- नगर निकाय चुनाव में सभी दावेदार खुद को उपयुक्त प्रत्याशी होने का कर रहे दावा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निकाय की आचार संहिता लागू होते ही सियासी पारा हाई हो गया हैं, जिसके बाद राजनीतिक दलों के नेताओं में टिकट पाने की लड़ाई शुरू हो गई है। सभी दावेदार खुद को उपयुक्त प्रत्याशी होने का दावा कर रहे हैं। शहर के चौराहों पर भी राजनीतिक चर्चाओं का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भाजपा के बागपत रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पर भी भाजपा नेताओं की भीड़ नजर आ रही हैं।
यही नहीं, सपा के जेल चुंगी रोड की स्थिति कार्यालय पर संभावित प्रत्याशी दावा कर रहे हैं। रालोद के भैंसाली बस स्टैंड के सामने रालोद कार्यालय पर भी संभावित प्रत्याशी दावा ठोकने के लिए पहुंच रहे हैं। चुनाव जीतने का गणित चुनाव भी ये दावेदार पार्टी के आला नेताओं को समझा रहे हैं। समीकरण भले ही कुछ भी हो, लेकिन संभावित उम्मीदवार अपनी जीत पक्की बता रहे।
भाजपा में इस बार पंजाबी बिरादरी से किसी संभावित प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने की ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही है। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह मेरठ में ही डेरा डाले हुए हैं। पार्टी किसके सिर पर मेयर प्रत्याशी का ताज पहनाती इसके लिए बारीकी से पार्टी के नेता जांच पड़ताल कर रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक दावेदार अपना अपना बायोडाटा भाजपा कार्यालय में पहुंचा रहे थे।
आचार संहिता लागू होने के बाद से तो दावेदारों की चेहरा दिखाने की होड सी मच गई है। यही नहीं, संभावित प्रत्याशी होने का दावा कर रहे राजनीतिक नेताओं ने अपने साथियों को फोन करके पार्टी के नेताओं के इर्द-गिर्द क्या गतिविधियां चल रही हैं, उसको टटोला जा रहा है। इसी तरह से समाजवादी पार्टी के जेल चुंगी स्थित कार्यालय भी गुलजार दिख रहा है। सपा के कार्यालय पर सोमवार को मेयर पद के दो संभावित उम्मीदवारों ने बायोडाटा दिये गए।
कुछ सपा के बड़े नेता जो मेयर का चुनाव लड़ना चाहते हैं, वो लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं, वहीं पर पार्टी हाईकमान के सामने मेयर प्रत्याशी की दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। कांग्रेस के नेता भी दावेदारी कर रहे हैं तथा कांग्रेस के बुढ़ाना गेट स्थित कार्यालय पर बायोडाटा लेने के लिए पार्टी के नेता बैठ रहे हैं। यही नहीं, आम आदमी पार्टी भी निकाय चुनाव में ताल ठोकने जा रही है। मंगलवार को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह मेयर पद के संभावित उम्मीदवार का ऐलान करने आ रहे हैं।

बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने भी ऐलान किया है कि उनके प्रत्याशी प्रत्येक जनपद में मेयर का चुनाव लड़ेंगे। बसपा में भी मेयर के संभावित प्रत्याशी दावेदारी ठोक रहे हैं। बसपा नेताओं का पार्टी कार्यालय पर बायोडाटा भी लिया जा रहा हैं। शिवसेना व अन्य पार्टियां भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं, इनके भी संभावित उम्मीदवार मेयर पद का चुनाव लड़ने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
बदल गया चुनाव लड़ने का तरीका, हुआ हाईटेक
नगर निकाय चुनाव 2023 के लिये आदर्श आचार संहिता लगने के साथ ही चुनावी ‘रण’ पूरी तरह से तैयार हो चुका है। देश आजादी के 75 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में आजादी अमृत महोत्सव वर्ष के रूप में मना रहा है। देश की आजादी के लिये सन् 1857 की क्रांति के रूप में मेरठ से जो पहला बिगुल बजा वह धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया और उसकी बदलौत देश में उठी वह चिंगारी आजादी के रूप में तब्दील हो गई।
देश आजाद हो गया और वर्तमान वर्ष को भारत सरकार के द्वारा आजादी के 75वें वर्ष को अमृत महोत्सव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। 30 वार्डों वाली इस महानगर पालिका परिषद में एक चेयरमैन चुना जाता था और 30 वार्डों में 2-2 वार्ड प्रमुख के रूप में सभासद चुने जाते थे, लेकिन आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष वाले वर्ष में महानगर पालिका की जगह अब नगर निगम ने ले ली है।
महानगर निवासी व्यो-वृद्ध रमेशचंद गर्ग से बातचीत की तो उन्होंने आज के इस दौर में बड़े बुजुर्गों से इस तरह की बातचीत के लिये जनवाणी की पहल का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि जो पहला मतदान किया था। उस समय जाति धर्म को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। विकास के मुद्दों पर प्रत्याशी एवं वोटरों का फोकस होता था। उनके द्वारा जो पहला वोट किया गया उस समय सार्इंदास जैन चेयरमैन पद पर चुनाव जीते थे। दूसरे नंबर पर कौन प्रत्याशी आया याद नहीं है।
सफाई मजदूर नेता एवं निवर्तमान पार्षद टीसी मनोठिया ने बताया कि उनकी उम्र करीब 74 वर्ष हो चुकी है। उन्होंने महानगर पालिका परिषद एवं नगर निगम के गठन के बाद कई पंचवर्षीय योजनाओं के चुनाव देखे और कई उतार चढ़ाव देखने को मिले। उसका प्रमुख कारण भ्रष्टाचार की लगातार जड़ों का मजबूत होना एवं विभिन्न पार्टियों की नगर पालिका, नगर निगम के अध्यक्ष पदों के साथ ही वार्ड अध्यक्ष पद पर भी नजर रहती है कि उनकी पार्टी का प्रत्याशी कैसे चुनाव जीते। जिसमें तमाम विकास के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। जिसमें वर्तमान में वोटरों का अब साफ सुथरी छवि वाले निर्दलीय प्रत्याशी से ज्यादा फोकस पार्टी के उस प्रत्याशी पर रहता है।
अजय गुप्ता ने बताया कि नगर निगम पद पर पहला चुनाव 1989 को हुआ था और पहले महापौर अरुण जैन बने थे। नगर महापालिका बनने पर 30 वार्डों में 60 पार्षद चुने गये। जिसमें एक वार्ड में दो पाषर्द चुने गये थे। जिसमें उस समय सीधे जनता के द्वारा महापौर नहीं चुना गया और वार्ड सभासदों के द्वारा चुना गया थ। उसके बाद सन् 1995 में 70 वार्डों की जनता ने सीधे अय्यूब अंसारी को चुनाव जिताया था। पार्टियों को चाहिए की वह साफ एवं अच्छी छवि वाले प्रत्याशी को पार्टी के सिंबल से अध्यक्ष एवं पार्षद का चुनाव लड़ायें। जोकि सभी वर्गों लोगों की जन समस्याओं को सुने और सभी वार्डों में बराबर विकास कार्य कराये, विकास के क्षेत्र में पक्षपात न करे।
हाजी राजा का कहना है कि वह लगातार कई वर्षों से महापौर एवं वार्ड अध्यक्ष पद के चुनाव को देखते आ रहे हैं। जिस समय उन्होंने पहला मतदान किया था और वर्तमान में आगामी चुनाव में भी मतदान करने जा रहे हैं। उस समय से आज के समय तक काफी बदलाव देखने को मिला है। पहले वार्ड के लोग उस प्रत्याशी का चयन करते थे। जिसे वह लडाना चाहते थे, लेकिन अब पार्टिंयां तय करती हैं कि वह किसे चुनाव लड़ाना चाहती है तो विकास के साथ तमाम मामलों में बदलाव तो देखने को मिलेगा ही।

