- अंतिम क्षणों से पूर्व ओमप्रकाश शर्मा ने उठाई शिक्षकों की समस्या
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति के भीष्म पिता माने जाने वाले ओम प्रकाश शर्मा ने 80 वर्ष की उम्र में शनिवार देर शाम अंतिम सांस ली।
यह भी एक अचंभा ही कहा जाएगा कि जाने से पहले भी है, शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर शनिवार सुबह जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में धरना प्रदर्शन व उपवास में शामिल हुए। उसके पश्चात जिला विद्यालय निरीक्षक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

उसके बाद देर शाम हमेशा के लिए शिक्षक राजनीति के साथ-साथ इस दुनिया को अलविदा कह गए। वह माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के बैनर तले हर सरकार के लिए चुनौती बने रहे इतना ही नहीं पूरे 50 साल तक उन्होंने शिक्षक राजनीति में अपना परचम लहराए रखा। अनेकों शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने उनके वर्चस्व को चुनौती देने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी कामयाब नहीं हो पाए। मगर, अबकी बार भारतीय जनता पार्टी ने उनके वर्चस्व को तोड़ते हुए ओम प्रकाश शर्मा को इस बार एमएलसी चुनाव में हरा दिया।

बता दें कि ओमप्रकाश शर्मा ने विधान परिषद का पहला चुनाव सन 1970 में जीता था । इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कहा जाता है कि ओम प्रकाश शर्मा की लोकप्रियता 90 के दशक में इतनी थी कि सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई और 10:30 बजे तक उन्हें प्रथम वरीयता के 50 फ़ीसदी से ज्यादा वोट मिल गए थे। शिक्षक राजनीति का एक ऐसा चेहरा थे जिसकी एक आवाज पर प्रशासन तक कांप जाता था और अंतिम छोर में भी शिक्षकों की आवाज उठाकर इस दुनिया से चले गए।

