Sunday, March 15, 2026
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प्रदेश सरकार के खिलाफ भारतीय कश्यप निषाद महासंघ ने खोला मोर्चा

जनवाणी संवाददाता |

गंगानगर: जातिगत आधार पर जनगणना की मांग और संख्या अनुसार भागीदारी व पिछड़ा वर्ग की क्रीमी लेयर प्रस्ताव खारिज कराने कराने जैसी अनेक मांगों को लेकर भारतीय कश्यप निषाद महासंघ ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

इस बाबत राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा है। भारतीय कश्यप निषाद महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजयपाल कश्यप ने ज्ञापन देते हुए मांग की कि कुम्हार, कश्यप, प्रजापति, मांझी, निषाद, राजभर सहित लगभग 17 अति पिछड़ा जातियों की स्थिति दयनीय ही नहीं बल्कि बद से बदतर हो गई है।

तमाम व्यवसाय और कुटीर धंधे आधुनिक युग में छीन लिए गए हैं। जिससे उक्त जातियों के लोगों का जीवन बसर करना एक चुनौती बन गया है।

उक्त समस्याओं को लेकर 22 दिसंबर 2016 को संविधान की मूल भावनाओं अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री के मंत्री समूह की कैबिनेट ने समाज कल्याण विभाग के अनुसूचित जाति आरक्षण लाभ के प्रस्ताव मूल अनुसूचित जातियों की उत्तर प्रदेश जातियों को क्रमांनुसार परिभाषित किया था, क्योंकि उक्त जातियां भारत सरकार के 1960-1956 व 1957-1961 के गजट में पहले से ही मूल जातियों को अनुसूचित जाति आरक्षण में शामिल है और इनकी अनेक जातियों को अनुसूचित का लाभ भी मिल रहा है जो अलग-अलग क्रमांक पर दर्ज है।

उक्त जातियों को क्रमांनुसार परिभाषित कर अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ देने का शासनादेश प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश ने शासनादेश क्रमांक 234/2016/297 सीएम/26.03.2016 (15) 2007 दिनांक 22 दिसंबर 2016 को जारी किया था।

उक्त शासनादेश के विरुद्ध कुछ अनुसूचित जाति आरक्षण प्राप्त जातियों के संगठनों ने चीफ जस्टिस की बेंच हाईकोर्ट प्रयागराज में याचिका संख्या 2129/2017 डा. भीमराव अंबेडकर ग्रंथालय एवं जन कल्याण तथा चार अन्य और एक याचिका हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर है, जो आज भी विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि उक्त याचिकाओं के विरुद्ध सरकार व शासन के शासनादेश के विरुद्ध विरोधी याचिकाओं 2129/2017 व अन्य चार और लखनऊ खंडपीठ हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार, शासन व समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश जवाब दाखिल कर उक्त याचिकाओं को खारिज कराने तथा दाखिल कराने के निर्देश दें ताकि कुम्हार कश्यप सहित लगभग 17 जातियों को अनुसूचित जाति को अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ मिल सकें।

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