जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: अब उत्तर प्रदेश में एक नई पहल शुरू की जा रही है, जिसमें एक तिथि और एक त्योहार का नियम लागू होगा। इसका मतलब यह है कि प्रदेश में जो भी व्रत, पर्व और अवकाश होंगे, उनका निर्धारण बनारस से प्रकाशित पंचांग के आधार पर किया जाएगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद लिया गया है, और इसके लिए काशी विद्वत परिषद ने एक खाका तैयार किया है।
चलिए जानते हैं इस पहल के मुख्य उद्देश्य क्या हैं..
समानता और सटीकता: विभिन्न पंचांगों में समय-समय पर अंतर हो सकता है, जिससे त्योहारों और व्रतों की तिथियां भिन्न-भिन्न होती हैं। एक ही तिथि और एक ही त्योहार का पालन सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है ताकि पूरे प्रदेश में त्योहार और अवकाश एक ही दिन मनाए जाएं।
समाज में समरसता: जब सभी लोग एक ही दिन पर व्रत और पर्व मनाएंगे, तो इससे समाज में एकता और सामूहिकता बढ़ेगी। यह पारंपरिक भारतीय संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों को एक संगठित रूप में प्रस्तुत करेगा।
धार्मिक परंपराओं का सम्मान: इस कदम से यह भी सुनिश्चित होगा कि धार्मिक परंपराओं का पालन सही और एक समान तरीके से किया जाए, क्योंकि बनारस का पंचांग एक अत्यंत सम्मानित और ऐतिहासिक पंचांग माना जाता है।
क्या पड़ेगा नए नियम का प्रभाव?
पंचांगकारों की सहमति: प्रदेश के सभी प्रमुख पंचांगकारों की सहमति के बाद इस दिशा में काम शुरू किया जा चुका है, और इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि विभिन्न पंचांगों के बीच कोई भ्रम नहीं होगा।
व्रत और अवकाश: इससे प्रदेश में सरकारी छुट्टियों का निर्धारण भी अधिक व्यवस्थित और सटीक तरीके से किया जा सकेगा, जिससे कामकाजी लोगों और धार्मिक समुदाय के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
आगे की प्रक्रिया: अब जब काशी विद्वत परिषद ने इसका खाका तैयार कर लिया है, तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इसके अनुसार सभी धार्मिक पर्वों और व्रतों की तिथियां सही और समयबद्ध रूप से निर्धारित की जाएं।
त्योहारों में नहीं रहेगा अंतर
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नवरात्र, रामनवमी, अक्षय तृतीया, गंगा दशहरा, रक्षाबंधन, श्रावणी, जन्माष्टमी, पितृपक्ष, महालया, विजयादशमी, दीपावली, अन्नकूट, नरक चतुर्दशी, भैया दूज, धनतेरस, कार्तिक एकादशी, देवदीपावली, शरद पूर्णिमा, सूर्य षष्ठी, खिचड़ी और होली में होने वाला अंतर समाप्त हो जाएगा।
समाज के मध्य होने वाला भ्रम होगा दूर
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर का कहना है कि पंचांगों की एकरूपता से समाज के मध्य होने वाला भ्रम दूर होगा। त्योहारों के निर्धारण में केवल उदया तिथि का ही महत्व नहीं होता है। राम नवमी के व्रत पर्व के लिए मध्याह्नव्यापिनी, दीपावली पर प्रदोषव्यापिनी, शिवरात्रि व जन्माष्टमी पर अर्द्धरात्रि का महत्व होता है। सामान्य व्रत पर्वों में ही उदया तिथि का मान लिया जाता है। कालखंड में व्याप्त तिथियों के अनुसार ही व्रत पर्वों का निर्धारण किया जाता है।