Saturday, April 11, 2026
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परशुराम जन्मोत्सव 2023: कैसे नाम पड़ा परशुराम, जानें इनकी कथा..

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आज शनिवार यानि 22 अप्रैल को भगवान परशुराम जन्मोत्सव है। आज देशभर में परशुराम जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। दरअसल, भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन हुआ था। तभी से यह पर्व मनाया जाता है। बता दें कि, परशुराम त्रेता युग में यानि रामायण काल में एक भट्ट ब्राह्मण ऋषि के यहां पैदा हुए थे। भगवान परशुराम महर्षि जमदग्नि और रेणुका की संतान हैं। उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार भी कहते हैं।

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कैसे पड़ा नाम परशुराम..

भगवान परशुराम का जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप उनकी पत्नी रेणुका के गर्भ से हुआ था। बताया जाता है कि मध्यप्रदेश के इन्दौर जिले में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में उनका जन्म हुआ था। सनातन धर्म के ग्रंथों महाभारत और विष्णुपुराण के अनुसार परशुराम का मूल नाम राम था किन्तु जब भगवान शिव ने उन्हें अपना परशु नामक अस्त्र प्रदान किया तभी से उनका नाम परशुराम हो गया।

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भगवान परशुराम की कैसे करें आराधना..

  • परशुराम जन्मोत्सव पर आप प्रात: ही उठकर स्नान कर लें।

  • गंगाजल छिड़कर मंदिर को साफ करें और चौकी लगाकर विष्णु भगवान और परशुराम की मूर्ति स्थापित करें।

  • अब भगवान विष्णु और परशुराम को पुष्प,चावल, और पूजन सामग्री चढ़ाएं।

  • अब भगवान को धूप दीप दिखाकर आरती करें और भोग लगाएं।

श्रीकृष्ण को दिया सुदर्शन चक्र

पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण के दौरान भगवान श्रीकृष्ण परशुराम जी से मिले थे। तभी परशुराम ने भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया था।

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तीव्र, प्रचंड और क्रोधी स्वाभाव के भगवान परशुराम..

जैसे की आप जानते हैं कि, परशुराम का जन्म ब्राह्राण कुल में हुआ था लेकिन उनका यह अवतार बहुत ही तीव्र, प्रचंड और क्रोधी स्वाभाव का था। बता दें कि, भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के अपमान का बदला लेने के लिए पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों का संहार करके विहीन किया था।

इसके अलावा अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए परशुराम ने अपनी माता का भी वध कर दिया था। लेकिन वध करने के बाद पिता से वरदान प्राप्त करके फिर से माता को जीवित कर दिया था।

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8 महापुरुषों  का वर्णन

माना जाता है कि, पुराणों में 8 महापुरुषों  का वर्णन किया है। उन्हें अमर भी माना गया है। इन महापुरूषों में हनुमान जी, अश्वत्थामा, राजा बलि, कृपाचार्य, ऋषि मार्कण्डेय, महर्षि वेदव्यास, विभीषण और भगवान परशुराम भी शामिल हैं।

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