- भीषण गर्मियों के मौसम में बढ़ जाती है आग लगने की घटनाएं, विभाग का दावा आल-इज-वेल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गर्मियों के मौसम में जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोत्तरी होती है, वैसे-वैसे आग लगने की घटनाओं में इजाफा होने लगता है। हर साल अकेले मेरठ में ही आग लगने की दर्जनों घटनाएं सामने आती है। जिनमें जान-माल का नुकसान होता है। वहीं शासन की ओर से आग लगने की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अग्निशमन विभाग है, लेकिन इस विभाग के पास बेहद सीमित संसाधन है। यहां तक कि अकेले मेरठ जिले के लिए केवल 116 फायरकर्मियों की ही नियुक्ति है। जबकि जिले की आबादी करीब 35 लाख है।
गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं होती रहती है। हालांकि इस तरह की घटनाओं को रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन इसमें होने वाले नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। आग लगने के बाद उसपर काबू पाने के लिए जिले में अग्निशमन विभाग है, लेकिन इस विभाग के पास संसाधनों का अभाव है। जिले में कुल पांच फायर स्टेशन पुलिस लाइन, घंटाघर, परतापुर, मवाना व एक टेम्परेरी सरधना तहसील में है। जबकि ए क्लास सिटी नियम के अनुसार चार लाख की आबादी पर एक फायर स्टेशन होना चाहिए। वहीं तहसील स्तर पर तीन किमी के दायर में एक लाख की आबादी पर एक फायर स्टेशन होना चाहिए।

ये हैं दमकल का स्टॉफ
चीफ फायर आॅफिसर 01
फायर स्टेशन आॅफिसर 02
फायर स्टेशन आॅफिसर सेकेंड 02
लीडिंग फायरमैन 11
फायरमैन 80
वाहन चालक 20
ये हैं संसाधन
टैंकर 11
फॉम टेंडर 01
वाटर मिस्ड छोटे वाहन 500 एमएल 04
बैग पैकर्स बुलेट बाइक 03
रेस्क्यू एंबुलेंस 02
आॅफिसर्स व्हीकल्स 06

