- बैरंग लौट रहे मरीज, मेडिकल कालेज रेफर किए जा रहे गंभीर मरीज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जिला अस्पताल का आक्सीजन प्लांट तीन माह से बंद पड़ा है। अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीज या तो बैरंग लौट रहे हैं या उन्हें मेडिकल रेफर किया जा रहा है। इसके चलते भारी परेशानियों का मरीजों को सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना दो हजार मरीज आते हैं। इनमें 15-20 मरीजों को आक्सीजन की सपोर्ट देने की जरूरत पड़ती है।
कोरोना काल में जिला अस्पताल में करीब 80 लाख रुपये की कीमत का आॅक्सीजन प्लांट लगाया गया। इस प्लांट से इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू, पीआईसीयू, बर्न वार्ड, आइसोलेशन वार्ड आदि वार्ड में पाइप लाइन के जरिए आॅक्सीजन की सप्लाई की व्यवस्था की गई। इन वार्ड के सभी बेड आॅक्सीजन लाइन से जुड़े हैं, यानी जब जिस मरीज को आॅक्सीजन लगाने की जरूरत है तो उसे तुरंत उक्त लाइन से पाइप जोड़कर आॅक्सीजन दिया जा सके।
जिला अस्पताल का आॅक्सीजन प्लांट तीन माह से बंद पड़ा है। उक्त प्लांट ट्रिप मारकर बार-बार बंद हो जाता है। इस कारण आॅक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों के इलाज के लिए समस्या खड़Þी हो गई। तीन माह पूर्व जब यह प्लांट बंद हुआ तो कर्मचारियों ने इसकी सूचना प्रमुख चिकित्सा अधीक्षिका डा. सुदेश कुमारी को दी। उन्होंने उक्त प्लांट की मेंटीनेंस करने वाली कंपनी को सूचित किया। कंपनी से इंजीनियर आए और उन्होंने बताया कि लो वोल्टेज की वजह से आक्सीजन प्लांट ट्रिप मारकर बंद हो रहा है।
उसे पूरे वोल्टेज देने की व्यवस्था की जाए और जब तक यह व्यवस्था नहीं होती इसे बंद रखा जाए। तीन माह से यह प्लांट बंद पड़ा है। जिन मरीजों को आॅक्सीजन की जरूरत पड़ती है, वे या तो बैरंग लौट जाते हैं या उन्हें मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता है। सोमवार दोपहर ब्रह्मपुरी निवासी दीपक अग्रवाल को उसके परिजन दोपहर को हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड लेकर पहुंचे।
वहां स्टाफ ने बताया कि उनकी हालत गंभीर है और उन्हें आॅक्सीजन देने की जरूरत है, लेकिन अस्पताल का आॅक्सीजन प्लांट खराब हो गया है, इसलिए वे दीपक को एलएलआरएम मेडिकल कालेज ले जाएं। परिजनों ने जिला अस्पताल के कर्मचारियों से वहीं भर्ती करने को कहा, लेकिन कर्मचारी भर्ती करने से इंकार कर दिया। आखिरकार परिजन उन्हें अस्पताल से ले गए।
लो वोल्टेज से बंद हो जाता है आक्सीजन प्लांट: डा. सुदेश
जिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. सुदेश कुमार का कहना है कि आॅक्सीजन प्लांट लो वाल्टेज की वजह से बार-बार ट्रिÑप होकर बंद हो जाता है। जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीज, जिन्हें आॅक्सीजन की जरूरत होती है, उनकी जान बचाने के लिए उन्हें मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है।

