- अतिरिक्त मदरबोर्ड लगाकर पेट्रोल और डीजल में मिलावट
- इससे पहले पांच पंप मालिक किये जा चुके हैं गिरफ्तार
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: एसटीएफ उत्तर प्रदेश को विगत कुछ समय से पेट्रोल पम्पों पर मशीनों में अलग से मदरबोर्ड (कार्ड) व डिस्प्ले लगाकर तथा पेट्रोल और डीजल में सॉल्वेन्ट मिलाकर धोखाधड़ी कर बेचने की सूचना के तहत तीन जनपदों में मारे गए छापों में पांच पंप मालिक गिरफ्तार किये गए थे। शनिवार को एसटीएफ ने इस पूरे गोरखधंधे के मास्टरमाइंड सतेन्द्र उर्फ देवेन्द्र कुमार को परतापुर पुलिस के साथ मिलकर गिरफ्तार किया है।
एएसपी ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन, जिला पूर्ति अधिकारी एवं स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों का गठन किया गया था। मेरठ, बागपत व हापुड़ में स्थित कई पेट्रोल पम्पों को चिन्हित कर एक साथ संयुक्त छापेमारी की गयी थी। जिसमें कम्पनी द्वारा लगाये गये मदरबोर्ड का बाईपास तैयार कर मशीनों में लगे नॉजल्स को चलाने वाले मदरबोर्ड से अतिरिक्त अलग से मदरबोर्ड (कार्ड) लगाकर नोजल को इस कार्ड से कनेक्ट किया गया था तथा तेल के स्टॉक को चेक किया गया,
जिसमें निर्धारित स्टॉक से अत्यधिक मात्रा में स्टॉक पाया गया। जिसे सॉल्वेन्ट मिलाकर तैयार किया गया था। इसी निर्धारित स्टॉक से अधिक स्टॉक को अतिरिक्त लगाये गये मदरबोर्ड (कार्ड) के माध्यम से बेच रहे थे, जिसका न तो मशीन में और न ही अन्य कही किसी प्रकार का कोई रिकार्ड मौजूद था। इसके अतिरिक्त स्टॉक को रिकार्ड से छिपाने के लिए असली टैंक में लगे आटो मेटिक गेज मशीन जिससे टैंक में मौजूद स्टॉक का डाटा आफिस में लगी स्क्रीन पर दिखाई देता है, से अलग एक डमी टैंक तैयार कर उसमें आटोमेटिक गेज मशीन लगाकर उसे आटोमेशन के माध्यम से आफिस में लगे स्क्रीन से कनेक्ट कर अपने हिसाब से डाटा मैनुप्लेट करते थे।

जिससे असली टैंक में मौजूद स्टॉक जो कि निर्धारित स्टॉक से बहुत ज्यादा है, डिस्प्ले पर शो नहीं होता है और अपने हिसाब से जितना निर्धारित स्टॉक होना चाहिए उतना स्टॉक डमी टैंक में लगे एटीजी के माध्यम से डिस्प्ले पर दर्शाते थे, जिससे इनका निर्धारित स्टॉक से अतिरिक्त मिटावटी तेल का स्टॉक पकड में न आ सके। गिरफ्तार तकनीकी मास्टर माइंड देवेन्द्र उर्फ सतेन्द्र ने बताया कि उसने वर्ष 2004 में किसान इंटर कालेज, शामली से बीएससी किया है। 2-3 वर्ष नौकरी की तैयारी की परन्तु जब कहीं सेलेक्शन नहीं हुआ तो वर्ष 2007 में दिल्ली जाकर अलग-अलग इंश्योरेन्स कम्पनियों में लगभग 5 वर्षों तक इंश्योरेन्स सलाहकार के रूप में काम किया।
उस दौरान भगेल नोएडा में किराये के मकान में रहता था, उसी बिल्डिंग में बुलन्दशहर निवासी महीपाल भी रहता था, जो मिडको कम्पनी (जिसकी पेट्रोल पम्प पर मशीन लगी होती हैं) में फिटर (मशीन की सर्विसिंग आदि) का काम करता था। उसने ही उसे पेट्रोल पम्प पर टैंक पाइप लाईन का काम सीखने की सलाह दी और अपने साथ एक दो साइट पर ले गया। कुछ दिन बाद से वह टैंक पाइप लाइन का काम करने लगा और धीरे-धीरे पाइप लाइन के साथ-साथ मशीन के हैगिंग हार्डवेयर (जो पार्ट मशीन के बाहर होते हैं जैसे नोजल, सिविल ज्वाइंट होज पाईप आदि) के साथ-साथ अन्य तकनीकी काम करने लगा। वर्ष 2017 तक दिल्ली के पेट्रोल पम्पों पर संविदा पर रिपेरिंग का काम किया।
वर्ष 2017 में जब एसटीएफ ने पेट्रोल पम्पों पर चिप सिस्टम से धोखाधड़ी करने वाले पम्पों को पकड़ा था। तब उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए आर्डर पास किया था कि मशीनों में लगे पल्सर यूनिट पोटेड (कवर्ड/इन्टेक्ट) होनी चाहिए। जिसकी वजह से सभी कम्पनियों ने पुरानी मशीने निकाल दी या फिर कुछ जगह अनपोटेड की जगह पोटेड पल्सर लगवा दीं। वर्ष 2019 में पेट्रोल पम्पों पर नई मशीने आ गयी और पुरानी मशीनों को स्क्रेपर्स ने खरीद लिया।
वर्ष 2019 में पुरानी मशीने स्केप विक्रेताओं से लेकर मदर बोर्ड एवं अन्य उपकरण इनसे खरीद कर इन्ही उपकरणों के माध्यम से जीबीआर (गिलबारको) कम्पनी के फिटर/ मैकेनिक और पेट्रोल पम्प के मालिकों से मिलीभगत कर आटोमेशन सिस्टम एवं मदरबोर्ड में छेड़छाड़ कर मिलावटी डीजल/पेट्रोल बेचने का काम करते थे। इस मशीनों में बदलाव के एवज में मुझे पम्प मालिकों से 50 से एक लाख रुपये तक मिलता था।
गिरफ्तार आरोपी
सतेन्द्र उर्फ देवेन्द्र कुमार पुत्र हरपाल सिंह निवासी ग्राम लाक थाना कोतवाली, शामली हाल निवासी ड्रीम सिटी, कंकरखेड़ा, ऐश्वर्य गुप्ता पुत्र लोकेश गुप्ता निवासी टीपीनगर, विरेन्द्र त्रिपाठी (विक्रय अधिकारी नायरा (कम्पनी), पेट्रोल पम्प मालिक अवनीश गोयल। पेट्रोल पम्प मालिक/मैनेजर राकेश गुप्ता निवासी विकास बिहार मोहनपुरी, रविन्द्र पुत्र सुधीर पुत्र जोनपाल निवासीगण ग्राम रठोड़ा।

