- संचालकों को 15 दिन के अंदर आॅनलाइन पंजीकरण कर भूगर्भ जल दोहन के लिए एनओसी लेने की हिदायत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिलाधिकारी/अध्यक्ष जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद दीपक मीणा ने जिले के 109 होटल, मैरिज हॉल, रिजार्ट, गेस्ट हाउस के संचालकों को नोटिस जारी किया है। जिसमें अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण नई दिल्ली (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन कराने के लिए गठित समिति ने स्थलीय निरीक्षण में पाया कि संचालकों द्वारा बोरवेल के माध्यम से भूगर्भ जल दोहन किया जा रहा है।
डीएम की ओर से जारी नोटिस में निर्देशित किया गया कि उप्र भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2019 के निहित प्राविधानों के अनुसार भू-गर्भ जल दोहन के संबंध में आवश्यक उपकरण व अन्य मानकों की पूर्ति करते हुए 15 दिन के अंदर आॅनलाइन पंजीकरण कराकर विभाग से एनओसी प्राप्त कर लें। ऐसा न होने की स्थिति में प्रबंधक/संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया क आनलाइन पंजीकरण में किसी भी कठिनाई के संबंध में आदित्य कुमार पांडेय, सीनियर जियोफिजिसिस्ट, भूगर्भ जल विभाग खंड मेरठ पता-बी-371, गंगानगर से संपर्क किया जा सकता है। वहीं इस बारे में आदित्य पांडेय ने बताया कि गठित की गई टीम ने जनपद में 132 ऐसे होटल, मैरिज हॉल, रिजार्ट, गेस्ट हाउस आदि का स्थलीय निरीक्षण किया है। इनमें केवल 23 स्थानों पर पाइप लाइन से मिलने वाले पानी का प्रयोग होता हुआ मिला। जबकि 109 स्थानों पर बोरवेल के जरिये पानी का दोहन होता पाया गया।
भूगर्भ जल विभाग का पानी के संरक्षण और कम खपत पर बल
निरंतर गिरते जलस्तर से बिगड़ते हालात पर काबू पाने के लिए भूगर्भ जल विभाग के माध्यम से जनपद में कई ऐसी योजनाओं को लागू किया गया है, जिनमें पानी के संरक्षण के साथ-साथ कम खपत पर बल दिया गया है। विभाग के वरिष्ठ भू भौतिकविद्ध आदित्य पांडेय ने गंगानगर स्थित कार्यालय में इन योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि जनपद के 12 ब्लॉक में तीन ब्लॉक रजपुरा, खरखौदा और माछरा क्रिटिकल श्रेणी में हैं। सेमी क्रिटिकल श्रेणी के ब्लॉक को नोटिफाइड नहीं किया जाता, बल्कि इन्हें खतरे के निशान से ऊपर मानकर चला जाता है। इस तरह तकनीकी रूप से जनपद के तीन ब्लॉक डार्क जोन में कहे जा सकते हैं। जिन पर केन्द्र और प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही जल संरक्षण की योजनाओं को विभिन्न मदों और विभागों के जरिये क्रियान्वित किया जा रहा है।

इनमें सबसे ज्यादा फोकस इस बात पर है कि खेती में पानी की सबसे ज्यादा 91 प्रतिशत खपत खेती के काम में होती है, इसे कम किया जाए। इसके लिए ड्रिप पद्धति से सिंचाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसमें डार्क जोन के अंतर्गत शामिल 57 गांवों में शत-प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। इनमें लाभार्थी को केवल जीएसटी ही देनी होती है।
सहायक भू भौतिकविद्ध आशीष गुप्ता और नौरतन ने बताया कि मेरठ और बागपत जनपद में डार्क जोन के अंतर्गत आने वाले एक-एक गांव को आदर्श गांव बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके अंतर्गत अटल भूजल योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई पद्धति को लागू कराने का अभियान चलाया जाएगा। वहीं कुछ गांवों में लघु सिंचाई विभाग की ओर से बड़े तालाब बनाने का काम भी कराया जाएगा।
इनमें मेरठ जनपद से नंगला कबूलपुर, बिजौली, बागपत में हिसावदा, दत्तनगर और गोशपुर गांव चयनित किए गए हैं। वहीं खेत तालाब बनाने के लिए भी सरकार की ओर से योजना लागू की गई है। जिसके अंतर्गत अपने खेत के मध्य पानी संरक्षित करने के लिए तालाब बनवाने पर सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है।

