Sunday, March 22, 2026
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बच्चों को संस्कारवान बनाने में मां-बाप ध्यान दें

  • भैंसाली मैदान में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन चिन्मयानंद बापू ने आत्मा और परमात्मा का बेहतरीन विश्लेषण किया

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भैंसाली मैदान में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन चिन्मयानंद बापू ने कहा कि जिस प्रकार दूध के अंदर घी पहले से ही मौजूद रहता है बस उसको प्रकट करना होता है उसी प्रकार परमात्मा संसार में व्याप्त है। किसी न किसी दशरथ कौशल्या के विशेष प्रेम के कारण वह प्रगट हो जाता है।

कहा कि भगवान के प्रकट होते ही उनके नामकरण संस्कार किए जाए और क्रमश: राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न चारों भाइयों के नाम रखे गए बाद में भगवान की बाल लीला की कथा का रसपान करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने बहुत ही मर्यादा में भगवान की बाल लीला का वर्णन किया है।

बापू ने कहा कि आज समाज में ज्यादातर दो ही संस्कार रह गए हैं विवाह संस्कार और अंतिम संस्कार बाकी के 14 संस्कार हम सभी ने भुला दिए जो हमारे ऋषि महात्माओं का आशीर्वाद हमें दिया गया था। हम व्यस्ततम समय में हम सभी अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। इसलिए सारी सुख सुविधाएं होते हुए भी हम परेशान हैं और दुखी हैं।

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उन्होंने कहा कि जन्म होते ही बच्चे के सारे संस्कार प्रारंभ हो जाते थे गर्भ में आते ही गभार्धान संस्कार से अंतिम संस्कार तक 16 संस्कारों की प्रथा थी। हर मां-बाप को चाहिए अपने बच्चों में संस्कार दे और उनको संस्कारवान बनाएं। यदि कोई बच्चा गलत मार्ग पर जाता है तो उसमें शत-प्रतिशत हाथ उसके मां-बाप का होता है।

टेलीविजन की दुनिया में इतने गलत दृश्य आजकल के बच्चे देख रहे हैं और मां-बाप उसका विरोध नहीं करते। मंदिरों में कथाओं में बच्चे पहुंचते नहीं है और मां-बाप उनको बोलते भी नहीं है कि कथाओं में चले। इसलिए हर मां-बाप की जिम्मेदारी है, अपने बच्चों को मंदिर से कथाओं से और समाज के कार्य पर हित के कार्यों से जोड़ें। कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान विद्या अध्ययन करने के लिए गुरुदेव के आश्रम में पहुंचे थे।

जो घर पर पैसे लेकर ट्यूशन पढ़ाने शिक्षक आते हैं उनका भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि घड़े को चाहिए कि वह नदी के पास जाए नदी स्वयं घड़े के पास नहीं आती। यदि आपके दिल में प्यास होगी तो आप पानी तक जाएंगे। पानी प्यासे के पास नहीं आता। शिक्षा के क्षेत्र में बच्चे तभी आगे बढ़ेंगे जब गुरु के प्रति उनका सम्मान और गुरु के प्रति उनका आदर रहेगा।

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इसलिए विद्यार्थी को चाहिए इस शिक्षक की शरण में जाकर शिक्षा का अध्ययन करें। आयोजक मंडल में कथा के अध्यक्ष डॉ. रामकुमार गुप्ता, मुख्य यजमान जय प्रकाश अग्रवाल, अपार अग्रवाल, रवि माहेश्वरी मुख्य सयोजक ज्ञानेंद्र अग्रवाल, महांमत्री अमित गर्ग मूर्ति, सयोजक हर्ष गोयल मंच व्यवस्था में लोकेश गुप्ता, बिजेंद्र सिंघल मीडिया प्रभारी अमित शर्मा उपस्तिथ रहे। संगठन मंत्री झारखंड कर्मवीर सिंह, प्रदेश महामंत्री अश्वनी त्यागी, विद्यासागर सोनकर, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज, सरोजनी अग्रवाल, कुसुम शास्त्री, विक्रम शास्त्री, सुनील बाधवा, बीना बाधवा आदि मौजूद थे।

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