
आजादी के बाद देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ढ़ेर सारे प्रयास हुए। इनमें से एक बड़ी उपलब्धि भारत में पंचायतीराज व्यवस्था की स्थापना है। इतिहास पर दृष्टिपात करें तो पंचायतीराज व्यवस्था किसी न किसी रुप में भारत के सामाजिक-राजनीतिक जीवन का अभिन्न अंग रहा है। वैदिक काल में सभा और समिति का उल्लेख है जिससे स्पष्ट होता है कि उस काल में भी स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था थी। पंचायती राज व्यवस्था को लोकतांत्रिक जामा पहनाने का काम आजादी के बाद शुरू हुआ।