Tuesday, March 3, 2026
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कम लागत में पैरा मशरूम की खेती

KHETIBADI 2


दुनिया भर में, स्ट्रॉ मशरूम तीसरे सबसे अधिक खपत मशरूम हैं। धान-पुआल मशरूम (पैरा मशरूम) एक स्वादिष्ट, पौष्टिक भोजन और समृद्ध प्रोटीन से परिपूर्ण है। धान का पुआल इस मशरूम को उगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे प्रचलित सबस्ट्रेट्स में से एक है। यह प्रजाति कई सेल्यूलोसिक सब्सट्रेट पर अच्छी तरह से बढ़ती है, जैसे कि धान का पुआल, गन्ना बैगस, केले के पत्ते, जलकुंभी, कपास की अपशिष्ट आदि पैरा मशरूम उत्पादन अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के साथ तेज किया जा सकता है।

जलवायु
इसके लिए तापमान बीज फैलाव हेतु (सेल्सियस) 32-38, एवं फलन हेतु (सेल्सियस) 28-32 तथा नमी 80-85 (प्रतिशत) तक हो।

आवश्यक सामग्री
धान का पुआल: पैरा मशरूम की खेती में धान का पुआल सबसे महत्वपूर्ण है। यह धान के पौधे का उप-उत्पाद है। बिस्तर सामग्री के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 1.5 फीट लंबे एवं 1/2 फीट चौड़े बंडल 1-2 किलो ग्राम पैरा बंडल की 16 से 20 बंडल की 1 बेड बनाने के लिए जरूरत होती है।

मशरूम स्पॉन: स्पॉन या मशरूम बीज पूरी प्रक्रिया की पहली आवश्यकता है। हमेशा उस पर सफेद माइसेलियम के साथ स्वस्थ स्पॉन खरीदें। अवांछित रंग जैसे, गहरे भूरे, काले और हरे रंग के साथ स्पॉन को त्यागें।

फॉर्मेलिन और कैल्शियम काबोर्नेट: पैरा को उपचारित करने के लिए 100 लीटर पानी के लिए 135 मिलीलीटर फॉर्मेलिन एवं कैल्शियम काबोर्नेट पैरा के पीएच को कम करने के लिए 100 लीटर पानी में 200 ग्राम डाला जाता है।

बेसन ( चना/लाकडी ): 150 से 200 ग्राम प्रति बेड।

पारदर्शी पॉलीथिन शीट: पॉलीथिन शीट का उपयोग स्पॉन वाले मशरूम बेड को ढंकने के लिए किया जाता है।
पानी की टंकी या प्लास्टिक ड्रम: जरूरत के हिसाब से पानी की टंकी का आकार और संख्या बढ़ाई जा सकती है। 12म4म2 फीट के मानक आकार के टैंक को प्राथमिकता दी जाये। सीमेंट और ईंटों का उपयोग करके एक स्थायी टैंक का निर्माण किया जाता है।

पानी का स्रोत: हमेशा साफ पानी का उपयोग करें। कुंआ बोरवेल, नदी का ताजा पानी, मीठे पानी का अन्य स्रोत।
पैरा मशरूम उगाने की विधि

खुले में पैरा मशरूम की खेती: इस विधि से खेती करने के लिए 100 सेमी लंबी 60 सेमी चौड़ी 15-20 सेमी ऊंची र्इंटों की या क्यारियां बनाते हैं सीधी धूप तथा बारिश से बचाने के लिए इसके ऊपर शेड बना दिया जाता है। बाहरी खेती में बारिश, हवा या उच्च तापमान के संपर्क में आने के जोखिम होते हैं, जो उपज को कम करते हैं।

कमरे के अंदर पैरा मशरूम की खेती: कमरे के अंदर बांस या लोहे के एंगल से रैक बनाएं। एक के ऊपर एक 45-50 सेमी ऊंची चार रैक बनाएं और सबसे नीचे वाली रैक जमीन से 20-30 सेमी ऊपर हो। इस विधि में एक विशेष प्रकार के कंपोस्ट खाद तैयार की जाती है। यह महंगी विधि है। समान्य तौर पर 7-10 स्क्वायर फीट प्रति बेड की आवश्यकता होती है।

पैरा मशरूम उत्पादन के तरीके
-धान पैरा के 1.5 फीट लंबे एवं 1/2 फीट चौड़े बंडल 1-2 किलो ग्राम के एक बंडल तैयार करें। बंडल के दोनों किनारे को बांधे रखें। एक क्यारी बनाने के लिये 12-16 बंडल की जरूरत होती है।
-इस बंडल को 14-16 घंटों तक 200 ग्राम कैल्शियम कार्बोनेट, 135 मिली फार्मेलिन प्रति 100 लीटर साफ पानी में भिगोते हैं। उसके बाद पानी को निथार देते हैं।
-उपचारित बंडलों से पानी निथार जाने के 1 घंटे बाद प्रति बेड 120-150 ग्राम पैरा मशरूम की बीज मिलाते हैं। बिजाई करते समय 4 बंडल को आड़ा बिछाकर उसके किनारे में बीज डालते हैं और उसमे थोड़ा बेसन उसके ऊपर 4 बंडल को तिरछा बिछाते हैं फिर उसके बाद बीज और बेसन मिलाते हैं। ऐसे ही चार परत तक इस विधि को दोहराते हैं। तब कहीं जाकर एक क्यारी बनता है।
-बीज युक्त बंडलों को अच्छी तरह से चारों ओर से पालीथिन से 8-10 दिनों के लिए ढंक देते हैं।
-कवकजाल फैल जाने के बाद पालीथिन सीट को हटाया जाता है। उसके बाद 5-6 दिनों तक हल्का पानी का छिड़काव सुबह शाम करते हैं।
-पैरा मशरूम की कलिकायें 2-3 दिन में बनना प्रारम्भ हो जाती हैं।
-4-5 दिनों के भीतर मशरूम तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।

फल और कटाई
अनुकूल नमी और तापमान की स्थिति में लगभग 20-25 दिनों के बाद मशरूम की कटाई होती है। अकेले धान के पुआल में, 15-18 किलोग्राम/100 किलोग्राम गीला सब्सट्रेट प्राप्त किया जा सकता है। मशरूम की कटाई तब की जाती है जब वोल्वा सिर्फ टूटता है और मशरूम अंदर से बाहर निकलता है। धान के पुआल मशरूम प्रकृति में बहुत नाजुक होते हैं और केवल 2-3 दिनों के लिए रेफ्रिजरेटर के स्थिति में संग्रहीत किए जा सकते हैं। मशरूम को छाया या धूप में सुखाया जा सकता है।
उपज- प्रति बेड लगभग 4-5 किलो तक प्राप्त होती है।

फसल चक्र
लगभग 40-45 दिनों की होती है। भंडारण झ्र रेफ्रिजरेटर मे 2-3 दिन तक रख सकते हैं।

-विजय कुमार, डॉ. रंजीत सिंह राजपूत, डॉ. हरिशंकर,
डॉ. केशव चंद्र राजहंस, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय,
रायपुर, छत्तीसगढ़


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