- एक माह में तीसरी बार एनसीआर में लगे झटके
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मंगलवार की रात सवा दस बजे के करीब दिल्ली और एनसीआर में आए भूकंंप के झटके मेरठ के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महसूस किये गए। लोग इस कदर घबरा गए घर से बाहर निकल गए। घरों के बाहर काफी देर तक लोग डटे रहे। दिल्ली-एनसीआर में भी धरती तेज हिली है। हालात ऐसे बन गए कि लोग अपने घर से तुरंत बाहर निकले और अफरातफरी की स्थिति बन गई। एक महीने में ये तीसरी बार है जब देश की राजधानी और एनसीआर में भूकंप आया है।
भूकंप का अहसास होते ही सदर, शास्त्रीनगर,टीपी नगर, ब्रहमपुरी, गंगा नगर, दिल्ली रोड के आवासीय कालोनियों और मौहल्लों में हड़कंप मच गया और लोग डर के मारे घरों से बाहर आ गए। कुछ लोग इस कदर भयभीत दिख रहे थे कि उनके मुंह से बस यही निकल रहा था कि भगवान ने बचाया नहीं तो कुछ भी हो सकता था। भूकंप के झटकों के कुछ देर बाद ही दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में रहने वाले लोगों ने धड़ाधड़ फोन खड़काने शुरु कर दिया और अपने परिचितों और करीबियों से कुशलक्षेम पूछा।

देर रात तक लोग भूकंप की खबरें जानने के लिये बेचैन दिखते रहे।मोती प्रयाग में हनी गोल्फ ग्रीन में रहने वाले परिवार ने बताया कि आठवी मंजिल पर ऐसा लग रहा था मानो बिल्डिंग गिर जाएगी। ऐसा भूकंप कभी देखा नहीं था। पूरा परिवार एक दूसरे को पकड़े बैठा था और दरवाजा बुरी तरह से हिल रहा था। मेरठ में कालोनियों और सोसायटियों में रहने वाले लोग पार्को में गए और एक दूसरे को अपने अनुभव सुनाने लगे।
भूकंप के दौरान क्या करें?
भूकंप के दौरान जितना हो सके सुरक्षित रहें। ध्यान रखें कि कुछ भूकंप वास्तव में भूकंप से पहले के झटके होते हैं और बड़ा भूकंप कुछ देर में आ सकता है। अपनी हलचल एकदम कम कर दें और नजदीकी सुरक्षित स्थान तक पहुंचें। तब तक घर के अंदर रहें जब तक कि भूकंप बंद न हो जाए और आप सुनिश्चित हों कि बाहर निकलना सुरक्षित जब तक कंपन बंद न हो जाए, तब तक अंदर ही रहें। रीसर्च से पता चला है कि ज्यादातर लोगों को चोटें तब लगती हैं
जब वह इमारतों के अंदर से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं। ध्यान रखें कि बिजली जा सकती है या स्प्रिंकलर सिस्टम या फायर अलार्म चालू हो सकते हैं। अगर बाहर हों तो आप जहां पर हैं, वहां से न हिलें। हालांकि, इमारतों, पेड़ों, स्ट्रीट लाइट्स और यूटिलिटी तारों से दूर रहें। यदि आप खुली जगह में हैं, तब तक वहीं रहें जब तक कंपन बंद न हो जाएं। सबसे बड़ा खखतरा इमारतों से हैं, अधिकांश मौकों पर दीवारों के गिरने, कांच के उड़ने और वस्तुओं के गिरने से चोट लगती हैं।
कैसे आता है भूकंप?
भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकरना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है और सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं।

