- अंतिम 10 सेकेंड में पारुल चौधरी ने बदल दिया खेल का रुख
- 10 सेकेंड की मेहनत ने डीएसपी बनने की चाहत को भी कर दिया पूरा
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: चीन में आयोजित हुए एशियाई गेम में प्रतिभा करने वाली इकलौता गांव की साधारण किसान परिवार में जन्मी पारुल चौधरी ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम तो रोशन कर दिया। वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस में डीएसपी बनने की चाहत ने पारुल चौधरी को मेडल दिला दिया। अंतिम 10 सेकेंड में पारुल चौधरी ने खेल को पलट दिया और स्वर्ण पदक जीत कर डीएसपी बनने के अपने सपने को भी साकार कर दिया।

पारुल के मुताबिक उसका सपना उत्तर प्रदेश पुलिस में डीएसपी बनकर समाज की सेवा करना और गरीब एवं वंचित लोगों को न्याय दिलाना प्राथमिकता में रहा है। उसका सपना यह कब साकार होगा। उसने यह सोचा भी नहीं था, लेकिन एशियाई गेम्स में जब वह प्रतिभा कर रही थी

तो आखिरी एवं अंतिम 10 सेकेंड में उसके दिमाग में सिर्फ एक ही लक्ष्य था कि अगर वह गोल्ड मेडल जीत जाएगी तो डीएसपी बन जाएगी और डीएसपी बनकर देश एवं समाज की सेवा कर सकेगी। उसके इस लक्ष्य में उसकी किस्मत ने साथ दिया और और उसे गोल्ड मेडल की उपलब्धि तक पहुंचा दिया।
10 से 12 वर्षों का संघर्ष हुआ कामयाब
पारुल चौधरी ने बताया कि वह पिछले 10 से 12 वर्षों से कड़ी मेहनत कर रही है और उसकी इस मेहनत में परिवार के लोगों ने हर संभव उसकी मदद की है। खासकर उसकी मां ने उसका साहस बढ़ाया है। जिसके चलते आज वह यहां तक पहुंची है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को तो देती है। साथ ही साथ अपने कोच और सरकार को भी देती है,

क्योंकि सरकार लगातार खिलाड़ियों को बढ़ावा दे रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा वर्ष 2022 में खेल की नई नीति में कहा है कि जो भी गोल्ड मेडल देश को दिलाएगा, उसे सरकार डीएसपी बनाएगी। उसे बात को मैंने लक्ष्य बनाकर रखा और आज मैं गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही।

