जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि,केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से किसी भी प्रकार की वस्तुओं के सीधे या परोक्ष आयात पर तत्काल प्रभास से रोक लगा दी है। दरअसल, वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से बीते दिन यानि 2 मई को जारी की गई (NOTIFICATION) नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक नीति के हित में लिया गया है। इस रोक के बाद अब पाकिस्तान से आने वाले किसी भी उत्पाद चाहे वह सीधे आयात हो या किसी तीसरे देश के जरिए परोक्ष रूप से हो इन सभी आयातों पर पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
प्रतिबंध को नए प्रावधान के रूप में जोड़ा गया
बता दें कि भारत सरकार की तरफ से लगाए गए यह प्रतिबंध विदेश व्यापार नीति 2023 में नए प्रावधान के रूप में जोड़ा गया है, जिसको लेकर विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने साफ किया है कि अगर किसी मामले में आयात की अनुमति दी जाती है, तो उसके लिए भारत सरकार की विशेष मंजूरी जरूरी होगी।
जाने रणनीति?
पहलगाम हमले के बाद बढ़ते तनाव को देख भारत सरकार ने इसस पहले पाकिस्तान पर आर्थिक शिकंजा कसने की भी तैयारी कर ली। इस रणनीति के तहत भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से पाकिस्तान को दिए गए ऋणों की समीक्षा करने को कहा है।
साथ ही उसने पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ग्रे सूची में शामिल कराने की कोशिश भी शुरू कर दी है। एफएटीएफ की ग्रे सूची में शामिल होने और आईएमएफ के ऋण मंजूरी नहीं देने से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगेगा।
प्रमुख बिंदु?
- राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता: यह कदम आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश के साथ आर्थिक संबंध खत्म करने की नीति के तहत लिया गया है।
- परोक्ष आयात पर भी रोक: केवल पाकिस्तान से सीधे आने वाले उत्पाद ही नहीं, बल्कि किसी अन्य देश के माध्यम से पाकिस्तान से आने वाली वस्तुएं भी इस रोक के दायरे में हैं।
- सार्वजनिक नीति की रक्षा: इससे यह संकेत जाता है कि भारत, आतंकवाद को लेकर सख्त नीति अपनाते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है।
संभावित प्रभाव?
पाकिस्तान पर प्रभाव: पाकिस्तान को मिलने वाला राजस्व और व्यापारिक अवसर सीमित होंगे, जो उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
भारत पर प्रभाव: भारत को पाकिस्तान से जो सीमित वस्तुएं मिलती थीं (जैसे सूखे मेवे, मसाले, या कपड़ा सामग्री), उनकी पूर्ति अब अन्य देशों से की जाएगी।
भू-राजनीतिक संदेश: यह फैसला अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं करेगा।

