- ओयो होटल है तो 100 खून माफ: सराय एक्ट में पंजीकरण नहीं, फिर भी चल रहे ओयो होटल
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मानचित्र स्वीकृत नहीं… सराय एक्ट में पंजीकरण भी नहीं है। फायर की एनओसी नहीं। फिर भी ओयो होटल कैसे चल रहे हैं? इसका कोई जवाब अधिकारियों के पास नहीं हैं। यही नहीं, ग्रीन बेल्ट में भी ओयो होटल की बिल्डिंग बना दी गई। कदम-कदम पर ये ओयो होटल नियम तोड़ रहे हैं, फिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं, यह यक्ष प्रश्न हैं। देखा जाए तो इन ओयो होटल को 100 खून भी माफ हैं, तभी तो कार्रवाई नहीं हो रही हैं।
इस तरह से तमाम नियम कायदों को ताक पर रखते हुए शहर में ओयो होटल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं। क्योंकि ओयो होटल कुछ भी अपराध करें, नियम तोड़े… लेकिन पुलिस- प्रशासन इनके खिलाफ एक्शन नहीं लेगा। ऐसी धारण बनती जा रही हैं। फिलहाल तो ऐसा ही लग रहा है। क्योंकि पूरे शहर में उन होटलों की चेकिंग होती है , जिनके एमडीए से मानचित्र स्वीकृत हैं। सराय एक्ट में प्रशासन के यहां पर उनका पंजीकरण हैं और फायर से भी उनके पास एनओसी ले रखी हैं।
…ओयो होटल में नहीं तो सराय एक्ट में पंजीकरण है, नहीं उसका मेरठ विकास प्राधिकरण से कोई मानचित्र स्वीकृत है। फिर फायर की भी कोई एनओसी इनके पास नहीं है। इस तरह से ओयो होटल का किसी भी बिल्डिंग पर टैग लगाया और चालू कर दिया। यही सब हो रहा है। नियम कदम कदम पर तोड़े जा रहे हैं , लेकिन पुलिस प्रशासन उन्हें ही परेशान करते है, जो नियम से चल रहे हैं। जो नियम पूरे करते हैं, ऐसे होटलों को ही कानून का पाठ पढ़ाया जाता है।

बाकी ओयो होटल इस दायरे में शायद नहीं आते। इसी वजह से यह भी माना जाता है कि पुलिस के लिए यह ओयो होटल अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बन गए हैं। जिस वजह से इन ओयो होटलों की चेकिंग तक नहीं की जाती। ओयो होटल जिस तरह से बहुत कम जगह में तीन-तीन मंजिल तक बना दिए गए हैं। ऐसे में यदि यहां कोई अग्निकांड हो गया तो उसके बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी। दमकल विभाग को भी इसकी चिंता नहीं है।
यही वजह है कि ओयो होटल का बस सिर्फ टैग लगा होना चाहिए…टैग लगा और आमदनी शुरू हो गई। इन ओयो होटल पर जिस्मफरोशी का धंधा कराने की भी उंगली उठती रही है। क्योंकि पिछले दिनों पुलिस ने जो छापेमारी की थी, उसमें प्रेमी युगल जोड़ें इन ओयो होटल से बरामद हुए थे। फिर भी पुलिस प्रशासन नियमों को तोड़ते ओये होटल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जब इनका मेरठ विकास प्राधिकरण से मानचित्र तक स्वीकृत नहीं है तो इनका ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया जा रहा है।
इन पर आखिर मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियर इतने मेहरबान क्यों हैं ? तभी तो हर कदम पर एनएच-58 स्थित हाइवे पर बागपत बाइपास के आसपास ओयो होटल खुलते जा रहे हैं या फिर खुल गए हैं…। आखिर इसके लिए जवाबदेही किसकी होगी? यही नहीं ग्रीन बेल्ट में ओयो होटल का निर्माण तक कर दिया गया। ग्रीन बेल्ट बागपत बाइपास पर कई ओयो होटल ग्रीन बेल्ट में बने हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हैं। आखिर क्यों? इंजीनियर इन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?

इसमें इंजीनियरों की जवाबदेही क्यों नहीं हैं? ग्रीन बेल्ट में होटलों को निर्माण करा दिया, इसके बाद जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लिये। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसा तब है जब एनजीटी की अदालत ने स्पष्ट आदेश दिये है कि ग्रीन बेल्ट में बने हुए किसी भी निर्माण को गिराया जाए, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आखिर ऐसी कौन सी वजह है की नियम तोड़ने वाले ओयो होटलों पर 100 खून माफ वाली कहावत चरितार्थ हो रही हैं।

