Sunday, April 5, 2026
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जल दोहन रोकने वाले ही कर रहे पानी बर्बाद

  • जगह-जगह पानी की पाइप लाइन पड़ी हैं लिकेज, नहीं किया जाता ठीक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जल है तो कल है, बावजूद इसके जल बेवजह बर्बाद किया जाता है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जल-संकट का समाधान जल के संरक्षण से ही है। हम हमेशा से सुनते आये हैं ‘जल ही जीवन है’। जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना नहीं की जा सकती, जीवन के सभी कार्यों का निष्पादन करने के लिये जल की आवश्यकता होती है।

पृथ्वी पर उपलब्ध एक बहुमुल्य संसाधन है जल, या यूं कहें कि यही सभी सजीवो के जीने का आधार है जल। नगरीकरण और औद्योगिकीरण की तीव्र गति व बढ़ता प्रदूषण तथा जनसंख्या में लगातार वृद्धि के साथ प्रत्येक व्यक्ति के लिए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।

जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है देश के कई हिस्सों में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है। प्रतिवर्ष यह समस्या पहले के मुकाबले और बढ़ती जाती है, लेकिन हम हमेशा यही सोचते हैं। बस जैसे तैसे गर्मी का सीजन निकाल जाये बारिश आते ही पानी की समस्या दूर हो जायेगी और यह सोचकर जल संरक्षण के प्रति बेरुखी अपनाये रहते हैं।

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जिसके पास शहर के विकास और शहर में सभी कार्यों की जिम्मेदारी है जब उसी कार्यालय में पानी का दोहन किया जाये तो शहर के अन्य लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है। एक ओर शहर में मंगलवार को जल दिवस के मौके पर जगह जगह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुए।

उधर, जिले के मुख्यालय कलक्ट्रेट में ही स्थिति पानी की टंकियों से पानी बर्बाद होता नजर आया। यहां कलक्ट्रेट में ही पीनी के पानी की टंकियों से स्वच्छ जल बहता रहा और इसे देखने वाला कोई नहीं था। यही हाल पूरे शहर में जगह-जगह दिख जायेगा। सड़कों पर भी पानी की पाइप लाइन लिकेज हैं, लेकिन उन्हें ठीक करने वाला कोई नहीं है।

मंगलवार को पूरे देश में जल दिवस मनाया गया। यहां जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित हुए और लोगों को जल संरक्षण के विषय में जानकारी दी गई, लेकिन लोगों को जागरूक करने वाले प्रशासन को खुद जागरूक होने की आवश्यकता है। यहां जिला प्रशासन के मुख्य कार्यालय में ही स्वच्छ जल बर्बाद हो रहा है और कोई इसे देखने वाला नहीं है।

मेरठ की बात करें तो यहां पहले ही 12 में से छह ब्लॉकों में पीने के पानी का जल स्तर काफी घट चुका है। बावजूद इसके जल संरक्षण को काई इंतजाम नहीं किये जा रहे हैं। जल विभाग भले ही जल संरक्षण के दावे करता है, लेकिन हकीकत यही है कि कुछ तालाबों को जीर्णोद्धार हुआ, लेकिन आधे से ज्यादा पर लोगों का कब्जा हो चुका है।

कलक्ट्रेट में पानी की टंकियों से बर्बाद हो रहा पीने का पानी

जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य द्वारा के ठीक बराबर में ही मंगलवार को पीने का पानी बर्बाद होता रहा। यहां एक कार्यालय की छत पर पीने के पानी की टंकी रखी हुई है। यहां टंकी भरने के बाद भी पानी करीब दो घंटे तक ऐसे ही चलता रहा। सड़क पर यह पानी बर्बाद होता रहा है न तो किसी कर्मचारी और न ही किसी कर्मचारी को यह दिखाई पड़ा। घंटों तक यहां पीने का पानी बर्बाद होता रहा और कोई इसे देखने वाला नहीं। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि जब शहर के मुख्यालय जहां सभी अधिकारी बैठते हैं। वहां के यह हालात हैं तो पूरे शहर में क्या हाल होंगे।

तालाबों पर भी हुआ कब्जा

गांवों में पहले तालाब होते थे जहां पूरे गांव का पानी एकत्र होता था, लेकिन अधिकांश गांवों में तालाब लुप्त होते जा रहे हैं। गांवों में भूमाफियाओं ने तालाब की जमीन पर या तो कब्जा कर रखा है या वहां पर निर्माण कार्य करा रखे हैं। तालाबों को मिट्टी डालकर भर दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से हाल ही में कई गांवों में तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां पर अवैध कब्जा है।

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