- बच्चों के उचित ऊपरी आहार व सही व्यवहार पर दें ध्यान
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: बच्चों को पौष्टिक आहार देना जरूरी है, तभी उनका सर्वांगीण विकास सम्भव है। सिर्फ दाल, रोटी, चावल या खिचड़ी खिलाने से उनका न तो शारीरिक विकास होगा और न ही मानसिक। भोजन में विविधता जरूरी है। यह कहना है जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी का।
आशा त्रिपाठी ने पुंवारका, नकुड़ आदि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बनी पोषण वाटिकाओं के निरीक्षण के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं से अपने दायित्व का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा . सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, वसा, सोडियम, पोटैशियम, सल्फर,मैग्नीशियम, जिंक, कैल्शियम आदि से युक्त आहार देना बहुत जरूरी है। छह माह के बच्चों को स्तनपान के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व युक्त आहार ही देना है। वहीं दो साल से ऊपर के बच्चों को किसी भी प्रकार का जंक फूड नहीं खिलाना चाहिए। इससे उनकी पाचन शक्ति पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही उनके विकास की गति भी धीमी पड़ जाएगी और बच्चा कुपोषण का शिकार हो जाएगा।
बच्चों को न खिलाएं जंक फूड
आशा त्रिपाठी ने इसी कड़ी में गत शुक्रवार को आयोजित पोषण पाठशाला में आहार में विविधता लाने एवं सूक्ष्म पोषक तत्व प्रोटीन युक्त शाकाहारी व मांसाहारीए ओमेगा.3 और ओमेगा.6 युक्त स्रोत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छह माह से ऊपर के बच्चों के लिए विभिन्न पूरक आहारए जंक फूड नहीं खाने के बारे में जानकारी दी । ऊपरी आहार में रिस्पोंसिव फीडिंग तथा कुपोषण प्रबंधन के लिए पिता की भूमिका पर पोषण विशेषज्ञ ने विस्तृत चर्चा की। जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी ने बताया जनपद के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताए सहायिकाओं सहित 45 हजार से अधिक लाभार्थियों पोषण पाठशाला के कार्यक्रम से जुड़े।
उन्होंने बताया पोषण अभियान के अंतर्गत निरंतर वर्चुअल पोषण पाठशाला के जरिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जा रही है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर.घर जाकर गर्भवती और धात्री महिलाओं को स्तनपान के साथ ऊपरी आहार के संबंध में जानकारी प्रदान कर सकें। पाठशाला के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकतार्ओं को पोषण के सन्दर्भ में विशेषज्ञों की ओर से जानकारी आसानी से मिल जाती है।

