैसे अन्य उत्पादक राज्यों से आगे बढ़कर फूलों की खेती अब कई राज्यों में व्यावसायिक रूप से की जाती है। किसानों की माने तो फूलों की कीमत निर्धारित नहीं होती है, ये मंडी में फूलों के आवक पर निर्भर करती है।

अब जिसने फूल लगाया है वो सिंचाई पर खर्च कर रहा है। गर्मी की वजह से फूल झुलसा जा रहा है, गुलाब छोटा होता जा रहा है। अगर एक माला बनानी है तो उसमें एक किलो तक फूल लग जा रहा है। डीजल महंगा है इससे सब त्रस्त हैं, किसान अपने गांव से फूल लेकर आ रहा है तो उसका किराया भी तो बढ़ा है। भारतीय फूलों की खेती के उद्योग में गुलाब, एन्थ्यूरियम, कार्नेशन्स, गेंदा जैसे फूल शामिल हैं।

खेती खुले खेत की स्थिति के साथ-साथ अत्याधुनिक पॉली और ग्रीनहाउस दोनों में की जाती है। भारत, अमेरिका, नीदरलैंड, इंग्लैंड, जैसे कई देशों को फूल निर्यात करता है। भारत ने साल 2020-21 में 575.98 करोड़ रुपए का फूल निर्यात किया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ती गर्मी का असर फूलों के उत्पादन पर काफी पड़ने वाला है। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान’ (एनबीआरआई) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके तिवारी कहते हैं|

इस समय में खेत में गुलाब गेंदा और रजनीगंधा की फसल है, जिस पर गर्मी का असर पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए किसान को ज्यादा सिंचाई करनी पड़ रही है। जैसे कि दोपहर एक बजे से तीन बजे तक गुलाब के पौधे मुरझाए हुए दिखते हैं, किसान को लगता है कि अगर पानी दे देते हैं तो वो सही हो जाएगा, जबकि ऐसा नहीं होता है, इससे पौधे सूखने लग जाते हैं।

यही हाल गेंदा की फसल के साथ भी है, गर्मियों के गेंदा के साथ वैसे भी परेशानी होती है। गर्मी की वजह से फूलों का आकार भी छोटा रह जा रहा है। सिर्फ गुलाब और गेंदा ही नहीं सभी फूलों पर इसका असर पड़ रहा है। इस समय बहुत से किसान पॉली हाउस में जरबेरा की खेती भी करते हैं, वैसे मिड मई से मिड जून तक इसकी देखरेख सबसे ज्यादा करनी पड़ती है, लेकिन इस बार मार्च से ही तापमान बढ़ गया था।

अभी भी कुछ उपाय अपनाकर किसान नुकसान से बच सकते सकते हैं। किसान इस समय ओवर इरिगेशन से किसानों को बचना चाहिए, अगर दोपहर में पौधे मुरझाए हुए दिखे तो सिंचाई न करें, इसी की वजह से पौधे मर जाते हैं।
खेत में मल्चिंग कर दें, इस समय जैसे गेहूं कटने के बाद जो अवशेष बचे हैं, या फिर पेड़ की सूखी पत्तियों से मल्चिंग करें, इससे खेत में नमी बनी रहेगी।

गर्मी बढ़ने के साथ ही फसल पर कई तरह के कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। इस समय जैसे आसपास के खेतों में कोई फसल नहीं होती, जिससे फूलों की खेत में नमी होने के कारण बहुत से कीट भी लग सकते हैं। इसलिए पौधों को सिर्फ ऊपर से न देखें बल्कि नीचे जड़ के पास भी देखते रहें, जहां कीट लगे हो सकते हैं।


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