Friday, February 20, 2026
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विभागीय अनदेखी के कारण योजनाओं का लग रहा पलीता

  • एनजीओ द्वारा भेजा जा रहा खाना बच्चों के खाने योग्य नहीं
  • मिड डे मिल में मीनू का नहीं कोई ध्यान

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: ग्रामीण और शहरी अंचल में शिक्षा लेने वाले गरीबों के बच्चों को शत प्रतिशत शिक्षित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार सर्व शिक्षा अभियान और मिड डे मील जैसी तमाम अति महत्वपूर्ण योजनाएं चलाकर करोड़ों रुपये प्रति वर्ष पानी की तरह बहा रही है,

लेकिन शिक्षा विभाग की उदासीनता के चलते योजनाएं परवान चढ़ती नजर नहींं आ रही सरकारी स्कूलों में लगातार बच्चों घट रही बच्चों की संख्या को देखते हुए सरकार स्कूलों में आए दिन नई योजनाएं लागू करती है, लेकिन अधिकांश योजनाओं में विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते पलीता लग जाता है। जिसका खामियाजा बच्चों को चुकाना पड़ता है। तमाम शिकायतों के बाद भी अधिकारी कोई सज्ञांन नहीं लेते।

सरकार द्वारा चलाई जा रही अति महत्वपूर्ण मिड डे मील योजना के तहत कस्बों और शहरों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील पर उसने का जिम्मा विभिन्न एनजीओ को दे रखा है। प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये लेने वाले यह एनजीओ सरकारी योजनाओं के प्रति कितने सजग हैं। इसका अंदाजा में है इसी बात से लगाया जा सकता है कि एनजीओ को दिए जाने वाले मिड डे मील में आए दिन शिकायतों के बाद भी वाक्य मिलीभगत के चलते एनजीओ सबक लेने के लिए तैयार नहींं है।

गुरुवार को इसका एक नमूना कस्बे स्थित आदर्श मॉडल स्कूल प्राइमरी और जूनियर स्कूल में देखने को मिला। जहां बाल विकास सेवा संस्थान दिल्ली की एनजीओ द्वारा स्कूल में भेजे गए मिड डे मील भेजा जाता है। एनजीओ द्वारा भेजे जाने वाले मिड डे मील में न तो मीनू का अता-पता होता है और न ही गुणवत्ता का। गुरुवार को एनजीओ द्वारा बच्चों के लिए भेजी गई खिचड़ी का अधिकांश हिस्सा जला हुआ था। जिससे बच्चों को परोसने के लिए दिया गया। स्कूल के आसपास रहने वाले लोगों की माने तो एनजीओ द्वारा दिये जाने वाले मिड डे मील को बच्चे आये दिन खाने की जगह फेंकतें नजर आते हैं।

मिड डे मील से गायब है मीनू

केंद्र सरकार द्वारा बच्चों के लिए चलाई जा रही मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले खाने में जहां गुणवत्ता पर तमाम सवाल है। वहीं, मीनू का भी कहीं अता-पता नहींं है। मीनू के अनुसार गुरुवार को बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए प्रोटीन से भरपूर दाल रोटी दी जानी थी, लेकिन एनजीओ द्वारा भेजे गए मिड डे मील में दाल रोटी का कहीं अता पता नहींं था।

क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी

बच्चों को दिये जाने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता से समझौते का कोई सवाल ही नहीं उठता है। बच्चों को मीनू के अनुसार मिड डे मील दिये जाने के साथ गुणवत्ता अति महत्वपूर्ण है। एनजीओ को नोटिस जारी कर एनजीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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