
प्लास्टिक बैग्स के जगह, कागज व कपड़ों से निर्मित थैले विकल्प हो सकते हैं, पर इस दिशा में हम आगे बढ़ते तो हैं, लेकिन धीरे-धीरे फिर पीछे खिंच जाते हैं। जबकि, ये सच्चाई पता है कि प्लास्टिक का बेहिसाब इस्तेमाल हमें कहीं का नहीं छोडेगा? हिंदुस्तान में सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर पिछले दिनों खूब हंगामा कटा। लेकिन अब सब शांत हैं। बेशक, औद्योगिक क्रांति के मॉर्डन युग में प्लास्टिक वस्तुएं एक सस्ता और प्रचुर संसाधन हैं, पर इसके दुष्परिणाम एक नहीं, बल्कि कई हैं। ऐसा भी नहीं इन्हें हम जानते ना हों, अच्छे से जानते-समझते हैं, लेकिन फिर भी हम इग्नोर कर आगे बढ़ रहे हैं। निश्चित रूप से बढ़ता प्लास्टिक मानव जीवन, प्राकुतिक और अन्य जीवों के आयामों को तहसनहस कर रहा है। संसार में प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं का बड़ा बाजार फैल चुका है। लोग इससे मुनाफा कमा रहे हैं और हुकूमतों को भरपूर रेव्यन्यू भी देते हैं।