जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आज शुक्रवार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की शुरुआत की घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले 10 वर्षों में भारत का हर अहम स्थल—चाहे वो सामरिक हो या सिविलियन, जैसे अस्पताल, रेलवे स्टेशन या आस्था के केंद्र—उन्नत तकनीकी सुरक्षा कवच से लैस किया जाएगा।
2035 तक हर नागरिक को मिलेगा “राष्ट्रीय सुरक्षा कवच”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैंने एक संकल्प लिया है, इसके लिए मुझे देशवासियों का आशीर्वाद चाहिए। समृद्धि तभी सार्थक है जब उसके साथ सुरक्षा भी हो। हम एक ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा कवच बनाएंगे जो हर नागरिक को सुरक्षित महसूस कराएगा।”
पीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कवच केवल रक्षात्मक नहीं होगा, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों से लैस एक ऐसा सिस्टम होगा जो किसी भी हमले का तुरंत जवाब देने में सक्षम होगा।
क्यों ‘सुदर्शन चक्र’? जानें पीएम मोदी की प्रेरणा
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का नाम भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य शस्त्र सुदर्शन चक्र से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, “महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण ने सूर्य को ढककर अर्जुन को जयद्रथ वध का अवसर दिया था। ठीक उसी तरह हम भी एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाएंगे जो दुश्मन के मंसूबों को रोक सके और लक्ष्य पर सटीक वार कर सके।”
‘Make in India’ को मिलेगा बड़ा बूस्ट
पीएम ने यह भी बताया कि मिशन सुदर्शन चक्र के तहत हथियार प्रणालियों की पूरी रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग भारत में, भारतीयों द्वारा की जाएगी। इसमें अत्याधुनिक तकनीकों के साथ साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर्स, साइबर सिक्योरिटी, और डाटा एनालिटिक्स जैसे पहलुओं को भी जोड़ा जाएगा।
‘प्लस वन नीति’ और टारगेट-ओरिएंटेड अप्रोच
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम ‘प्लस वन नीति’ के तहत हर सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर करते चलेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “सुदर्शन चक्र की एक विशेषता थी कि वह अपने लक्ष्य तक पहुंचकर वापस आ जाता था। उसी तरह हम भी टारगेट आधारित रणनीति अपनाएंगे—हर ऑपरेशन सटीक और पूर्ण।”
एक नया युग शुरू
प्रधानमंत्री के इस घोषणापत्र से स्पष्ट है कि भारत अब सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर बढ़ रहा है, जिसमें आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति का समावेश होगा। ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ न केवल देश की रक्षा करेगा, बल्कि विश्व में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी और सशक्त बनाएगा।

