आजकल का जमाना प्रदर्शन का है। हम कुछ हैं और कोई ऊंची हैसियत रखते है, तो उसके लटके-झटके भी अलहदा होना चाहिए। दरअसल ऊंचे लोगों की ऊंची पसंद होती है, यह केवल पान मसाला कंपनी का ही स्लोगन नहीं है, अपितु जमाने में अपनी एक अलग हैसियत रखने वाली शख्सियत का जीवन दर्शन है। आदमी पैदल चलते-चलते साइकिल पर आया, साइकिल पर चलते-चलते मोटरसाइकिल पर आया और मोटरसाइकिल पर चलते-चलते कार पर आया। अब जमाने में कार ही कार दिखाई देने लगी है। लेकिन इनमें सब सामान्य ही है, इसलिए इसमें कोई विशेष बात नहीं दिखाई देती। आजकल छोटी और सस्ती कार गरीबी का पर्याय बनती जा रही है।
वैसे आर्थिक संपन्नता के चलते 5/7 कार की कुल कीमत में एक कार रखने वालों की संख्या भी निरंतर बढ़ती जा रही है। यह स्थिति हमारी आर्थिक संपन्नता की द्योतक है। लेकिन अतिरिक्त पॉवर (हूटर) के अभाव में आजकल बेशकीमती कारें भी अपना प्रभाव खोने लगी है। शायद अब वह दिन भी दूर नहीं जब ये मर्सिडीज भी भीड़ का एक हिस्सा बनकर रह जाएं। ऐसी स्थिति में यह लाजिमी है कि अपनी 8-10 लाख रुपट्टी की कार के चलते आजकल के दौर में केवल और केवल भीड़ का हिस्सा बनना है। इसलिए यह जरूरी है कि अपनी कार ऐसी हो जो तमाम कार रखने वालों को ललचा देवे। वास्तव में आजकल का जमाना झांकी का है।
यह अलग बात है कि राजनीति में झांकी की प्रतीक लालबत्ती अब विलुप्त हो गई है। लेकिन राजनीति के माध्यम से असंभव को संभव बना देना बहुत आसान होता है। अब कल की ही बात है आम आदमी के खास नेता का हमारे शहर में पदार्पण हुआ। अब अगर वह भीड़ में से निकलकर आगे आते तो भीड़ का अंश होते। हमारे जैसी कार से आते तो हमारे जैसे हो जाते। यानी की महज भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाते। लेकिन नहीं, एक लंबी सी कार हूटर बजाते हुए आई। ध्वनि बहुत ही कर्कश थी, लेकिन यह आगाज वीआईपी के आने का था। इसलिए दिल थाम कर और टकटकी लगाकर वीआईपी के दर्शन की बेताबी थी। मन में बड़ा गजब का कौतूहल पैदा हो रहा था।
हूटर की आवाज सुनते ही भीड़ में शामिल बहुतेरें भले मानुष की एक प्रकार से दिग्घी बंध गई। भीड़ में किसी के आने पर या जाने पर कोई विशेष हलचल नहीं हुई। लेकिन जो शख्सियत लटके झटके के साथ आई थी उनके आते ही बहार आ गई और जाते ही वीरानी छा गई। भीड़ में कभी किसी शख्सियत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व में कोई निखार नहीं आ सकता। अब भीड़ तो भीड़ होती है, इस एक शब्द में सब के सब समा जाते है। लेकिन जो शख्सियत भीड़ से अलग खड़ी होती है, वह विशेष हुआ करती है। उसके प्रति भीड़ का आकर्षण होता है। अब अगर कोई वीआईपी है तो उसका वीआईपीपन प्रकट भी होना चाहिए। और इसका प्रकटीकरण सिवाय हूटर वाली मर्सिडीज कार के और किसी माध्यम से नहीं किया जा सकता।

