- शिक्षकों पर घर से नौकरी करने का मोह पड़ा भारी
जनवाणी टीम |
हस्तिनापुर/चांदपुर: गंगा नदी पार कर अपनी डयूटी करने आ रहे एक अध्यापक व कई अन्य गंगा नदी में नाव पलटने के बाद से लापता बताये जा रहे हैं। नदी में डूबा अध्यापक अपने तीन अन्य साथियों के साथ विद्यालय में पढ़ाने आ रहा था कि रास्ते में ही हादसा हो गया।
पुल के टूटे एप्रोच मार्ग का समय रहते निर्माण न होना व कर्मचारियों का घर से जाकर डयूटी करने का मोह भी हादसे के लिए कम जिम्मेंदार नहीं है। वहीं नाविक का कागज के चंद टुकड़ों के लालच में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना भी हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।
गंगा के उस पार एतिहासिक नगरी हस्तिनापुर क्षेत्र के रहने वाले 100 से अधिक अध्यापक व दो दर्जन से अधिक सफाई कर्मचारी जलीलपुर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों व ग्राम पंचायतों में कार्यरत हैं। वहीं लगभग एक दर्जन बैंक कर्मचारी भी हस्तिनापुर क्षेत्र से आकर चांदपुर व उसके आस-पास संचालित बैंक शाखाओं में कार्य करते है। गंगा नदी पर बने पुल ने इन कर्मचारियों की राह अत्यंत आसान कर दी थी।

ये कर्मचारी बड़ी आसानी के साथ दुपहियां व चौपहियां वाहनों पर सवार होकर अपनी डयूटी पर आते थे। अगस्त माह में गंगा नदी में आई बाढ़ से नदी पर बने पुल का लगभग 50 मीटर से लंबा अप्रोच मार्ग पानी में समा गया था। एप्रोच मार्ग टूटने के बाद इन कर्मचारियों की राह अत्यंत मुश्किल हो गई थी। कुछ कर्मचारियों ने क्षेत्र में कमरे किराये पर ले लिए थे लेकिन इसके बाद भी दर्जनों की संख्या में कर्मचारी प्रतिदिन गंगा नदी में अनाधिकृत रुप से चलने वाली नावों में अपने वाहनों के साथ सवार होकर डयूटी करने आते थे।
मंगलवार को भी वाहनों के साथ नाव में सवार होकर कर्मचारी व कई अन्य स्थानीय नागरिक नदी पार कर आ रहे थे कि रास्ते में ही हादसा हो गया। हादसे का मुख्य कारण नाव चालक द्वारा कागज के चंद टुकड़ों के लालच में क्षमता से अधिक सवारियों व वाहनों को लादना बताया जा रहा है। वहीं नाव के चालक का प्रशिक्षित न होना भी दुर्घटना का कारण माना जा रहा है। लंबी दूरी से बचने के लिए जान जाखिम में डालकर नाव की सवारी कर डयूटी के लिए आना डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों को बहुत भारी पड़ गया।
इनमे से कुछ लोगों की किस्मत अच्छी थी जिनकी जान बच गई। वहीं अध्यापक महेश पाल सिंह व पांच अन्य के गायब होने की आंशका जताई जा रही है। अनाधिकृत रुप से गंगा नदी में चलने वाली नावों को रोकने में विफल रहा प्रशासन अब अपनी कमी छुपाने के लिए मात्र एक अध्यापक के ही गायब होने की कहानी गढ़ रहा है जबकि नाव के साथ गंगा नदी में डूबने के बाद किसी तरह से बचकर निकले देवेन्द्र सिंह आदि की माने तो आधा दर्जन लोगों का कोई पता नहीं लगा है।

उन्होंने अपने साथी अरुण धामा व अमरीष कुमार के साथ किसी तरह से पानी में हाथ पैर चलाकर अपनी जिंद्गी बचाई है। बचकर निकले अध्यापकों की माने तो गंगा नदी की धार में डूबे लोगों ने बचने के लिए जमकर हाथ पैर चलाये जिनमे से कुछ की जान बच गई तथा कई तेज पानी के साथ बहते चले गये।
पुल के अप्रोच मार्ग का टूटना बना हादसे का कारण
गंगा नदी पर पुल बनने के बाद आसान हुई लोगों की राह अप्रोच मार्ग टूटने के बाद इतनी बदतर हो जायेगी कि कुछ लोगों की सांसे ही थम जायेगी कभी सोचा नहीं होगा। गंगा नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से दस वर्षो के बाद पुल बनकर तैयार हुआ था लेकिन उसके अप्रोच मार्ग की अहमियत निर्माण एजेन्सी को शायद पता नहीं थी। शायद इस लिए अप्रोच मार्ग की पिचिंग नहीं की गई थी
जिसके चलते 30 जुलाई को गंगा नदी में आई बाढ़ से पुल का अप्रोच मार्ग बह गया था। यदि अप्रोच मार्ग सही होता तो यात्रियों को जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे सफर तय करना नहीं पड़ता और न ही यह हादसा होता जिसमें कई लोगों की सांसे थमने की आंशका व्यक्त की जा रही है।
जनवाणी ने दो माह पूर्व ही जता दी थी घटना की आशंका
गंगा नदी में अनाधिकृत रुप से क्षमता से अधिक यात्रियों व उनके वाहनों को लादकर चलने वाली नाव से हादसे को लेकर दैनिक जनवाणी ने आठ अगस्त के अंक में भवर पार करते कहीं डूब न जाये जिंदगी की नैया शीर्षक से खबर प्रकाशित कर अपनी आशंका जता दी थी।
खबर प्रमुखता से प्रकाशित किये जाने के बाद भी स्थानीय व हस्तिनापुर का पुलिस प्रशासन आंखे बंद किये बैठा रहा जिसके चलते मंगलवार को यह हादसा हो गया। यदि सतर्कता बरतते हुए नावों का संचालन रुकवा दिया होता तो शायद कई लागों के घरों पर दीपावली के दिन अंधेरा नहीं रहता।
चार वर्ष पूर्व 10 महिलाओं की डूबकर हो गई थी मौत
गंगा में नाव पलटने का यह कोई नया मामला नहीं है। आए दिन लोगों के डूबने की खबर आती रहती है। वर्ष 2018 अगस्त में एक नाव पलटने से 23 लोग डूब गये थे। इनमें 13 लोग तैरकर बाहर आ गये थे और 10 महिलाओं की डूबने से मौत हो गई थी। नौ महिलाओं के शव मिल गये थे और एक महिला का शव आज तक नहीं मिल सका। मंगलवार को हस्तिनापुर से बिजनौर नारनौर के लिए आते समय एक नाव गंगा की बीच धार में पलट गई।
इस नाव में दर्जनों लोेग सवार थे। अधिकांश शिक्षक और सरकारी कर्मी बताए जा रहे हैं। कई लोग लापता हैं। गंगा में नाव पलटने का ये नया मामला नहीं है। आए दिन गंगा में नाव पलटने की घटनाएं होती रहती हैं। बता दे कि वर्ष 2018 में गंगा खादर डैबलगढ़ में एक नाव पलट गई थी। इस नाव में 23 लोग सवार थे। ये लोग अपने जानवरों के लिए चारा लेकर गंगा पार से लौट रहे थे। इस घटना के बाद 13 लोग तैर कर बाहर गए थे। तैर कर बार आने वालों में अधिकांश पुरुष थे। हालाकि दो तीन महिलाएं भी तैरकर बाहर आ गई थी।

लेकिन करीब 10 महिलाओं की डूबने से मौत हो गई थी। एक महिला का शव नही मिला था। करीब एक सप्ताह तक शव खोजने के लिए पीएसी और एनडीआरएफ की टीम गंगा में रेस्क्यू चलाया था। इस कार्य में ग्रामीणों ने भी बढ़चढ़कर भाग लिया था। जनपद के गांव राजारामपुर व डैबलगढ़ के लोगों की माने तो कुसम, अनीता, रिया, नगीनी, गीता, परवेश कुमारी, कविता, सरस्वती और सुनीता की इस हादसे में मौत हो गई थी।
कयास लगाए जा रहे थे कि डूबी महिला को मगरमच्छ या अन्य जलीय जीवों ने अपना शिकार बना लिया होगा या शव रेत में दब गया होगा। इसके अलावा तैरकर बाहर आने वालो में बृजपाल, मूलचंद, विकास, रावेंद्र, सोनू और सुशील आदि शामिल थे।
हर रोज डालते हैं जान जोखिम में
बिजनौर के दर्जनों गांव के लोगों की जमीनें गंगा पार है। ये लोेग पशुओं के लिए चारा और खेती की देखभाल करने गंगा पार जाते हंै। गंगा पार जाने के लिए एक नाव ही सहारा होती है। इस नाव में हर रोज जान की बाजी लगाई जाती है। अक्सर नाव पलटने के हादसे होते रहते हैं। इसमें जान तक चली जाती है। सरकार या प्रशासन ने आज तक इन गांव के लोगों के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया, हालाकि पैंटून पुल के सहारे कुछ किसानों की समस्या कुछ समय के लिए हल हो जाती है।
शिक्षक महेशपाल सहित डूबे थे तीन शिक्षक
नाव हादसे में प्राथमिक विद्यालय हरीनगर के सहायक अध्यापक देवेन्द्र कुमार अपने साथी महेशपाल व गंधोर प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक अरुण धामा तथा प्राथमिक विद्यालय ढाकी के अध्यापक अमरीष कुमार के साथ नाव में सवार होकर आ रहे थे। इनमे से महेशपाल नाव पलटने के बाद से गायब बताये जा रहे है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों की माने तो जमालुदीनपुर प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक संजय कुमार,दत्तियाना विद्यालय में कार्यरत अर्चना रानी, तखतपुर के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत भुवनेष गोयल व रुबी तथा ठेठ के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत रवेन्द्र कुमार तथा सुबोध कुमार के साथ ही बेरखेड़ा के विद्यालय में कार्यरत काजल,मनोज तथा महीपाल,खानपुर खादर के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत अनिता पाल सहित सौ से अधिक अध्यापक प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर गंगा नदी पार कर आते है।
इतना ही नही ग्राम पंचायत पाडला में कार्यरत सफाई कर्मी लेकिनपाल,रायपुर मे कार्यरत सोहनपाल, दत्तियाना पंचायत में कार्यरत मान महेन्द्र सिंह व कमल सिंह,पाडला पंचायत में कार्यरत महेन्द्र सिंह,अजदेव पंचायत में कार्यरत प्रदीप कुमार व विजय कुमार, मुजफ्फरपुर में कार्यरत प्रदीप कुमार,मीरापुर में कार्यरत ओमप्रकाश,स्याऊ पंचायत में कार्यरत महेश कुमार,अकबरपुर सैंदवार में कार्यरत अंकुर,सुलतानपुर पंचायत में कार्यरत दीपक कुमार व अजय कुमार के साथ ही जमालुदीपुर पंचायत में कार्यरत सुरेश कुमार सहित कई अन्य विभागों के कर्मचारी भी इन्ही नावों में सवार होकर गंगा नदी पार करते है।

