Friday, February 13, 2026
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काव्य

Ravivani 33


बरसों बाद, फिर से प्रवेश किया है-मैंने
बीते समय के कुछ पलों की उपस्थिति
मेरी डायरी में दर्ज है

एक खिड़की में
ठहरी हुई है-धूप

एक चौखट में
ठहरी हुई है-छांव

एक दीवार से
लिपटी हुई है-ठंडी हवा

छत में दुबकी हैं
बारिश की-बूंदें

एक रोशनदान में
रुकी हुई है-चिड़ियों की चहचहाहट

सीढ़ियों में रुकी हुई है
तुम्हारे कदमों की पदचाप

मेरे-तुम्हारे साथ के बीते दिनों के पल
ठहरे हुए हैं
मेरे-तुम्हारे हथेलियों का गर्म स्पर्श
और सांसों की गर्माहट कमरे में रुकी हुई है
रोक रखा है मैंने डायरी में


janwani address 9

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