- मुखबिरों की कमी ने पुलिस को हर केस में उलझा कर रख दिया
- चेन लूट, चोरी और बवाल की फोटो की शिनाख्त में गुजर रहा समय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पुलिस के लिये कभी सीसीटीवी कैमरे की फुटेज घटना को खोलने के लिये मददगार होती थी, लेकिन अब यही फुटेज पुलिस के लिये सिरदर्द बनी हुई है। कोई भी घटना होती है पुलिस सीसीटीवी की डीबीआर कब्जे में लेकर फुटेज निकाल कर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश करती है।
एक महीने में आधा दर्जन से अधिक लूट और चोरी की घटनाएं हो चुकी है और पुलिस को सीसीटीवी कैमरे की फुटेज तक मिल चुकी है, इसके बाद भी पुलिस बदमाशों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि पुलिस के पास सालिड मुखबिरों की कमी हो गई है और जो लोग मुखबिरी करते हैं वो निजी स्वार्थ में लगे रहते हैं और अपने दुश्मनों को फंसाने में उनका ध्यान रहता है।
गढ़ रोड पर प्रिया ज्वेलर्स और अंबिका ज्वेलर्स में बदमाशों ने हैरतअंगेज अंदाज में सुरंग बनाकर शोरूम में प्रवेश किया और लाखों के जेवरात चोरी करके ले गए। पुलिस के पास चोरों की फोटो भी आ गई। चोरों ने खुद की हैंड राइटिंग में पत्र भी लिखकर छोड़ा था। सुरंग चोर गिरोह के सदस्यों को पकड़ने में पुलिस के पसीने छूट गए हैं और अभी तक पुलिस चोरों के करीब नहीं पहुंच पाई है।

इसी तरह शास्त्रीनगर, मेडिकल, सिविल लाइन और गढ़ रोड पर महिलाओं से हुई चेन लूट में पुलिस के पास बाइक सवार बदमाशों की फुटेज भी आ गई लेकिन बदमाशों तक पुलिस नहीं पहुंच पाई। मेडिकल थाना क्षेत्र के बलवंत नगर निवासी सीए अनुपम शर्मा की पत्नी रुचि शर्मा ड्रेस डिजाइनर हैं और घर पर ही ड्रेस शोरूम चलाती हैं। रुचि शर्मा अपनी नौकरानी के साथ खरीदारी करके घर लौट रही थीं।
घर के पास पहुंचने पर बाइक सवार दो बदमाश उनके गले पर झपट्टा मारकर मंलगसूत्र लूटकर भाग गए। मेडिकल पुलिस घटना स्थल पर पहुंची और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले। लुटेरे कैमरे में कैद हो गए। मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार सेक्टर-6 में मायके में आई इंदू पत्नी मनोज निवासी देहरादून से बाइक सवार दो बदमाशों ने मंगलसूत्र लूटा था।
दूसरी वारदात सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रात 10 बजे पांडव नगर में आरती अग्रवाल से बाइकर्स ने ही चेन लूट ली थी। इन सभी मामलों में पुलिस को हेलमेट लगाए बदमाशों की फोटो सीसी कैमरों से लग गई थी लेकिन पुलिस एक भी मामले में बदमाशों को नहीं पकड़ पाई है। पुलिस का शहर और देहात में नेटवर्क पहले जैसा नहीं रहा है। जब लोग खुद पुलिस को सूचना देते थे। अब पुलिस की वर्किंग बदलने से लोग पुलिस को सूचना देने के बजाय बचने लगे हैं।

