Saturday, March 28, 2026
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खिलाड़ी मूल सुविधाओं से वंचित

  • कैलाश प्रकाश स्टेडियम के हॉस्टल में रहने वाले क्रिकेटर सुविधाओं को लेकर हैं उदास
  • हॉस्टल दूसरे जिले में शिफ्ट करने की कर रहे मांग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कैलाश प्रकाश स्टेडियम में बॉक्सिंग, कुश्ती व क्रिकेट जैसे खेलों के लिए हॉस्टल सुविधा है। इनमें दूसरे जिलों से चुनकर आए खिलाड़ियों को सरकार द्वारा सभी सुविधाएं दी जाती है जिससे यह आगे बढ़कर खेलों में अपना भविष्य बना सके। रहनें, खानें व खेल के उपकरण सभी सरकार द्वारा मुहैया कराए जाते है।

लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट को खेलनें वाले वह खिलाड़ी जो यहां हॉस्टल में रहते है वह उदास हैं। उनकी उदासी की वजह स्टेडियम में क्रिकेट को लेकर मिलने वाली सुविधाओं का आभाव है। अब इन खिलाड़ियों ने हॉस्टल किसी दूसरे जिले में शिफ्ट करने की मांग उठाई है।

खिलाड़ी रोहित: स्टेडियम में ठीक से प्रैक्टिस करने का अवसर नहीं मिल रहा है। अच्छे लेवल तक पहुंचने के लिए अभ्यास का जो स्तर होना चाहिए वह यहां नहीं है। यहां एक साथ कई खेल खेले जाते है जिस वजह से क्रिकेट खिलाड़ियों को अभ्यास करने को नहीं मिलता। जगह की कमी है, इसलिए हॉस्टल शिफ्ट होना चाहिए। सरकार एक खिलाड़ी पर पूरे साल में दो से ढाई लाख रूपये खर्च करती है लेकिन उसका कोई लाभ खिलाड़ियों को नहीं मिल रहा है। हम भी आगे बढ़ना चाहते है लेकिन कैसे बढ़ेगें यह पता नहीं। हमारा भविष्य भी इसी पर निर्भर है।

खिलाड़ी शिवम गिरी: दूसरे जिले से चुनकर आए हॉस्टलर क्रिकेट खिलाड़ी का कहना है यहां मैदान में एथलिटों की संख्या कहीं ज्यादा है। इसी के चलते क्रिकेट मैच नहीं हो पाता, होता भी है तो वह पूरा नहीं हो पाता। एथलीट अपनी प्रैक्टिस करने आ जाते है तो मैच के लिए जगह ही नहीं बचती। यदि कभी मैच सुबह 10 बजे शुरू भी करते है तो उसे दोपहर तीन बजे से पहले खत्म करना होता है। 40 ओवरों के मैच के लिए समय चाहिए होता है, अन्य खेलों के खिलाड़ी मैदान पर आ जाते है तो मैच नहीं हो सकता। यहां से क्रिकेट हॉस्टल दूसरे जिले में शिफ्ट होना चाहिए।

खिलाड़ी दीप सिंह: स्टेडियम के हॉस्टल में ही रहने वाले क्रिकेट खिलाड़ी दीप का कहना है क्रिकेट के हिसाब से मैदान ठीक नहीं है। फिल्डिंग करने में परेशानी होती है, चोट लगने का खतरा बना रहता है, अनइवेंट ग्राउंड है। हॉस्टल में रहने वाले खिलाड़ियों पर सरकार दो से ढाई लाख रूपये प्रतिवर्ष खर्च करती है। लेकिन यहां क्रिकेट के लिए कोई सुविधा नहीं है। इसी वजह से कुछ बच्चे हॉस्टल छोड़कर भी जा चुके है। या तो मैदान ठीक हो जाए या फिर हॉस्टल शिफ्ट हो जाए। इन परिस्थितियों में आगे बढ़ने के चांस नहीं है। हम बहुत सपने लेकर यहां आए है लेकिन वह पूरे कैसे होगें यह सवाल है।

खिलाड़ी तरूण: घर से क्रिकेट में आगे बढ़नें का सपना लेकर आया हूं, लेकिन यहां स्टेडियम में क्रिकेट के लिए सुविधाओं का आभाव है। ठीक से अभ्यास भी नहीं हो पाता है, ऐसे में किस तरह आगे बढ़ेगें यह समझ नहीं आ रहा है। ऐसा मैदान नहीं है कि कितने भी समय उसपर हम प्रैक्टिस कर सकें, मैच खेल सके। बिना अलग मैदान के क्रिकेट जैसे खेल में आगे बढ़ना मुश्किल है। इस तरह तो यहां हमारा कुछ नहीं हो पाएगा। अगर हॉस्टल किसी ऐसी जगह शिफ्ट हो जाए जहां क्रिकेट की सुविधाएं हो तो अच्छा रहेगा। कम से कम खेलने की सुविधा तो मिले।

यह हाल है कैलाश प्रकाश स्टेडियम के हॉस्टल में रहने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों का। सरकार इन खिलाड़ियों को आगे बढ़ानें के लिए अच्छा-खासा पैसा खर्च कर रही है। लेकिन जब खिलाड़ी ही संतुष्ष्ट नहीं है तो फिर सरकार के प्रयास का क्या फायदा।

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